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प्रेगनेंसी में करें प्रीनेटल योग, कई परेशानियों से मिलेगा छुटकारा

प्रत्येक दिन आप प्रीनेटल योग करें। इससे आपका शरीर क्रियाशील बना रहेगा और गर्भावस्था में आमतौर पर होने वाली समस्याओं जैसे कब्ज, उल्टी आदि से भी आप बची रहेंगी।

प्रेगनेंसी के दौरान योगाभ्यास करना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे प्रेगनेंसी में होने वाली तकलीफों और परेशानियों को कम किया जा सकता है। नियमित रूप से योग करने से सर्जरी के चांसेज भी कम होते हैं और आप नॉर्मल डिलीवरी के जरिए बच्चे को जन्म दे सकती हैं। योग प्रसव के दौरान मन व शरीर को भी केंद्रित रखने में मदद करता है। प्रत्येक दिन आप प्रीनेटल योग करें। इससे आपका शरीर क्रियाशील बना रहेगा और गर्भावस्था में आमतौर पर होने वाली समस्याएं जैसे कब्ज और उल्टी से भी बची रहेंगी। प्रीनेटल योग कमर दर्द, सिर दर्द और मॉर्निंग सिकनेस से भी निजात दिलाने में मदद करता है। जानें, प्रेगनेंसी के दिनों में कौन-कौन से योग आप कर सकती हैं और इससे क्या फायदे हो सकते हैं।

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किस महीने से करें शुरुआत

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प्रेगनेंसी के दौरान हार्मोंन्स में बदलाव होता है साथ ही समय बीतने के साथ ही आपके पेट में पल रहा बच्चा हिलने-डुलने भी लगता है जिसके कारण आपको नींद आने में भी समस्या होती है। नींद पूरी नहीं होने के कारण आपको थकान महसूस हो सकती है। चौथे महीने से योग करना प्रेगनेंसी में सही माना गया है। वैसे, आप किसी भी योग को करने से पहले अपनी डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।

करें ये योगासन

गर्भावस्था के दौरान यदि आप प्रतिदिन एक-दो आसन करें तो प्रसव के बाद ठीक होने में कम समय लगता है। प्रेगनेंसी के चौथे महीने से आप इन योगासन का अभ्यास शुरू कर सकती हैं।

ताड़ासन

सुखासन

कोनासन

वज्रासन

त्रिकोणासन

तितली आसन

वीरभद्रासन

विपरीतकर्णी

पश्चिमोत्तानासन

शवासन

[caption id="attachment_629428" align="alignnone" width="655"]pre-natal yoga and its benefits प्रेगनेंसी में योग करने से सीजेरियन का खतरा रहता है कम और नॉमर्ल डिलिवरी के चांस बढ़ते हैं। © Shutterstock.[/caption]

इन्हें करने से बचें

नौकासन

विपरीत शलभासन

अर्धमत्स्येंद्रासन

चक्रासन

भुजंगासन

हलासन

बिना पीरियड्स के क्रैंप्स होना, हो सकती हैं ये वजहें

फायदे होते हैं क्या-क्या

- बॉडी का शेप मेंटेन रहता है। शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है।

- प्रेगनेंसी में योग करने से सीजेरियन का खतरा रहता है कम और नॉमर्ल डिलिवरी के चांस बढ़ते हैं।

- पीठ का दर्द, पैरों की सूजन और क्रैंप्स से आराम मिलता है।

- बॉडी वेट को सही बनाए रखने में मदद करते हैं।

- भ्रूण का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य ठीक रहता है।

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