क्या एंडोमेट्रियोसिस में मां बनना है मुमकिन, एक्सपर्ट से जानें इस बीमारी में IVF की मदद से कंसीव करने के चांस

डॉक्टर से जानिए कि एंडोमेट्रियोसिस में गर्भधारण करने और बच्चे को जन्म दे पाने के चांस क्या और कितने हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 2, 2024 6:12 PM IST

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एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) एक गम्भीर स्थिति है जिससे दुनियाभर में करोड़ों महिलाएं पीड़ित है। यह तब होता है जब यूट्रस की लाइनिंग से मिलते-जुलते टिश्यूज का निर्माण यूट्रस के बाहर के हिस्से में होने लगता है। ये टिश्यूज आमतौर पर ओवरी (ovaries), फैलोपिन ट्यूब्स(fallopian tubes) और पेल्विक लाइनिंग में बनते हैं। इन टिश्यूज की वजह गांठ या सिस्ट बन जाती है और फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं (fertility issues) होने लगती है।

एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) होने के बाद महिलाओं के लिए गर्भधारण से जुड़ी समस्याएं आ सकती हैं। वहीं, कई मामलों में महिलाएं कंसीव करने में सफल रहती हैं। हालांकि, महिलाओं एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित अधिकांश महिलाएं हमेशा इसी चिंता में रहती हैं कि वे गर्भधारण कर पाएंगी या नहीं। डॉ. दीप्ति बावा (Dr. Deepthi Bawa, Senior Consultant -Gynecologist, IVF Specialist, Laparoscopic & Cosmetic Surgeon, SPARSH Hospital, Bangalore) बता रही हैं एंडोमेट्रियोसिस में आईवीएफ की मदद से गर्भधारण करने और बच्चे को जन्म दे पाने के चांस क्या और कितने हैं।

एंडोमेट्रियोसिस में गर्भधारण कितना आसान या मुश्किल

डॉ. दीप्ति के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस की गम्भीरता (Severity of  endometriosis) हर महिला में अलग हो सकती है। आमतौर पर एंडोमेट्रियोसिस को 4 कैटेगरीज में बांटा जाता है। यहां एंडोमेट्रियोसिस कितना गम्भीर है और सिस्ट कितना बड़ा है उस आधार पर तय होता है कि एंडोमेट्रियोसिस का इलाज किस तरह से किया जाता है। जैसे माइल्ड केसेस में सिस्ट छोटा होता है और इसी वजह से कई बार सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। इसीलिए, ऐसे मामलों में कपल्स को सलाह दी जाती है कि वे नेचुरली गर्भधारण करने की कोशिश करें।

वहीं, एंडोमेट्रियोसिस की वजह से गर्भधारणना कर पा रहे कपल्स के लिए यही कोशिश की जाती है कि वे गर्भधारण कर सकें और इसके साथ ही एंडोमेट्रियोसिस को दोबारा होने से रोका जा सके। प्रेगनेंसी के दौरान एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों (Symptoms of endometriosis) और दर्द से काफी आराम मिल जाता है। दरअसल, प्रेगनेंसी में शरीर में होनेवाले हार्मोनल बदलावों के कारण सिस्ट बनने की प्रक्रिया रूक जाती है।

क्या एंडोमेट्रियोसिस  में IVF की मदद से गर्भधारण है संभव

डॉक्टर बावा आगे कहती हैं कि जिन मामलों में नेचुरली कंसीव कर पाना संभव नहीं होता वहां लोगों को आईवीए (In-vitro fertilization) की सलाह दी जा सकती है।

डॉक्टर बावा आगे कहती हैं कि जिन मामलों में नेचुरली कंसीव करपाना संभव नहीं होता वहां लोगों को आईवीए (vitro fertilization) की सलाह दी जा सकती है। आईवीएफ में एग्ज को लैब में फर्टिलाइज किया जाता है और उसके बाद भ्रूण को महिला के गर्भ में स्थापित किया जाता है। जिन महिलाओं की ट्यूब में बहुत अधिक ब्लॉकेज होती है या जिनमें एंडोमेट्रियोसिस बहुत गम्भीर होता है उनके लिए आईवीएफ एक बहुत मददगार मेथड साबित हो सकता है।

एंडोमेट्रियोसिस का मैनेजमेंट

एक्सपर्ट के अनुसार  एंडोमेट्रियोसिस में इंफर्टिलिटी की समस्या से बचने के लिए  एंडोमेट्रियोसिस के मैनेजमेंट (management of endometriosis and infertility) पर विशेष ध्यान देने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में कई फैक्टर्स पर भी ध्यान दिया जाता है जैसे-

  • एंडोमेट्रियोसिस का स्टेज या इस बीमारी की गम्भीरता
  • मरीज की उम्र
  • प्रजनन से जुड़े गोल्स

जहां कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है वहीं, इसके प्रभाव को भी समझना जरूरी है। विशेषकर सर्जरी कराने के बाद ओवेरियन फंक्शन में क्या बदलाव आते हैं और भविष्य में फर्टिलिटी से जुड़े क्या प्रभाव दिखायी दे सकते हैं, इस बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें।  एंडोमेट्रियोसिस में फर्टिलिटी बढ़ाने के लिएसही समय पर डायग्नोसिस और इलाज की मदद से पॉजिटिव रिजल्ट्स मिल सकते हैं।

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