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35 वर्ष की उम्र के बाद 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है मां बनने (गर्भधारण) की संभावना: एक्‍सपर्ट

35 वर्ष की उम्र के बाद 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है मां बनने (गर्भधारण) की संभावना: एक्‍सपर्ट

नि:संतानता की समस्या के लिए केवल महिला या केवल पुरुष इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इस समस्या का प्रभाव महिला एवं पुरुष दोनों पर ही समान स्तर पर पड़ता है आमतौर पर 40% यह समस्या महिलाओं में होती है और 40% ही यह समस्या पुरुषों में पाई जाती है

वर्तमान समय में ना जाने ऐसे इतने कारण हैं जिससे महिलाओं को गर्भधारण करने में बहुत बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नि:संतानता के आंकड़ों की बात करें तो हर 7 में से 1 दंपत्ति इस नि:संतानता की समस्या से ग्रसित है लेकिन यह यह समस्या केवल महिलाओं में ही नहीं है बल्कि बांझपन के हर तीन में से एक मामला पुरुष का भी होता है।

नि:संतानता के बारे में कैसे पता करें?

इसका पता तो तभी लगाया जा सकता है जब शादी के बाद कोई दंपत्ति काफी प्रयासों के बाद भी संतान सुख प्राप्त नहीं कर पाता है तभी इसके लक्षण एवं कारणों की जानकारी मिलना संभव है अन्यथा ऊपरी तौर पर आप बांझपन का पता नहीं लगा सकते हैं।

नि:संतानता कई बीमारियों एवं अन्य कारणों के द्वारा भी उत्पन्न होती है। महिलाओं में होने वाली गर्भाशय फाई फाइब्राएड, एनीमिया, श्रोणि सूजन की बीमारी, थायराइड की बीमारी आदि कारणों से महिलाओं में संतान न उत्पन्न होने की समस्या देखी जाती है। इन कारणों के अलावा भी अन्य ऐसे कारण हैं जैसे कि शराब सिगरेट के सेवन एवं तनाव तथा अनियमित दर्द वाली माहवारी के कारण महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर अत्यधिक असर देखने को मिलता है, जिसके कारण महिलाओं में निसंतानता जैसी समस्या जन्म लेती है। यदि महिलाओं की उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक हो जाती है तब भी महिलाओं को निःसंतानता जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है।

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आज के इस दौर में एलोपैथ में अपनी पूरी कोशिश इस समस्या को दूर करने में की है परंतु मेडिकल साइंस भी इस समस्या को जड़ से खत्म करने में नाकाम रहा है ऐसे में प्राचीन आयुर्वेद के सिद्धांत एवं महर्षि यों द्वारा बनाई गई औषधियों के सेवन से इसने संतान ताकि समस्या को प्राकृतिक उपचार के माध्यम से दूर किया जा सकता है।

आयुर्वेद के जरिए कर सकते हैं नि:संतानता का उपचार

आयुर्वेद और हर्बल ट्रीटमेंट के द्वारा आज ना जाने कितने ही नि:संतान परिवारों के घरों में संतान रूपी दीपक जलाए हैं। लाख कोशिशों के बाद भी अगर गर्भधारण नहीं हो पा रहा है तो आप आयुर्वेद के पंचकर्मा सिद्धांतों के नियमित प्रयोग से हार्मोन का संतुलन बनाकर और अपनी प्रजनन क्षमता को बढ़ाकर संतान सुख का आनंद ले सकते हैं।

महिलाओं के गर्भधारण में उनकी उम्र की विशेष भूमिका होती है क्योंकि यदि आप 18 या 28 के बीच हैं और गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे हैं तो गर्भधारण की संभावना अधिक बढ़ जाती है क्योंकि इस उम्र में फर्टिलाइजेशन अत्यधिक मात्रा में होते हैं। उदाहरण के तौर में देखें कि यदि 25 वर्ष की महिला की तुलना में 35 वर्ष की महिला को गर्भधारण करने की कोशिश कर रही है तो उसकी संभावना 50% तक कम हो जाती है।

आज का समाज संतानहीनता का दोष ज्यादातर महिलाओं के सिर पर थोप देता है परंतु ऐसा बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि लगभग आधे मामलों में पूरी तरह से इसके लिए पुरुष साथी भी जिम्मेदार होते हैं क्योंकि यह आयुर्वेद विज्ञान ने पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है की संतानहीनता केवल महिला के दोषो के कारण ही नहीं होती है बल्कि उसके लिए पूरी तरह से पुरुष भी जिम्मेदार होता है।

नि:संतानता की समस्या के लिए केवल महिला या केवल पुरुष इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इस समस्या का प्रभाव महिला एवं पुरुष दोनों पर ही समान स्तर पर पड़ता है आमतौर पर 40% यह समस्या महिलाओं में होती है और 40% ही यह समस्या पुरुषों में पाई जाती है बाकी 20% की समस्या अन्य मामलों में होती है जिसमें महिला एवं पुरुष दोनों से संबंधित होती हैं।

अब मुख्य बात यह देखना है कि कारण चाहे कुछ भी हो और चाहे किसी को भी प्रभावित करता हो सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इसके लिए आप खुद को कसूरवार ना माने और दोषी महसूस ना करें।

आज प्राचीन आयुर्वेद में ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां एवं औषधियां उपलब्ध हैं जो आपको गर्भवती होने में पूरी मदद करती हैं। यह प्राचीन एवं हर्बल बूटियां आपकी प्रजनन अक्षमता को दूर करती हैं और गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए पूरी संभावना बनाती हैं इसलिए आप बिल्कुल भी निराश ना हो और ना ही अपने आत्मविश्वास में कोई कमी लाएं इसके लिए आयुर्वेदिक एक्‍सपर्ट की मदद ले सकते हैं।

नोट: यह लेख, आशा आयुर्वेदा सेंटर, दिल्‍ली की फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉक्टर चंचल शर्मा हुई बातचीत पर आधारित है।

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