Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
हम सभी जानते हैं कि मां और बच्चा, दोनों के लिए स्तनपान कितना अहम होता है। ब्रेस्ट मिल्क नवजात शिशु के पोषण के लिए बेहतरीन स्रोत के रूप में काम करता है और मां के लिए भी यह उतना ही फायदेमंद होता है। हालांकि, मां बनने का यह सफर हर महिला के लिए एक जैसा नहीं होता। बच्चे को दूध पिलाने की बात आती है तो कई महिलाएं परेशान होती हैं और डर जाती हैं। नवजात बच्चे की मां आमतौर पर उनके बच्चों को स्तनपान कराने के तरीके नहीं समझ पाती और शायद ही उन्हें पता होता है कि ब्रेस्टफीडिंग कराते समय क्या-क्या हो सकता है। ऐसी कई बातें हैं जो मां को लैचिंग (latching) शुरू करने से पहले परेशान कर सकती है, जैसे- पर्याप्त दूध न बनना, स्तनपान के दौरान दर्द होना। हालांकि, एक डर जो महिलाओं को अपने बच्चों को दूध पिलाने से दूर रखता है, वह यह है कि बच्चे को दूध पिलाने से ब्रेस्ट का आकार बदल जाता है। इसी विषय पर हमने बात की नियोनोटॉलजिस्ट और कंसल्टेंट पीडियाट्रिक्स डॉ. अस्मिता महाजन (एस.एल. रहेजा अस्पताल) से जिन्होंने नई माताओं की इस सवालों के जवाब दिए।
क्या ब्रेस्टफीडिंग से ब्रेस्ट का आकार बदल जाता है?
प्रेगनेंसी और ब्रेस्टफीडिंग से महिलाओं के स्तनों का लुक बदल जाता है। महिलाओं को अक्सर यह डर लगता है कि उनके स्तनों का आकार स्तनपान कराने से ख़राब या बेडौल हो जाएंगें। कई बार ऐसा होता है कि लोग नयी मांओं को यह सलाह भी देते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग से उनकी सेक्स लाइफ भी प्रभावित होगी और इसीलिए उन्हें स्तनपान कराने से बचना चाहिए। लेकिन सच यह है कि भले ही एक महिला स्तनपान कराए या नहीं, उसके ब्रेस्ट्स का आकार बदलने ही वाला है। गर्भावस्था के दौरान ब्रेस्ट्स का आकार बढ़ जाता है, स्नायुबंधन फैल जाते हैं और वे स्तनों को सपोर्ट करते हैं, जिसकी वजह से आपके ब्रेस्ट स्तनपान कराए बिना भी ढीले हो जाते हैं। इसीलिए ब्रेस्ट के ढीले होने के डर को भूलकर अपने बच्चे को दूध पिलाना शुरु कर दें।
इस समस्या से राहत पाने के लिए, हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतें अपनाएं, पौष्टिक भोजन खाएं, हेल्दी वेट मेंटेन करें और योगासन करें। इसके अलावा, अपने ब्रेस्ट्स को गोल-गोल करते हुए मॉइश्चराइज़ से मालिश करें। इससे आपकी त्वचा को कोमल रखने में मदद होगी और उसकी लचक बनी रहेगी।
याद रखें, बच्चे को दूध पिलाने का समय तनावपूर्ण और थकानभरा हो सकता है। हालांकि, इससे बच्चे का उचित विकास होता है और इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। धीरे-धीरे आप को ब्रेस्टफीडिंग कराने का सही तरीका पता चल जाए या इसकी आदत हो जाने पर, यह निश्चित रूप से मां-बच्चे के बंधन को मज़बूत बनाएगा और हमेशा याद रहनेवाला एक सुंदर-सा अनुभव साबित होता है।
Read this in English.
अनुवादक-Sadhana Tiwari
चित्रस्रोत-Shutterstock Images.