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अर्ली डिलीवरी के लिए भूल कर भी न करें ये गलतियां

डिलीवरी एक नेचुरल प्रक्रिया है, इसके लिए धैर्य से करें इं‍तजार।

Written By Yogita Yadav
Published : August 23, 2018 4:54 PM IST

प्रेगनेंसी की पहली और दूसरी तिमाही में तो महिलाएं अपना बहुत ध्‍यान रखती हैं पर तीसरी तिमाही में अकसर वे ऐसी गलतियां कर जाती हैं, जिसके उनहें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। कई बार तो ड्यू डेट आने पर भी जब लेबर पेन शुरू नहीं होते तो वे घरेलू नुस्‍खे आजमाना शुरू कर देती हैं। पर यह बहुत ही संवेदनशील स्थिति है। इस दौरान की गई कोई भी गलती मां और बच्‍चे दोनों की सेहत पर भारी पड़ सकती है।

समझें नेचुरल प्रक्रिया

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डॉक्‍टर मासिक की तिथि, अलट्रांसाउंड आदि की रिपोर्ट के आधार पर ही डिलीवरी डेट देते हैं। पर तकनीक के अलावा एक नेचुरल प्रक्रिया भी है। इसे समझने की कोशिश करें। हर बच्‍चे की ग्रोथ और हर महिला की गर्भावस्‍था अलग-अलग होती है। एक ही फॉर्मूला सब पर लागू नहीं होता। इसलिए थोड़ा धैर्य रखें।

लेबर पेन की अवधि  

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अकसर ऐसा माना जाता है कि आठवां महीना खत्‍म होने तक हल्‍के दर्द शुरू हो जाते हैं। जिनकी अवधि डिलीवरी नजदीक आने का संकेत देती है। पर सभी के केस में ऐसा नहीं होता। कुछ महिलाओं को डिलीवरी से केवल कुछ घंटे पहले ही दर्द महसूस होना शुरू होता है।

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न करें ज्‍यादा व्‍यायाम

व्यायाम ज्यादा करने से बॉडी फ्लेक्सिबल और लचीली जरूर होती है, लेकिन इससे प्रसव पीड़ा में कैसे फायदा हो सकता है यह तुक से बाहर है। लेकिन ये जरूर है कि ज्यादा व्यायाम करने से होने वाले बच्‍चे को नुकसान हो सकता है औऱ कई बार तो ब्‍लीडिंग भी होनी शुरू हो जाती है।

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क्‍या होगा पोंछा लगाने से

दादी-नानी अकसर सिजेरियन से बचने के लिए महिलाओं को पोंछा लगाने, सीढि़यां च्रढ़ने की सलाह देती हें। पर जो प्रक्रिया है, वह तो होगी ही। इससे सिर्फ आपकी थकान ही बढ़ेगी। गर्भावस्‍था के दौरान सैर करना ही सबसे अच्‍छा व्‍यायाम। इस दौरान लंबी अवधि तक खड़े रहने से भी परहेज करना चाहिए।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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