सर्दी और वायु प्रदूषण के कारण बढ़ा निमोनिया का खतरा, ऐसे करें बचाव

पीएम 10 और पीएम 2.5 का लेवल खतरे के निशान से भी ऊपर जा पहुंचा है। इसकी वजह से लोगों में निमोनिया का खतरा बहुत बढ़ गया है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : November 12, 2018 3:42 PM IST

विश्व निमोनिया दिवस हर साल 12 नवम्बर को मनाया जाता है। यही व समय है जब लोग निमोनिया की गिरफ्त में ज्यादा आते हैं। वायु प्रदूषण और ठंड का मौसम दोनों एक साथ आये हुए हैं। सांस के साथ शरीर में अत्यंत हानिकारण कण भी जा रहे हैं। देश के लगभग सभी प्रमुख शहरों में यह समस्या बनी हुयी है। पीएम 10 और पीएम 2.5 का लेवल खतरे के निशान से भी ऊपर जा पहुंचा है। इसकी वजह से लोगों में निमोनिया का खतरा बहुत बढ़ गया है। जिनको पहले से सांस की बीमारी है उनके लिए यह बहुत ही खतरनाक है। निमोनिया बच्चों, गर्भवती महिलाओं, और बुजुर्गों को सबसे अधिक खतरनाक होता है।

वायु प्रदूषण और निमोनियाः बरसात के बाद ये ऐसा समय है जब मौसम बहुत तेजी से बदलता है। बदलते मौसम के कारण वायु शुष्क हो जाती है। वायु के शुष्क होने से इंसान की श्वांस नली भी शुष्क हो जाती है जिसकी वजह से नेचुरल डिफेंस भी कमजोर हो जाता है। वायु प्रदूषण की वजह से इस समय हवा में वायरस, बैक्टीरिया, फंगस, धूल के कण और खतरनाक पार्टिकुलेटर मौजूद हैं। ये सारे पदार्थ सांस के माध्यम से सीधे फेफड़ों में पहुंच रहे हैं। इसकी वजह से निमोनिया का खतरा बहुत तेजी से बढ़ गया है। निमोनिया के अलावा सीओपीडी और ब्रोंकाइटिस का भी खतरा बहुत तेजी से बढ़ा है।

कौन लोग रहें ज्यादा सावधान ? यदि पहले से ही सांस संबंधी दिक्कते हैं तो सावधान रहें. आपको आसानी से फंगस या बैक्टीरिया का इंफेक्शन हो सकता है. एलर्जी से फेफड़ों की अंदर की परत क्षतिग्रस्त हो सकती है और उस पर बैक्टीरिया हमला करता है जिससे निमोनिया की समस्या हो जाती है।

निमोनिया के लक्षणः निमोनिया होने पर मरीज को बुखार, जुकाम, छींक, सांस फूल सकती है, सीने में दर्द, खांसी बलगम, ज्यादा बढ़ेगा तो हाथ पैर नीले पड़ सकते हैं, और बढ़ने पर बीपी कम होने के साथ चक्कर आने और बेहोशी की दिक्कत हो सकती है.खांसी के साथ गंदा बलगम आए, सांस बढ़े तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. जब जुबान और उंगलियां नीली पड़े तो यह इमरजेंसी है और मरीज को तुरंत आईसीयू की जरूरत है।

बच्चों को साथ क्या रखें सावधानीः बच्चे को बुखार है, पसीना आ रहा है, कंपकपी हो रही है, बहुत अधिक खांसी और गाढ़ा पीला, हरा या खून के अंश वाला बलगम है और बच्चे को भूख नहीं लग रही तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं. समय पर इलाज न मिलने से बच्चे में निमोनिया गंभीर रूप धारण कर सकती है। सांस फूलने और होंठ उंगलियों के नाखून नीले होने पर यह खतरनाक स्थिति है।

प्रदूषण-बच्चे और निमोनियाः हवा में इस समय प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है, जिसके कारण प्रदूषण वाले हानिकाकरक फेफड़े तक पहुंचते हैं और बच्चों के फेफड़ों में संक्रमण का कारण बनते हैं। बच्चों को बुखार होने, सर्दी जुखाम होने पर तत्काल डॉक्टर को दिखाना चाहिए। जरा सी लापरवाही से बच्चे निमोनिया की चपेट में आ सकते हैं। ध्यान रखें कि एक साल तक के बच्चे की सांस एक मिनट में 50 से अधिक बार तो नहीं चल रही हैं, बच्चा दूध पीना छोड़ दे, उंगली होठ नीले दिखे तो सावधान रहें. उल्टी दस्त, पेट फूलना भी निमोनिया का संकेत है।

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