क्या होती है टाइगर पेरेंटिंग, जो बच्चों के दिमाग पर डालती है गहरा असर

Verified Medically Reviewed By: Dr. Malini Saba

Tiger Parenting Se Bacho Ke Dimag Par Kya Asar Padta Hai: टाइगर पेरेंटिंग बच्चे के अच्छे भविष्य के लिए माता-पिता द्वारा अपनाई जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं यह बच्चों के दिमाग पर बुरा असर डालती है?

Written by Vidya Sharma | Updated : February 12, 2026 2:45 PM IST

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टाइगर पेरेंटिंग और किड्स मेंटल हेल्थ

Tiger Parenting Ke Side Effects: आपने गुड पेरेंटिंग और बैड पेरेंटिंग के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या कभी टाइगर पेरेंटिंग के बारे में सुना है? जैसा कि नाम से ही समझा जा सकता है कि बच्चों के पालन-पोषण के इस तरीके में बाघों द्वारा निभाए जाने वाले पालन-पोषण की झलक दिखती है। यानी कि इस पेरेंटिंग में माता-पिता अपने बच्चे की शिक्षा को लेकर स्ट्रीक्ट और अनुशासित होते हैं। टाइगर पेरेंटिंग में बच्चों को कड़े नियम और निर्देशों का पालन करना होता है। लेकिन सिर्फ इतना ही नहीं है। यह सब तो रही माता-पिता के नजरिए की बात, लेकिन साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मालिनी सबा कहती हैं कि बच्चों के नजरिए से देखा जाए तो टाइगर पेरेंटिंग कुछ बच्चों के लिए मानसिक दबाव पैदा कर सकती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि हर बच्चा एक सा नहीं होता है। जैसे कुछ बच्चों को बंद कमरे में पढ़ना पसंद होता है तो कुछ को ग्रुप स्टडी करना। ऐसे में माता-पिता द्वारा की जा रही टाइगर पेरेंटिंग बच्चों के दिमाग पर गहरा असर डाल सकती है। आइए आपको थोड़ा विस्तार से बताते हैं।

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इच्छा मारना

क्योंकि टाइगर पैरेंटिंग में बच्चों के हर पढ़ने से लेकर खेलने तक का समय तय किया गया होता है, इसलिए वह चाहते हुए भी अपने मन की नहीं कर पाते हैं। फिर चाहे एक्स्ट्रा मिनट खेलना हो या फिर रेस्ट करना। ऐसे में बच्चे की स्वयं के लिए निर्णय लेने की क्षमता भी धीरे-धीरे कम होने लगती है और वह मानसिक रूप से खुद को गुलाम महसूस करते हैं। Also Read - योग, आयुर्वेद, पंचकर्म और नेचुरोपैथी से पंतजलि योगपीठ में होता है बीमारियों का इलाज, जानें क्या है ट्रीटमेंट का पूरा प्रोसेस

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अत्यधिक अपेक्षाओं का दवाब

टाइगर पेरेंटिंग में माता-पिता अपने बच्चे से अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ उनसे हमेशा अव्वल आने की उम्मीद रखते हैं। यह उम्मीद बच्चों के दिमाग को असंतुलित करती है, क्योंकि अगर वह सारे नियमों का पालन करने के बाद और पूरे दिन पढ़ने के बाद भी अच्छे नंबर नहीं लाता है तो यह और अधिक स्ट्रेस का कारण बनता है।

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गलतियां करने का डर

वह बच्चे जो खुलकर जीते हैं, वह हजार गलतियां करते हैं और उनसे सीखते हैं। लेकिन जिनके माता-पिता टाइगर पेरेंटिंग अपनाते हैं उनके बच्चों में गलतियां करने का डर बना रहता है। वह हर कदम फूंक-फूंक कर उठाते हैं। उन्हें डर होता है कि कहीं उनकी एक गलती से माता-पिता निराश न हो जाएं। यह सोचना भी बच्चे के दिमाग पर असर डालता है और डर व घबराहट का माहौल पैदा करता है। Also Read - वजन घटाने के लिए कितना सही है Bariatric Surgery, जानें किन लोगों के लिए है फायदेमंद

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सोशल फ्रेंडली कम होते हैं

बच्चों का स्वभाव होता है कि वह जहां जाते हैं घुल-मिल जाते हैं, लेकिन अगर वह अधिक अनुशासन में रहें, केवल पढ़ाई पर फोकस करें तो उनके अंदर सोशल एंग्जाइटी पैदा हो सकती है। यानी कि वह अधिक लोगों से मिलने में संकोच कर सकते हैं। यह स्थिति ऐसी होती है कि ऐसे बच्चे मजाक का पात्र भी बन सकते हैं क्योंकि अन्य बच्चे या माता-पिता उन्हें अन्य बच्चों से कंपेयर कर सकते हैं।

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आत्मसम्मान की कमी

टाइगर पेरेंटिंग में पल रहे बच्चों में आत्मसम्मान की कमी होती है व चिंता और डिप्रेशन अधिक। ऐसा इसलिए क्योंकि वह हर काम अपने माता-पिता की मर्जी से कर रहे होते हैं, जिनमें उनकी कोई राय या मत नहीं होता है। ऐसे बच्चे न खुल कर कुछ बोल पाते हैं और न कर पाते हैं। Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है। