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World Acupuncture Day 2021: गर्भावस्था या प्रेगनेंसी में मॉर्निंग सिकनेस (Morning Sickness) की समस्या बहुत आम है। यह समस्या ज़्यादातर महिलाओं को प्रेगनेंसी में महसूस होती है और कई बार प्रेगनेंट औरतें इससे बहुत अधिक परेशान हो सकती हैं। जैसा कि, मॉर्निंग सिकनेस में प्रेगनेंट महिलाओं को उल्टी, मतली और चक्कर आने जैसी परेशानियां होती हैं और उनके लिए ठीक से खाना-पीना भी मुश्किल हो जाता है। मॉर्निंग सिकनेस से जुड़ी समस्याएं सुबह उठने के बाद भी हो सकती हैं तो कई महिलाओं को दिन में किसी भी वक़्त ये परेशानियां महसूस हो सकती हैं।
मॉर्निंग सिकनेस से राहत पाने के लिए महिलाएं अपने डॉक्टर के परामर्श के अनुसार कुछ उपाय करती हैं। वहीं, कुछ लोग घरेलू नुस्खों को भी आजमाते हैं। इसी तरह पिछले कुछ समय से मॉर्निंग सिकनेस से राहत पाने के लिए एक्यूपंक्चर की मदद लेने में भी कई महिलाओं ने रुचि दिखायी है। लेकिन, साथ ही अक्सर यह सवाल भी उठते हैं कि प्रेगनेंसी में एक्यूपंक्चर (Acupuncture In Pregnancy) कितना फायदेमंद या नुकसानदायक है। यहां पढ़ें एक्यूपंक्चर से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां जो आधारित हैं इस पारम्परिक चिकित्सा पद्धति से जुड़ी कुछ रिसर्च और स्टडीज पर।
चीन में चिकित्सा के प्रचलित पारम्परिक तरीकों में एक्यूपंक्चर (Acupuncture) भी एक तरीका है। इस तरीके में शरीर के कुछ विशेष स्थानों पर सुइयां चुभोई जाती हैं । ऐसा माना जाता है कि इन सुइयों के प्रयोग से शरीर में शक्ति का संचार सही तरीके से होता है कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत भी मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि यह तरीका कई सौ वर्ष पुराना है और अब इसे प्रेगनेंसी में होने वाली मॉर्निंग सिकनेस से राहत पाने के एक उपाय के तौर पर भी प्रचारित किया जा रहा है।
साल 2002 में ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड (Adelaide, Australia) शहर में की गयी एक स्टडी में 600 महिलाओं का अध्ययन करने के बाद शोधकर्ताओं ने दावा किया गया कि एक्यूपंक्चर ट्रीटमेंट लेने वाली गर्भवती महिलाओं में इसका कोई विशेष फायदा नहीं दिखा। क्योंकि, एक्यूपंक्चर ट्रीटमेंट लेने के बाद भी उनमें उल्टी और चक्कर आने (Dizziness) जैसी परेशानियां लगभग पहले जैसी ही बनी रहीं।
इसी तरह साल 2000 में भी स्वीडेन के उप्सला यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में (University Hospital, Department of Obstetrics and Gynaecology in Uppsala, Sweden) एक ऐसी ही स्टडी की गयी जिसमें यह समझने की कोशिश की गयी कि उल्टी या मतली की समस्या से राहत पाने में एक्यूपंक्चर कितना कारगर है। इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने उन प्रेशर पॉइंट्स पर से जुड़ा अध्ययन किया जिनको प्रेगनेंसी में एक्यूपंक्चर के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन पॉइंट्स को पी6 (pericardium 6 or P6) कहते हैं। कलाई के पास मौजूद इस पॉइंट पर प्रेशर डालने से उल्टी की समस्या से राहत मिलने के दावे कुछ पुरानी स्टडीज में किए गए थे। लेकिन इस स्टडी के दौरान देखा गया कि,
अगर आपने पहले कभी एक्यूपंक्चर नहीं कराया और आपको इस तरीके के बारे में कोई जानकारी नहीं है तो आपको बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। एक्यूपंक्चर कराने से पहले एक्सपर्ट्स से अच्छी तरह विचार-विमर्श कर लें। क्योंकि प्रेगनेंसी में एक्यूपंक्चर के कई साइड-इफेक्ट्स भी देखे गए हैं। ऐसी ही कुछ समस्याएं हैं-
इसीलिए, अगर आपने मॉर्निंग सिकनेस से राहत के लिए एक्यूपंक्चर कराना चाहती हैं तो अपने डॉक्टर से पहले इस विषय में चर्चा करें। आपकी प्रेगनेंसी से जुड़ी समस्याएं, आपकी मेडिकल हिस्ट्री के साथ-साथ इस बात पर ज़रूर चर्चा करें कि आपकी मॉर्निंग सिकनेस की समस्या कितनी गम्भीर है। फिर डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया शुरू करें।
(डिस्क्लेमर:इस लेख में दी गई एक्यूपंक्चर और स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक का परामर्श लें।)