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लोगों की लगातार बदल रही जिंदगी और सामाजिक माहौल के बीच अब कपल्स बच्चे की प्लानिंग देरी से करते हैं। बढ़ती महंगाई को देखते हुए भी हर कपल शादी के बाद पहले आर्थिक रूप से सशक्त होना चाहता है और उसके बाद फैमिली को आगे बढ़ाने के बारे में सोचता है। लेकिन कई बार इन सबमें काफी समय लग जाता है और इसी वजह से कंसीव करने में देरी हो जाती है। लेकिन, कई बार जब प्रेगनेंसी की कोशिश की जाती है तब निराशा हाथ लगती है। उम्र बढ़ जाने के कारण एग की क्वालिटी में गिरावट आने लगती है और कपल्स के लिए मां-बाप बनने का सपना मुश्किल लगने लगता है।
आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा के अनुसार जब कपल्स देर से शादी करते हैं तो वैसे भी प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है क्यूंकि 35 की उम्र के बाद महिलाओं का ओवेरियन रिजर्व घटने लगता है और बच्चे न होने के कारण पार्टनर्स के आपसी संबंध भी प्रभावित होते हैं। लेकिन ऐसे में आईवीएफ ही एक मात्र उपाय नहीं है बल्कि आयुर्वेदिक उपचार से आप नैचुरली भी कन्सीव कर सकते हैं।
आजकल लोगों की जीवनशैली इतनी अवयवस्थित हो गई है कि उनको कई तरह की हार्मोनल समस्याएं होने लगती हैं जिससे प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। करीब 20 प्रतिशत महिलाएं पीसीओएस के कारण अधिक वजन से परेशान हैं। उम्र बढ़ने के साथ उन्हें डायबिटीज, तनाव, हाई ब्लड प्रेशर लेवल की वजह से भी प्रेगनेंसी में दिक्कत होने लगती है। ऐसे स्थिति में अगर महिलाएं गर्भधारण कर भी लें तो गर्भपात की संभावना बनी रहती है। कपल्स के आपसी संबंध ख़राब होने के कारण भी कई बार प्रेगनेंसी प्लानिंग में देर हो जाती है।
आमतौर पर किसी भी महिला की गर्भधारण की सही उम्र 35 साल होती है इसके बाद उनकी एग क्वालिटी ख़राब होने लगती है और ओवेरियन रिजर्व कम होने लगता है। 40 की उम्र तक पहुंचने तक महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं इसलिए उनका प्राकृतिक रूप से मां बन पाना और भी मुश्किल हो जाता है। अक्सर कपल्स करियर और आर्थिक आत्मनिर्भरता के कारण शादी देर से करते हैं ऐसे में प्रेगनेंसी की प्लानिंग करते करते काफी समय भी निकल जाता है और इंफर्टिलिटी जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। इससे बचाव के लिए महिलाएं अपने एग फ्रीज़ करवा सकती हैं।
अगर पति पत्नी में आपसी समझदारी नहीं है या उन्होंने इस मामले को अच्छे से डिस्कस नहीं किया है तो प्रेगनेंसी में देरी होने पर दोनों झल्लाहट में रिश्ता ख़राब कर सकते हैं। जबकि यह समय आरोप मढ़ने का नहीं बल्कि साथ निभाने का होता है। ऐसे में दोनों को एक दूसरे को संभालना चाहिए। आप देर होने पर किसी अच्छे गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क कर सकते हैं वह आपको उचित सलाह देंगी जिससे आगे की जर्नी आसान बन पाएंगी।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ उनके प्रजनन अंडों या एग्ज की क्वालिटी में गिरावट आ सकती है। एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया में इन एग्ज को सुरक्षित रखने की कोशिश की जाती है। ताकि महिलाएं देर से प्रेगनेंट होने के लिए इन एग्ज की मदद ले सकें।
35-40 वर्ष की उम्र के बाद प्रेगनेंसी प्लान करना लेट प्रेगनेंसी कहा जाता है।
35-40 वर्ष की उम्र के बाद प्रेगनेंसी प्लान करने से गर्भधारण में कई प्रकार की दिक्कतें आ सकती हैं। जैसे कंसीव करने में समय लग सकता है और प्री-मैच्योर डिलीवर का खतरा बढ़ सकता है।