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डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकते हैं और गर्भवती महिलाओं के लिए तो ये काफी खतरनाक हो सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान, महिलाओं को रोगप्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है, और अगर मां किसी भी वायरस से संक्रमित हो जाए तो भ्रूण की सेहत के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है।
डायरेक्टर ऑफ नेशनल वेक्टर बोर्न डिसीज कंट्रोल प्रोग्राम (Directorate of National Vector Borne Disease Control Programme) के मुताबिक, अब तक देश में डेंगू के कुल 28,702 मामले सामने आए हैं। जहां हम मलेरिया जैसी बड़ी बीमारी से लड़ने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, वहीं एनवीबीडीसीपी ने बताया कि लगभग 90 प्रतिशत भारतीय आबादी मलेरिया की अधिक संभावना वाली जगहों पर रहती है।
डॉ. आशा हिरेमथ, कंसल्टेंट आब्स्टिट्रिक्स एंड गायनकोलॉजी, मदरहुड हॉस्पिटल, बेंगलुरू बताते हैं कि गर्भवती महिलाओं को डेंगू और मलेरिया से खुद को बचाने के लिए पर्याप्त सावधानी क्यों बरतनी चाहिए:
डेंगू खतरनाक क्यों है?
गर्भावस्था में डेंगू के इंफेक्शन में मां और बच्चे दोनों के लिए रक्तस्राव का खतरा होता है। साथ ही, गर्भावस्था में मां को डेंगू होने पर समय से पहले बच्चे के जन्म और गर्भ में मौत जैसी समस्याओं का गंभीर खतरा हो जाता है। डिलिवरी के आसपास के समय में होनेवाले इंफेक्शन की स्थिति में, इंफेक्शन प्लेसेंटा, मां के दूध या जन्म के दौरान या उसके बाद सीधे संपर्क के कारण बच्चे को भी यह इंफेक्शन हो सकता है।
मलेरिया खतरनाक क्यों होता है?
डेंगू की तरह, गर्भावस्था के दौरान मलेरिया गर्भपात, जन्मजात इंफेक्शन जैसी समस्याओं की वजह बन सकता है। मलेरिया गर्भवती महिलाओं में एनीमिया का कारण बन सकता है और इससे शरीर में ऐंठन, लीवर का फेलियर या अन्य प्रमुख अंगों को नुकसान हो सकता है। डेंगू की तरह, इससे भी भ्रूण की मृत्यु और गर्भपात का भी खतरा उत्पन्न हो सकता है।
प्रेगनेंसी में डेंगू और मलेरिया से बचने के लिए क्या करना चाहिए
• जहां डेंगू, मलेरिया फैला हो, ऐसी जगहों की यात्रा न करें।
• अपने आसपास साफ-सफाई रखें। मच्छरों को घर में दाखिल होने से बचने के लिए सुबह और शाम के समय खिड़की बंद रखें।
• फुल पैंट, लंबी आस्तीन के कपड़े पहनें।
• जाली में सोएं, खासकर मच्छरों से बचानेवाली विशेष जाली या नेट खरीदें।
प्रेगनेंसी में डेंगू और मलेरिया का इलाज कैसे करना चाहिए
• पानी, ताज़ा जूस, नारियल का पानी जैसे तरल पदार्थों को ज़्यादा मात्रा में पीने से डिहाइड्रेशन को रोकने में मदद मिलेगी।
• बुखार के लिए एस्पिरिन जैसी दवाइयां लेने से बचें। इससे खून बहना शुरु हो सकता है और अन्य परेशानियां हो सकती हैं। और अगर ऐसा होता है, तो तुरंत अपने डॉक्टर को तुरंत रिपोर्ट करें
• बुखार और शरीर के दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर जिस एंटीपैरिकिक्स (Antipyretics) दवाइयों की सलाह देता है उसे समय पर लिया जाना चाहिए।
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अनुवादक: Sadhana Tiwari.
चित्रस्रोत:Shutterstock Images.