
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : October 9, 2022 6:14 PM IST
Effects of stress in pregnancy: प्रेगनेंसी महिलाओं के लिए एक ऐसा समय है जब उनके शरीर में हार्मोन्स का स्तर बहुत नाटकीय तरीके से बदलता है। ऐसे में उन्हें कई प्रकार की मानसिक और शारीरिक समस्याएं भी होती हैं। अक्सर देखा जाता है कि प्रेगनेंसी के दौरान महिलाए अचानक से बहुत अधिक चिड़चिड़ी हो जाती हैं या अचानक बहुत अधिक उदास या दुखी रहने लगती हैं। तो वहीं कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के 9 महीनों में खुद को ऐसी स्थिति में पाती हैं जहां वे मानसिक स्तर पर बहुत अधिक दबाव और तनाव महसूस करती हैं। यह तनाव उनकी मेंटल हेल्थ को पूरी तरह बिगाड़ सकता है और उनके होनेवाले बच्चे पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ सकता है। (Effects of stress in pregnancy on woman and unborn babies)
कुछ स्टडीज के अनुसार, ऐसी महिलाएं जो प्रेगनेंसी में बहुत अधिक उदास या दुखी रहती हैंउनके बच्चे हमेशा थके-थके और चिड़चिड़े से दिखायी देते हैं। वहीं, तनाव से गर्भ में और जन्म के बाद बच्चे का विकास (overall development of children) भी अच्छी तरह नहीं हो पाता और ऐसे बच्चों में स्ट्रेस हार्मोन्स (stress hormones) का निर्माण भी अधिक होता है जिसके चलते ये बच्चे आगे चलकर छोटी-छोटी बातों पर बेचैनी महसूस करते हैं और इन्हें लोगों से मिलने-जुलने में भी कम रूचि होती है। इससे बच्चों में अकेलापन बढ़ सकता है और उन्हें जिंदगी में आगे चलकर व्यवहार संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।
जानकारों के अनुसार प्रेगनेंसी में तनाव (stress in pregnancy) महसूस करने वाली महिलाओं के बच्चों में मेंटल हेल्थ और व्यवहार से जुड़ी समस्याओं की संभावना काफी अधिक होती है। ऐसे बच्चों को पढ़ने-लिखने, निर्णय लेने और दूसरे बच्चों के साथ तालमेल बिठाने में दिक्कतें आ सकती हैं। वहीं, वयस्क होने पर भी ये बच्चे लोगों से रिश्ते बनाने में कई तरह की परेशानियां महसूस कर सकते हैं। गर्भवस्था में मां द्वारा डिप्रेशन और तनाव महसूस करने का बुरा परिणाम उनके बच्चों के व्यवहार में इस तरह भी दिखायी दे सकता हैं जैसे-
