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डिलीवरी से पहले क्यों फट जाती है पानी की थैली? जानें, ऐसी स्थिति होने पर क्या करते हैं डॉक्टर्स

प्रेग्नेंसी के 37 सप्ताह की निर्धारित अवधि पूरी होने पर एमनियोटिक थैली या तो फट जाती है या फिर इसमें रिसाव शुरू हो जाता है। यह संकेत प्रसव प्रक्रिया शुरू होने का होता है, लेकिन कुछ परिस्थिति के कारण गर्भवती महिलाओं की थैली समय से पहले फट जाती है या फिर रिसाव शुरू (Break Prematurely) हो जाता है।

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Written By: Kishori Mishra | Updated : June 25, 2020 8:02 AM IST

Break Prematurely : प्रेग्नेंसी के दौरान जिस तरह पदार्थ की थैली में शिशु रहता है, उसे एमनियोट‍िक थैली कहा जाता है। इसे कई लोग पानी की थैली भी कहते हैं। सामान्‍य तौर पर 37 सप्‍ताह की न‍िर्धार‍ित अवधि पूरी होने पर एमनियोटिक थैली या तो फट जाती है या फिर इसमें रिसाव शुरू हो जाता है। यह संकेत प्रसव प्रक्रिया शुरू होने का होता है, लेकिन कुछ परिस्थिति के कारण गर्भवती महिलाओं की थैली समय से पहले फट जाती है या फिर रिसाव शुरू (Break Prematurely) हो जाता है। चलिए जानते हैं समय से पहले क्यों गर्भवती महिलाओं की पानी की थैली फट जाती है?

एमनियोटिक थैली फटने का संकेत (Symptoms of Break Prematurely)

  • योनि में गीलापन महसूस होना।
  • लगातार कम या अधिक मात्रा में फ्लूइड निकलना।
  • रुक-रुक कर या तेज धार से कम या ज्‍यादा मात्रा में फ्लूइड निकलना।
  • साफ या हल्‍के पीले रंग का फ्लूइड आना।
  • बदबू रहित फ्लूइड आना।

यदि आपको इस तरह के लक्षण दिखते हैं, तो समझ जाइए कि आपकी पानी की थैली फट गई है। ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर्स से संपर्ककरें।

पानी की थैली फटने पर क्या करते हैं डॉक्टर्स?

वॉटर ब्रेक (Break Prematurely) होने पर डॉक्टर्स इन बातों का पता लगाने की कोशिश करते हैं-

  • शिशु की स्थिति  बच्‍चे का सिर नीचे है या उल्‍टा)
  • गर्भवती महिला की स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति (कहीं कोई संक्रमण के लक्षण तो नहीं)
  • शिशु के स्वास्थ की स्थिति

अगर इस तरह का कोई खतरा होता है, तो फिर डॉक्टर्स प्रसव पीड़ा लाने की कोशिश करते हैं। वहीं, अगर कोई जोखिम वाले कारण नहीं होते हैं, तो डॉक्टर्स लेबर पेन का इंतजार करते हैं। बहुत सी ऐसी महिलाएं होती हैं, जिनका लेबर पेन शुरू होने से 24 घंटे पहले पानी की थैली फट जाती है।

समय से पहले क्यों फट जाती है पानी की थैली?

  • संकुचन की वजह से प्राकृतिक तौर पर पानी की थैली का कमजोर होना।
  • गर्भाशय में संक्रमण गोनोरिया, क्‍लाइमैडिया और अन्‍य यौन संचारित संक्रमण के कारण।
  • पहले कभी प्रीटर्म लेबर होने की वजह से
  • धूम्रपान करना।
  • प्रेग्‍नेंसी के दौरान सही से देखभाल ना करना।

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