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Written By: Pallavi Kumari | Published : August 4, 2022 3:00 PM IST
मां का दूध बच्चे के लिए कई पोषक तत्वों का खान होता है। ये उन्हें जन्म से लेकर बड़े होने तक कई बीमारियों से बचाव में मदद करता है। ऐसे में आपको यह जान कर हैरानी हो सकती है, स्तनपान को लेकर हमारे आस-पास कई सारी भ्रामक बातें फैली हुई हैं। जी हां, जैसे आपने सुना होगा कि अगर मां बच्चे को दूध पिलाने के दौरान ज्यादा तेल मसाला खाए तो ये ये दूध के स्वाद को खराब कर देता है। लेकिन, ऐसी तमाम बातें असल में भ्रामक हैं और लोगों को इन बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। इतना ही नहीं, ब्रेस्टफीडिंग में खान-पान से जुड़ी ऐसी कई भ्रामक बातें हैं, जिनके बारे में और उनके तथ्यों से हमें Ms Mansi Shah, Lactation Consultant, Jaslok Hospital and Research Centre ने अवगत करवाया। आइए जानते हैं।
तथ्य: ब्रेस्टमिल्क खून की सहायता से स्तनों में बनता है। जो हम खाना खाते हैं, पाचन तंत्र में पच जाता है और सभी पोषक तत्व रक्त के माध्यम से स्तन में लैक्टोसाइट्स दूध बनाने वाली कोशिका में अवशोषित और ले जाया जाता है। खून की संरचना भोजन से सीधे प्रभावित नहीं होती है। स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए संतुलित आहार लेना बहुत जरूरी है क्योंकि कुछ सूक्ष्म पोषक तत्वों का स्तर से ये प्रभावित होता है। लेकिन ठंडी चीजें जैसे कि दही खाने से मां से बच्चे को ठंड नहीं लगती। हालांकि, अगर मां बच्चे के निकट संपर्क में आने वाला कोई अन्य व्यक्ति खांसी और सर्दी से पीड़ित है तो बच्चे को वैसे भी संक्रमण हो सकता है। बीमारी के समय स्तनपान जारी रखना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चे को मां के शरीर में मां के दूध के माध्यम से एंटीबॉडी मिलेगा।
तथ्यः मां के दूध का उत्पादन मांग और आपूर्ति के सिद्धांत पर आधारित है। जितनी अधिक मांग, उतना अधिक उत्पादन। अगर माताएं बच्चे की मांग के अनुसार बार-बार स्तनपान कराती हैं, तो उसके पास बच्चे के विकास और वृद्धि के लिए पर्याप्त स्तन दूध होगा। ध्यान दें कि स्तन से दूध निकालने की मात्रा से स्तन के दूध का उत्पादन शुरू हो जाता है।
तथ्य: घी के सेवन से गर्भाशय तुरंत ठीक नहीं होता है। इसमें शामिल करने के लिए लेकिन मॉडरेशन में घी के बहुत सारे पोषण संबंधी लाभ हैं। इसके अधिक सेवन से मां का वजन बढ़ जाएगा जिससे मोटापा और इसकी जटिलता बढ़ जाएगी। स्तनपान कराने वाली मां को वजन बढ़ाने की जरूरत नहीं होती है।
तथ्य: दालें और फलियां कम शारीरिक गतिविधि के कारण मां को गैसी महसूस करा सकती हैं क्योंकि उसे नवजात शिशु को दूध पिलाने और पालने की जरूरत होती है। मां की आंत से निकलने वाली गैस न तो खून में जाती है और न ही स्तन के दूध के माध्यम से बच्चे तक पहुंचती है। नवजात शिशु में उबकाई और गैस बनना कमजोर आंतों के कारण हो सकता है।
तथ्य: स्तनपान के दौरान प्यास लगना दूध के कम होने का संकेत है। यह संकेत दे रहा है कि स्तन का दूध उसके स्तन से उसके बच्चे में स्थानांतरित हो रहा है। प्यास लगने पर वह पानी जरूर पी सकती है।
तो, इस तरह के भ्रामक बातों पर बिलकुल भी भरोसा ना करें, एक्सपर्ट की सुनें और अपनी डाइट को हेल्दी रखें। इससे आपका बच्चा भी हेल्दी रहेंगा और आप भी।