क्‍या देर से शादी करने से बढ़ जाता है बांझपन का खतरा ?

एक आम धारणा यह भी है कि ज्यादा उम्र में शादी करने से इनफर्टिलिटी का जोखिम बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि कैसे बढ़ती हुई उम्र बढ़ा देती है बांझपन का जोखिम।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : March 8, 2019 2:38 PM IST

इन दिनों दस में से एक जोड़ा अपने बच्‍चे के लिए तरस रहा है। इसकी वजह है युवा जोड़ों में बढ़ती इनफर्टिलिटी की समस्‍या। कई बार तो यह समस्‍या इतनी ज्‍यादा बढ़ जाती है कि लोगों को पता ही नहीं चल पाता। जबकि एक आम धारणा यह भी है कि ज्‍यादा उम्र में शादी करने से इनफर्टिलिटी का जोखिम बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि कैसे बढ़ती हुई उम्र बढ़ा देती है बांझपन का जोखिम।

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हैरान करने वाले हैं आंकड़ें

बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी की समस्या पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गई है। एक सर्वे के अनुसार भारत में लगभग 2 करोड़ 75 लाख जोड़े बांझपन का शिकार हैं, यानी हर 10 में से 1 जोड़ा शादी के बाद बच्चा पैदा करने में सक्षम नहीं है। बांझपन के बारे में लोगों के मन में कई गलत धारणाएं हैं, लेकिन चिकित्सक मानते हैं कि ज्यादातर लोगों में बांझपन का कारण उनकी गलत आदतें होती हैं।

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ज्यादा उम्र में शादी करना

आजकल लड़के-लड़कियां करियर सेट हो जाने और आर्थिक रूप से सक्षम हो जाने के बाद शादी के फैसले ले रहे हैं। यही कारण है कि ज्यादातर लड़के-लड़कियां 30-32 की उम्र तक शादी के बंधन में बंधना चाहते हैं। इसके अलावा शादी के बाद भी वो कुछ समय तक बच्चे की जिम्मेदारियों से बचना चाहते हैं। चिकित्सक मानते हैं कि 35 की उम्र के बाद महिलाओं को मां बनने में सामान्य से ज्यादा मुश्किलें आती हैं। ज्यादातर मामलों में नॉर्मल डिलीवरी के बजाय ऑपरेशन करना पड़ता है और कई जोड़ों में शुक्राणुओं की क्वालिटी भी खराब होने लगती है, जिससे उन्हें प्रेग्नेंसी में परेशानी आती है।

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दूसरे कारण जो आजकल अधिकांश स्त्रियों में पाये जा रहे हैं वो हैं फाइब्रायड का बनना, एन्डोमैंट्रियम से सम्बन्धी समस्याएं। उम्र के बढ़ने के कारण हाइपरटेंशन जैसी दूसरी समस्याएं भी आ जातीं हैं और इनके कारण महिलाओं में फर्टिलिटी प्रभावित होती है।

उम्र के साथ प्रभावित होती है स्‍पर्म क्‍वालिटी

आजकल कम उम्र में सिगरेट, शराब, गुटखा और कई बार ड्रग्स की लत भी लड़के-लड़कियों में काफी बढ़ गई है। इन आदतों के कारण भी वीर्य की गुणवत्ता खराब होती है और स्पर्म काउंट कम होता है। यह होने वाले बच्चे में आनुवांशिक तौर पर बदलाव भी कर सकता है। इसी प्रकार से अल्कोहल भी टेस्टोस्टेरॉन के उत्पादन को कम करता है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी प्रकार की दवाओं या ड्रग्स के गलत तरीके से इस्तेमाल के कारण भी इन्फर्टिलिटी हो सकती है। स्टेरायड जैसे हार्मोन हमारे शरीर के हार्मोन के स्त‍र में बदलाव लाते हैं जो कि हमारे स्वास्‍थ्‍य को भी प्रभावित कर सकते हैं। बीमारी होने पर भी चिकित्सक की सलाहानुसार ही दवाएं लेनी चाहिए।

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काम का बोझ

आजकल लगभग हर सेक्टर में काम और सफलता का दबाव पहले से ज्यादा बढ़ गया है। इस कारण से लोग ओवर टाइम, नाइट शिफ्ट या घर पर काम करने को मजबूर होते हैं। काम के साथ-साथ शरीर के लिए आराम भी बहुत जरूरी है। समय कम होने के कारण लोग न तो एक्सरसाइज करते हैं और न ही अपने खानपान पर ध्यान दे पाते हैं। इन कारणों से भी धीरे-धीरे व्यक्ति के स्पर्म की क्वालिटी पर असर पड़ता है।

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बढ़ती उम्र में बीमारियों का जोखिम

हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर), डायबिटीज, मोटापा जैसी समस्या आजकल युवाओं में भी आम हो गयी है। इनका प्रभाव व्यक्ति की सेक्सुअल लाइफ पर भी पड़ता है । डायबिटीज़, पी सी ओ डी (पॉलीसिस्टिक ओवरियन डिज़ीज़) के कारण महिलाओं मे बहुत सी बीमारियां आम हो गयी हैं । 60 से 70 प्रतिशत महिलाओं में ओवुलेशन की क्रिया ही नहीं होती । वज़न का बढ़ना और व्यायाम की कमी के कारण भी सही मात्रा में हार्मोन नहीं बन पाते। बचपन से ही लोगों में कंप्‍यूटर और लैपटाप पर बैठना आम है और यह कारण भी कहीं ना कहीं इन्फर्टिलिटी के जि़म्मेदार होते हैं।

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