
... Read More
Written By: Pallavi Kumari | Updated : August 3, 2022 12:52 PM IST
बच्चे को दूध पिलाना या स्तनपान(Is breastfeeding a taboo in India) करवाना कोई शर्म की बात है? अगर नहीं तो, फिर क्यों अधिकांश महिलाएं अपने बच्चे को आंचल और दुप्पटे में छिपा-छिपा कर दूध पिलाती हैं? जब साइंस भी मानता है कि मां का दूध बच्चे के लिए कितना जरूरी है, ये उसे कई बीमारियों से बचाता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है तो, मां क्यों इसे खुलेआम करने से डरती है। ऐसी सोच, सवालों, डर और हिचक को चुनौती देती हैं बॉलीवुड एक्ट्रेस नेहा धूपिया (Bollywood's actress Neha Dhupia), अमृता राव (Amrita Rao), मॉडल लिसा हेडन (Lisa Haydon), ऑस्ट्रेलियाई संसद, सीनेटर लारिसा वाटर (Australian parliament, Senator Larissa Waters) और स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय सांसद एमईपी लीसिया रोंजुली (Licia Ronzulli) जैसी पावरफुल महिलाएं।
जी हां, भारत जैसे पुरुष प्रधान देश में जहां आज भी महिलाएं कुछ सवालों और सामाजिक कुरीतियों से लड़ रही हैं, उन महिलाओं के लिए बच्चे को खुलेआम स्तनपान करवाना (open breastfeeding) भी आम नहीं है। ऐसी महिलाओं को आखिरकार किन चीजों का डर है, ये किससे डर रही हैं और वे ब्रेस्टफीडिंग को आम बनाने के लिए क्या कर सकती हैं, इन तमाम सवालों के जवाब से आज हम आपको अवगत करवाते हैं।
ये सवाल सुनने में जितना आसान लग रहा है इसका जवाब उतना ही तीखा है। ये कड़वाहट समाज और परिवार से ही जुड़ी हुई नहीं है बल्कि, महिलाओं की अपनी सोच से भी जुड़ी हुई है। जैसे कि
भले ही आपको पढ़ने में अजीब लग रहा हो, पर भारतीय समाज की महिलाओं की सोच अपने ब्रेस्ट को लेकर यही है। उन्हें शुरू से लगता है कि ब्रेस्ट यानी कि एक छिपाने की चीज, जो कि गलती से भी किसी को ना दिख जाए। उसके अलावा कुछ महिलाएं अपनेब्रेस्ट की शेप और साइज को लेकर भी कंफर्टेबल नहीं होती।
लोग क्यो सोचेंगे? ये सवाल कई बड़ी समस्याएं पैदा करता है, जो कभी सुलझ नहीं पातीं। ऐसे में जरूरी है कि आप इस सवाल को खुद से पूछना और कहना बंद कर दें। आपका ब्रेस्ट है और आप अपने बच्चे को दूध पिला रही हैं तो, यहां समाज आपके ब्रेस्ट को देख कर क्या सोचेगा, इसकी आपको चिंता नहीं करनी चाहिए।
View this post on Instagram
यह सच है। आपको यह जान कर हैरानी हो सकती है कि भारतीय गांवों में तो यह भी कहा जाता है कि अगर आप खुले में बच्चे को दूध पिलाएंगी तो दूध सूख जाएगा, लोगों की नजर लग जाएगी। ये तमाम बातें भ्रामक हैं। ब्रेस्टमिल्क का प्रोडक्शन कभी भी किसी की नजर पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ये बायोलोजिकल प्रोसेस है, जो कि मां की सेहत, खान-पान और बच्चे के दूध पीने के सही तरीके से जुड़ा होता है।
भारत में अब भी एक पुरुष प्रधान समाज की सोच जिंदा है और महिलाओं की सोच और हिम्मत इससे उभर नहीं पा रही। ऐसे में महिलाओं को जहां, ब्रेस्टफीडिंग को लेकर सोच बदलने की जरुरत है वहीं, पुरुषों को एक मानवीय भावना के साथ उन्हें इस काम में प्रोत्साहित करना चाहिए। पुरुषों को सोचना चाहिए कि ये एक नेचुरल प्रोसेस है जिसका वो भी हिस्सा रहे हैं, उनकी मां ने भी उन्हें दूध पीला कर बड़ा किया है, इसलिए अपनी समाज की महिलाओं को भी ये आराम से करने दें।
