कम पीरियड फ्लो से क्या गर्भधारण हो सकता है मुश्किल, एक्सपर्ट से जानिए फैक्ट्स

Period me kam bleeding hone ke nuksan: महिलाओं में खुलकर माहवारी ना होना प्रेगनेंसी से जुड़ी कई मुश्किलों का कारण बन सकता है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : October 15, 2024 6:40 PM IST

Low period flow and chances of conceiving: पीरियड्स महिलाओं में प्रजनन प्रक्रिया से भी जुड़े हुए होते हैं। इसीलिए, पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देने और उनका सही इलाज भी जरूरी होता है। जैसे कई महिलाओं को  पीरियड्स का फ्लो कम होता है तो किसी को अधिक। वहीं, कई बार किसी कारण से अचानक से पीरियड्स फ्लो में बदलाव (Changes in period flow) भी आने लगते हैं। बहुत कम मात्रा में फ्लो होना या माहवारी खुलकर ना आना भी एक समस्या मानी जाती है। यह समस्या अगर लम्बे समय तक बनी रहे तो इससे कई तरह की अन्य परेशानियां भी शुरू हो सकती हैं।

क्या कम पीरियड फ्लो से गर्भधारण में आ सकती हैं मुश्किलें (Reasons low bleeding during periods is concerning)

ओव्युलेशन पीरियड का अंदाजा लगाना हो सकता है मुश्किल

गर्भधारण करने से पहले महिलाओं को अपने ओव्युलेशन साइकल को समझना पड़ता है। यह मेंस्ट्रुएशन साइकिल का एक हिस्सा है जिसमें महिलाओं के अंडाशय से फीमेल एग रिलिज होते हैं और इसी एग के साथ जब मेल एग मिलते हैं तो गर्भधारण की संभावना बढ़जाती है। आमतौर पर ओव्युलेशन पीरियड माहवारी शुरू होने से 12-15 दिन बाद स्टार्ट होता है। लेकिन, अगर किसी महिला के पीरियड्स अनियमित है या उनका फ्लो कम हो तो ऐसे में ओव्युलेशन का समय भी समझ पाना मुश्किल हो जाता है और ऐसे में गर्भधारण में भी परेशानी (problem in conceiving) आ सकती है।

कंसीव करना हो सकता है मुश्किल (Low period flow can affect chances of conceiving)

ऐसी महिलाएं जिन्हें पीरियड्स के दौरान कम फ्लो या कम ब्लीडिंग (less bleeding during periods) होती है, उनके लिए गर्भधारण मुश्किल हो सकता है। क्योंकि, कम ब्लीडिंग के कारण ओव्युलेशन पीरियड्स को ट्रैक कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। वहीं, पीरियड्स में ब्लीडिंग कम होना या रूक-रूककर फ्लो होना या महीने में एक से अधिक बार पीरियड्स आना इस बात का संकेत हो सकते हैं कि आपके शरीर में ओव्युलेशन की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं होती। ऐसे में आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और सही टेस्ट कराने चाहिए।

हालांकि, डॉ. विद्या भट्ट (Dr. Vidya V Bhat, Medical Director of RadhaKrishna Multispecialty Hospital, Bengaluru) के अनुसार,"महिलाओं में गर्भधारण की क्षमता कम होने के पीछे लो पीरियड ब्लीडिंग इकलौता कारण नहीं हो सकता है। पर पीरियड्स में कम ब्लीडिंग किसी छुपी हुई बीमारी या सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम का संकेत जरूर हो सकती है। आमतौर पर पीरियड्स के दौरान लो ब्लीडिंग इन कारणों ये हो सकती है –

हार्मोन्स के स्तर में बदलाव (Hormonal changes)

तनाव (Stress)

मोटापा या अचानक से वजन बढ़ जाना (Obesity or overweight)

थायरॉइड (Hypothyroidism)

एनोवुलेटरी चक्र या एनोव्यूलेशन ( anovulatory cycles)  से जुड़ी समस्याएं आदि।

क्या है डॉक्टर की सलाह

डॉ. विद्या भट्ट कहती हैं कि, अगर महिलाओं को माहवारी के दौरान अगर ब्लीडिंग या मेंस्ट्रुएशअल फ्लो में बड़े बदलाव दिखायी देते हैं तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए। विशेषकर ऐसी महिलाएं जो गर्भधारण करने की कोशिश कर रही हैं उन्हें इस स्थिति को गम्भीरता से लेना चाहिए और कम ब्लीडिंग के कारणों का पता लगाने के लिए अपनी जांच करानी चाहिए।

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