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Written By: Jitendra Gupta | Updated : February 16, 2021 5:46 PM IST
All the above tips can plan their pregnancy accordingly.
हर शादीशुदा जोड़े की तमन्ना होती है कि जल्द से जल्द वह माता-पिता बने और उनके बीच एक नन्हा मेहमान आ जाए। कुछ लोग शादी के बाद ही फैमिली प्लानिंग शुरू कर देते हैं तो कुछ लोग कम से कम 2 से 3 साल का वक्त लेते हैं। हालांकि कोरोना काल में जब से लोगों को घर से काम करने यानी की वर्क फ्रॉम होम शुरू हुआ तो चीजों में बदलाव आया। एक्सपर्ट मानते हैं कि वर्क फ्रॉम होम होने से वैवाहिक जोड़ों को एक-दूसरे के साथ समय बिताने का मौका मिला और आलम ये है कि देशभर में दिसम्बर 2020 और फरवरी 2021 के बीच 30% से ज्यादा बच्चे पैदा होंगे।
गुरुग्राम स्थित मिराकल मेडीक्लिनिक और अपोलो क्रेडल हॉस्पिटल के डाक्टरों ने एक अध्ययन के बाद ये निष्कर्ष सामने रखे हैं। मिरेकल मेडिक्लिनिक और अपोलो क्रेडल हॉस्पिटल की प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ हेड और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अमिता शाह कहती हैं कि मार्च में जब से महामारी शुरू हुई है तब से कपल्स घर से काम कर रहे हैं जिसकी वजह से उन्हें घर पर साथ में समय बिताने का मौका मिल रहा है। बिजनेस ट्रेवल्स और आने-जाने में समय न लगने के कारण इसका बहुत ही शांतिकारी प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अप्रैल के अंत से हॉस्पिटल में अन्य वर्षों के मुकाबलें गर्भवती महिलाओं की संख्या में लगभग 20% की वृद्धि देखी गई है। यह वही समय था जब लॉकडाउन के प्रतिबंधों के कारण कपल्स साथ में रह रहे थे। ये गर्भवती महिलाएं दिसंबर की शुरुआत में अपने गर्भावस्था के समय को पूरा कर लेंगी। जिन पैरेंट्स ने अपने बच्चें को वार्षिक जोड़ के आधार पर 1 जनवरी को बच्चे पैदा करने का शेड्यूल बनाया था,उनमे क्रिसमस से बच्चे पैदा होने शुरू होंगे।"
डाक्टरों के कहना है कि गर्भवती महिलाओं के लिए गर्भावस्था का अंतिम तिमाही सबसे क्रिटिकल समय होता है क्योंकि इस दौरान उनकी इम्यूनिटी बहुत कमजोर रहती है। जिसकी वजह से इन्फेक्शन (कोविड 19) से इन्फेक्ट होने की संभावना बढ़ जाती है।
डॉ. अमिता शाह ने आगे कहा, " गर्भवती महिलाओं का इम्यूनिटी लेवल सामान्यतः नार्मल के मुकाबलें कम हो जाता है। इस वजह से वे वायरस और बैक्टीरिया का टारगेट बहुत आसानी से बन जाती हैं। वे महिलाओं के यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के अलावा अन्य इन्फेक्शन के प्रति अतिसंवेदनशील हो जाती है। हालांकि हाल के माहौल में उन्हें कोरोनावायरस से भी बहुत ज्यादा खतरा हो सकता है। यह खतरा तब और बढ़ सकता है जब उनके घर में कोई परिवार का सदस्य बाहर जा रहा हो।''
हम गर्भवती महिलाओं को घर पर भी 6 फीट का फिजकल डिस्टेंस बनाये रखना चाहिए।
हाथ-कोहनी धोते रहना चाहिए।
ताजे फल और सब्जियां खाने और एक्टिव रहने तथा पर्याप्त नींद लेनी चाहिए।
डॉ. शाह कहती हैं कि अगर कोई इन्फेक्ट भी हो जाता है तो चिंता न करें। अभी तक कोविड के वर्टिकल ट्रांसमिशन का कोई सबूत नहीं मिला है, जिसका मतलब है गर्भवती मां के पेट में उसके बच्चे को यह इन्फेक्शन नहीं होता है। हालांकि अगर वह डिलीवरी के ट्रीटमेंट में है तो वह और उसके बच्चे को अतिरिक्त देखभाल की जरुरत है, खासकर के जब मां बच्चे को दूध पिलाये और उससे कोई क्लोज कान्टेक्ट हो और मां का हेल्थ पैरामीटर लगातार चेक किया जाना चाहिए।
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