हमारे हवाई अड्डों और मॉल में शायद ही फीडिंग रूम हों। इसलिए महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर स्तनपान कराने में परेशानी होती है। इसलिए, बहुत सी महिलाएं इस दौरान नौकरी छोड़ देती हैं, घर पर ज्यादा रहती हैं और बाहर आना-जाना कम करती हैं।
महिलाओं के लिए ब्रेस्टफीडिंग को छिपा कर करने या संकोच के साथ करने की शुरुआत सबसे पहले घर से होती है। जी हां, भारत में ज्यादातर परिवार ज्वाइंट फैमिली है। ऐसे में महिलाएं परिवार के लोगों के सामने बच्चे को दूध पिलाने से डरती हैं। इस स्थिति में परिवार को मां को कंफर्टेबल करने की जरुरत है। ऐसे में उन्हें प्रोत्साहित करें कि वे सबसे सामने दूध पिलाना चाहें तो पिला सकती हैं। ऐसा करने के दौरान महिला को ज्यादा देखे नहीं, अपना काम करते रहें। इससे उन्हें लगेगा कि उन्हें कोई नहीं देख रहा है और ये नॉर्मल है और इस तरह उन्हें इसकी आदत होने लगेगी।
भारतीय ऑफिस में बच्चे को साथ रखने के लिए सुविधाओं की कमी है। ऐसे में ब्रेस्टफीडिंग थोड़ी दूर की बात है। लेकिन जहां ये सुविधाएं हैं वहां, ब्रेस्टफीडिंग को सबके सामने आम बनाएं। पहले तो ऑफिस में फीडिंग रूम बनाएं और फिर मां जब बच्चे को दूध पिला रही हो तो उसे ऐसे ट्रीट करें जैसे वो नॉर्मल काम कर रही हो और आम भी अपना काम करते रहें।
सफर में ब्रेस्टफीडिंग को लेकर अक्सर महिलाएं कंफर्टेबल नहीं होंती। इसके लिए पहले तो महिलाएं थोड़े कंफर्टेबल कपड़े पहनें जिसमें वे बच्चे को दूध पिला पाएं। दूसरा हमेशा अपने लिए सीट बुक करके और कंफर्म रिजर्वेशन करके ही सफर पर जाएं। बच्चे को दूध पिलाने के लिए पहले आराम से बैठ जाएं और लोगों पर ज्यादा ध्यान ना दें।
भीड़ और लोगों से भरी जगहों पर कई बार महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग (Public Breastfeeding Taboo) नहीं करवाना चाहतीं। ऐसे में सरकार और संस्था को पहले तो अपने यहां फीडिंग रूम बनवाना चाहिए। दूसरा आप लोगों पर ज्यादा ध्यान ना देते हुए बच्चे को दूध पिलाएं। मॉल में एक अच्छी और थोड़ी शांत जगह ढूंढ कर आराम से बच्चे को दूध पिलाएं। अगर आपको लोग देख भी रहे हों तो, पहले उन्हें नजरअंदाज करें। फिर ऐसे देखने से मुंह पर मान कर दें। दो से तीन बार ऐसा करने से लोग आपको या किसी भी महिला को इस दौरान देखना बंद कर देंगे।
View this post on Instagram
ये महिलाओं का सबेस डर है। क्योंकि महिलाएं, दूसरी महिलाओं के सामने तो आराम से बच्चे को दूध पिला लेती हैं पर पुरुषों के सामने हिचकती हैं। ऐसे में आपको अपनी खुद की सोच बदलनी होगी। पहले तो ये सोचना बंद कर दें कि पुरुष जो आपके सामने हैं वो आपके बारे में क्या सोच रहे होंगे। दूसरा अपनी ब्रेस्ट को लेकर असहज ना हो और आराम से अपना काम करें। अगर कोई पुरुष आपकी ब्रेस्ट देख भी रहा हो और आपको असहज कर रहा हो तो उन्हें कड़े शब्दों में मना करें। धीमे-धीमे ये नॉर्मल होता जाएगा।
दुनिया चाहे जो करे, सुविधाएं चाहे हों या ना हों। जरूरी ये है कि आप क्या सोचती हैं। आप अपने बच्चे को दूध पिलाने को लेकर और अपनी ब्रेस्ट को लेकर कितनी कॉन्फिडेंट हैं। तो, पहले खुद पर विश्वास करें, अपनी सोच बदलें, ब्रेस्टफीडिंग को शर्म ना मानें और अपने आप को मोटिवेट करें। तो, ये शरीर आपका है, ब्रेस्ट आपका है, बच्चा आपका है तो, आप तय करेंगी कि आपको ब्रेस्टफीडिंग कैसे, कब और किसके सामने करवाना है।