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प्रेग्नेंसी के दौरान पैरों में सूजन क्यों होती है? डॉक्टर से जानें इससे राहत पाने के उपाय

Swollen Feet During Pregnancy: प्रेग्नेंसी के दौरान कई महिलाएं पैरों में सूजन की समस्या से परेशान रहती हैं। आइए, जानते हैं प्रेग्नेंसी में क्यों आती है पैरों में सूजन और इससे राहत पाने के घरेलू उपाय -

प्रेग्नेंसी के दौरान पैरों में सूजन क्यों होती है? डॉक्टर से जानें इससे राहत पाने के उपाय
Though fortunately rare. Increase the mother’s risk of postpartum haemorrhage.
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Written by priya mishra |Updated : April 19, 2024 1:24 PM IST

Swollen Feet During Pregnancy: किसी भी महिला के जीवन में मां बनना एक बेहद अहम पल होता है। इस खूबसूरत अहसास को पाने के लिए महिलाओं को काफी मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता है। गर्भावस्था के 9 माह महिलाओं के लिए तरह-तरह की चुनौतियां लेकर आते हैं। इस दौरान उन्हें कई तरह के शारीरिक और मानसिक  बदलावों के गुजरना पड़ता है। वहीं, इस समय शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं एक साथ सामने आती हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं अक्सर उल्टी, सिर में दर्द, स्किन प्रॉब्लम जैसी समस्याओं से परेशान रहती हैं। इसके अलावा, शरीर का वजन बढ़ना भी प्रेग्नेंसी के दौरान काफी आम समस्या में से एक है। इसके अलावा, प्रेग्नेंसी में पैरों में सूजन होना (Swollen Feet During Pregnancy) भी एक कॉमन प्रॉब्लम है, जो अक्सर कई गर्भवती महिलाओं में देखने को मिलती है। गर्भावस्था के दौरान पैरों में सूजन होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इस बारे में जानकारी पाने के लिए हमने स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ प्रोमिला जोशी से बात की। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के पैरों में सूजन की समस्या के कारण और इससे राहत पाने के घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं। तो आइए, जानते हैं इसके बारे में -

प्रेग्नेंसी में क्यों आती है पैरों में सूजन? – Causes Of Swollen Feet During Pregnancy

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो गर्भावस्था में पैरों में सूजन आना काफी आम समस्या है, जिसके पीछे मुख्य कारण इस दौरान शरीर में अतिरिक्त तरल और रक्त का जमा होना है। यह अतिरिक्त रक्त और तरल पदार्थ महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की जरूरतों की पूर्ति के लिए होता है। इसके कारण न केवल प्रेग्नेंसी के दौरान पैरों, बल्कि हाथों और शरीर के अन्य अंगों पर भी सूजन दिखाई देती है। इसके अलावा, ज्यादा देर तक एक ही पोजीशन में बैठे रहने, बहुत ज्यादा कैफीन का सेवन करने, नमक का ज्यादा सेवन या बहुत ज्यादा तक जाने के कारण भी पैरों में सूजन आ सकती है। कभी-कभी पैरों की सूजन काफी ज्यादा बढ़  जाती है, जिसके कारण चलने-फिरने तक में समस्या होने लगती है। वहीं, कुछ देर तक पैर लटकाकर बैठने से भी पैरों में दर्द भी होने लगता है। हालांकि, यह एक अस्थायी समस्या होती है, जो डिलीवरी के कुछ दिनों बाद खुद ब खुद समाप्त हो जाती है। यदि आपको डिलीवरी के बाद भी यह समस्या परेशान कर रही है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

प्रेग्नेंसी में पैरों की सूजन से राहत पाने के घरेलू उपाय – Home Remedies For Swollen Feet During Pregnancy

पैरों के नीचे तकिया लगाकर सोएं

प्रेग्नेंसी के दौरान आपको अपने पैरों की तरफ तकिया लगाकर सोना चाहिए। ऐसा करने से आपको पैरों की सूजन में काफी आराम मिल सकता है। रोजाना 20-30 मिनट इस तरह सोने से आपको सूजन से काफी राहत मिल सकती है।

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डाइट में पोटैशियम शामिल करें

प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में पोटैशियम की मात्रा कम हो जाए, तो आपके पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, पोटैशियम की कमी के कारण आपको ब्लड प्रेशर और वॉटर रिटेंशन की समस्या भी हो सकती है। इससे बचने के लिए आपको पोटैशियम रिच फूड्स जैसे आलू, केला, अनार, पिस्ता आदि को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

भरपूर पानी पिएं

शरीर में किसी भी तरह की सूजन से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपने आप को लगातार हाइड्रेट बनाए रखें। वहीं गर्भावस्था के दौरान आपको कम से कम 3-4 लीटर पानी प्रतिदिन पीना चाहिए। भरपूर पानी पीने से भी आपके पैरों में आने वाली सूजन की समस्या से छुटकारा मिल सकता है।

मालिश करें

प्रेग्नेंसी के दौरान पैरों में सूजन की समस्या से राहत पाने के लिए मालिश करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। मालिश के लिए आप सरसों का तेल, नारियल तेल या जैतून के तेल का इस्तेमाल कर सकती हैं। दिन में 2 से 3 बार मालिश करने से आपको जल्द राहत मिल सकती है।

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Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।