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अनीता शर्मा ने लगभग एक दशक पहले सी सेक्शन डिलीवरी की मदद से एक बच्चे को जन्म दिया था और वो सर्जरी उनके लिए इतनी कष्टदायक थी कि वो आज भी उसे याद करके डर जाती हैं। वे ऑपरेशन के बाद इतनी थक गयी थी कि वे ठीक से हिल डुल भी नहीं पा रही थी। जिस हॉस्पिटल में उनका ऑपरेशन हुआ था वहां लैकसेशन एक्सपर्ट नहीं थे जिस वजह से डिलीवरी के कुछ देर बाद ब्रेस्टफीडिंग में उन्हें दिक्कतें हुई और बच्चे को बोतल से दूध पिलाना पड़ा।
इन सबसे उबरने में भी अनीता को काफी वक़्त लगा और ये दौर काफी मुश्किल भरा रहा। इस दौरान पोस्ट सर्जरी इश्यू हुए और अनियंत्रित ब्लीडिंग होने लगा। इसके अलावा उनके युटेरस में सिकुड़न होने लगी। खून की कमी होने के कारण उन्हें ब्लड दिया गया जिससे एनीमिया से बची रहें। इन्हीं सब वजहों से ब्रेस्टफीडिंग पर बुरा असर पड़ा और शुरुवाती दिनों में वे अपने बेबी को स्तनपान नहीं करवा पायी।
घर वापस आने पर जब उन्होंने ब्रेस्टफीडिंग कराने का प्रयास किया तो हर बार वे असफल रही। उन्हें यह पता था कि बच्चे को माँ का दूध ना मिलने से उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और वो कई तरह के इन्फेक्शन कि चपेट में आ सकता है। मिस जोएस जयासीलन ने बताया कि ‘ब्रेस्टफीडिंग को बढ़ावा देने के लिए हर माँ को इसके फायदों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिये और साथ में यह भी पता होना चाहिये कि उनका दूध ना मिल पाने से बच्चे और उनपर क्या बुरा असर पड़ेगा। हर साल लगभग एक मिलियन नवजात शिशु सिर्फ माँ का दूध ना पाने के कारण मर जाते हैं।
माँ का दूध क्यों ज़रूरी है : डॉ. जोएस बताती हैं कि जिन बच्चों को शुरुवाती दिनों में माँ का दूध नहीं मिलता है उनमें टाइप-1, टाइप -2 डायबिटीज, ल्यूकेमिया और मोटापा होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीँ जो महिलायें शुरुवाती दिनों में ब्रेस्टफीडिंग नहीं करवा पाती हैं उनमें प्रीमेनोपॉजल ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज और मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए मां का दूध बच्चे और मां दोनों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है।
जब अनीता दूसरी बार गर्भवती हुई तो इस बार वे इन सब मुश्किलों के लिए पहले से ही तैयार थी और उन्हने हॉस्पिटल स्टाफ को भी यह बता रखा था कि डिलीवरी के बाद ही बच्चे को स्तनपान ज़रूर करवाएं। ऐसा करने से वे बहुत जल्दी इन सब मुश्किलों से उबर गयी और इस बार न उनका वजन बढ़ा ना ही उन्हें ब्लीडिंग की समस्या हुई। जब वे अब अपने दोनों बच्चों की तुलना करती हैं तो उन्हें यह महसूस हुआ कि दूसरा बच्चा पहले वाले कि तुलना में बहुत कम बीमार रहता है।
मां का दूध अमृत जैसा है : कई बार ऑपरेशन के कारण डिलीवरी के तुरंत बाद शिशु को मां का दूध नहीं मिल पाता है जबकि हम सब यह जानते हैं कि डिलीवरी के बाद निकलने वाला गाढ़ा दूध नवजात शिशु के लिए अमृत जैसा है। मिल्क सप्लीमेंट कभी भी ब्रेस्ट मिल्क जितना पौष्टिक नहीं हो सकता है। इसलिए कभी भी सिर्फ फार्मूला बेस्ड मिल्क पर निर्भर ना रहें। इनसे बच्चा जल्दी ही बीमारियों की चपेट में आने लगता है। फार्मूला मिल्क में साल्ट की मात्रा ज्यादा होती है और अपेक्षाकृत कैल्शियम काफी कम होता है और इसे पीने वाले बच्चों का आईक्यू लेवल भी कम रहता है। इसलिए अपने डॉक्टर से बात करें और जन्म के बाद उसे अपना दूध ही पिलायें।
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अनुवादक: Anoop Singh
चित्र स्रोत: Shutterstock