दूसरों को रोता देख बच्चे क्यों रोने लगते हैं?

Verified Medically Reviewed By: Dr. Malini Saba

Dusro Ko Dekhkar Bacha Kyu Rota Hai: क्या आपका बच्चा भी किसी बच्चे को रोता देख खुद भी रोना शुरु कर देता है? अगर हां तो हमारा आज का ये लेख आपके लिए खास है। आपको इस लेख में बच्चे के मन की साइकोलॉजी के बारे में बताने वाले हैं।

Written by Vidya Sharma | Published : February 24, 2026 6:09 PM IST

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छोटे बच्चों के रोने का कारण

Bache Kyu Rote Hain: बचपन में बच्चे बेहद संवेदनशील होते हैं। कभी-कभी हम देखते हैं कि कोई बच्चा खुद परेशान नहीं है, लेकिन जब वह किसी और बच्चे को रोता देखता है, तो वह भी रोने लगता है। यह व्यवहार माता-पिता के लिए समझने में मुश्किल हो सकता है। डॉक्टर मालिनी सबा, साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक, कहती हैं कि यह स्थिति पूरी तरह सामान्य है और इसे ‘इमोशनल एम्पैथी’ कहा जाता है। छोटे बच्चे दूसरों के भावनात्मक संकेतों को अपनी भावनाओं के रूप में महसूस कर लेते हैं।

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सहानुभूति और इम्पैथी का विकास

छोटे बच्चों में सहानुभूति की भावना धीरे-धीरे विकसित होती है। जब वह किसी और को रोता देखता है, तो उसका मस्तिष्क समझता है कि वह बच्चा दुखी है और अपने आप भी उस भावना को महसूस करने लगता है। यह बताता है कि बच्चा भावनाओं को पहचानने और दूसरों के दर्द को समझने की क्षमता विकसित कर रहा है। Also Read - योग, आयुर्वेद, पंचकर्म और नेचुरोपैथी से पंतजलि योगपीठ में होता है बीमारियों का इलाज, जानें इस All in one सेंटर के बारे में

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अपनी भावनाओं की पहचान

कभी-कभी बच्चा अपने अंदर की भावनाओं को समझ नहीं पाता। जब वह किसी और के रोने को देखता है, तो उसे लगता है कि वही भावना उसी के अंदर भी है। डॉ. मालिनी सबा के अनुसार, यह बच्चों के लिए भावनाओं की पहचान और उन्हें एक्सप्रेस करने का एक प्राकृतिक तरीका है।

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सामाजिक सीखने की प्रक्रिया

बच्चे दूसरों को देखकर सीखते हैं कि रोना एक सामान्य प्रतिक्रिया है। जब उनका कोई साथी रोता है और माता-पिता या शिक्षक उसे सांत्वना देते हैं, तो बच्चा यह सीखता है कि भावनाओं को व्यक्त करना स्वाभाविक है। इस तरह से बच्चों में सामाजिक और भावनात्मक कौशल विकसित होते हैं। Also Read - वजन घटाने के लिए कितना सही है Bariatric Surgery, जानें किन लोगों के लिए है फायदेमंद

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सुरक्षा और सहारा की तलाश

छोटे बच्चे महसूस करते हैं कि जब कोई बच्चा रोता है, तो उन्हें भी सहारा की आवश्यकता हो सकती है। यह प्रतिक्रिया बच्चे की सुरक्षा और संरक्षण की भावना को दर्शाती है। डॉ. मालिनी सबा कहती हैं कि यह संकेत है कि बच्चा दूसरों के प्रति संवेदनशील है और सहारा देना या लेना चाहता है।

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माता-पिता की प्रतिक्रिया का असर

यदि माता-पिता बच्चे के साथ संवेदनशील और शांत रहते हैं, तो बच्चा अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना सीखता है। अगर माता-पिता बच्चे के रोने पर बार-बार डांटते हैं, तो वह भावनाओं को छुपाने लगता है। इसलिए सकारात्मक और सहायक प्रतिक्रिया बच्चों के भावनात्मक विकास में मदद करती है। बच्चों का दूसरों को देखकर रोना उनकी संवेदनशीलता और इम्पैथी का संकेत है। यह पूरी तरह सामान्य है और इसका मतलब यह नहीं कि बच्चा कमजोर है। डॉ. मालिनी सबा मानती हैं कि माता-पिता को बच्चे के साथ धैर्य और समझदारी से पेश आना चाहिए। बच्चे को भावनाओं को व्यक्त करने दें, उसे सहारा दें और यह महसूस कराएं कि भावनाएं साझा करना स्वाभाविक है। याद रखें, यही अनुभव बच्चे में सहानुभूति, सामाजिक समझ और मानसिक संतुलन विकसित करने में मदद करता है। Also Read - इन 5 लोगों के लिए नुकसानदेह हो सकता है पपीता, रोजाना खाने से बढ़ सकती हैं परेशानियां