Pregnancy Tips: प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में भूलकर भी ना करें ये 3 गलतियां, बढ़ जाएगा प्रीमैच्योर डिलीवरी का रिस्क
कई बार 7वें महीने में प्रीमैच्योर डिलीवरी होने की संभावना बढ़ जाती है। तो यदि आपकी प्रेग्नेंसी का 6-7 महीना चल रहा है, तो आपको कुछ बेहद ही जरूरी बातों का ख्याल रखना चाहिए।
प्रेग्नेंसी के दूसरी तिमाही में किन बातों का रखें ख्याल
Written by Anshumala|Updated : December 29, 2021 8:01 AM IST
Tips for Second trimester of Pregnancy: प्रेग्नेंसी के पूरे 9 महीने बेहद नाजुक होते हैं। इन 9 महीनों में सेहत के साथ ही अपनी डाइट का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, गर्भावस्था की पहली और आखिरी तिमाही में अपना खास ध्यान रखना चाहिए। लेकिन, ऐसा भी नहीं कि आप दूसरी तिमाही में लापरवाह हो जाएं। अपनी सेहत, खानपान का ख्याल रखना छोड़ दें। प्रेग्नेंसी (Pregnancy) के 6-7 महीने भी आपको कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी हो जाता है। कई महिलाएं दूसरी तिमाही में बहुत अधिक काम करती हैं, वजन उठाती हैं या फिर बार-बार झुकने वाला काम करती हैं। ध्यान रखें, कई बार इस तरह की छोटी-छोटी लापरवाहियां बरतने से भी प्रीमैच्योर डिलीवरी (ज्यादातर सातवें महीने में होता है) की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में गर्भावस्था की दूसरी तिमाही (Second trimester of Pregnancy) में कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें।
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प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में किन बातों का रखें ख्याल
यदि आपकी प्रेग्नेंसी का 6-7 महीना चल रहा है, तो आपको कुछ बेहद ही जरूरी बातों का ख्याल (Pregnancy tips)रखना चाहिए। कई बार 7वें महीने में प्रीमैच्योर डिलीवरी होने की संभावना बढ़ जाती है, ऐसे में आप बहुत भारी सामान उठाने से बचें। लगातार काम ना करें। बार-बार कुछ भी उठाने के लिए झुकने से बचें। इससे शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है। आप खुद को संभाल ना पाने की स्थिति में अचानक गिर सकती हैं। इससे मिसकैरेज की संभावना बढ़ सकती है। बार-बार बेबी बंप के साथ झुकने से पेट पर दबाव भी पड़ता है। इससे एसिड रिफलेक्स की समस्या शुरू हो सकती है, जो सीने में जलन का कारण बनता है।
सारा दिन खड़े रहकर किचन या घर का काम ना करती रहें। छठे से सातवें महीने में प्रवेश करने वाली हैं, तो अपना ध्यान (tips for Second trimester Pregnancy) रखें। इस दौरान आपको बहुत अधिक काम करने से बचना चाहिए। हेल्दी डाइट का सेवन करना चाहिए। अधिक देर तक खड़ी रहेंगी या फिर बैठकर ऑफिस का काम करती रहेंगी तो भी कमर, पीठ में दबाव पड़ने से दर्द बढ़ सकता है। कोशिश करें, बीच-बीच में काम से ब्रेक लेकर आराम करने का।
यदि आप सारा दिन घर और ऑफिस का काम करती रहेंगी और खाएंगी-पिएंगी नहीं, तो इसका नेगेटिव असर गर्भ में पल रहे शिशु पर हो (second trimester pregnancy dos and don'ts) सकता है। प्रेग्नेंसी के दूसरी तिमाही से अच्छी मात्रा में भोजन करना शुरू कर दें। कई बार पहली तिमाही में महिलाएं मॉर्निंग सिकनेस, उल्टी, जी मिचलाने के कारण अधिक नहीं खा पाती हैं। लेकिन, दूसरी तिमाही में पर्याप्त पौष्टिक भोजन डाइट में शामिल करें। इससे आपके साथ ही शिशु को भी पोषण मिलेगा। फाइबर युक्त डाइट लें। डेयरी प्रोडक्ट्स, दूध, अनाज, हरी सब्जी, फल, मांस, मछली आदि का सेवन जरूर करें। अपनी डॉक्टर से सलाह लेकर कुछ शारीरिक एक्टिविटी करें। मेडिटेशन, योग, हल्के एक्सरसाइज करें। प्रतिदिन पार्क में जाकर टहलें। इससे आपका मूड भी फ्रेश रहेगा। आपके अंदर पॉजिटिव एनर्जी का संचार होगा।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई प्रेग्नेंसी से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गई हैं। इनमें से किसी भी सलाह पर अमल करने या किसी तरीके को अपनाने का फैसला आपका व्यक्तिगत निर्णय होगा। किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले कृपया किसी विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करें।)
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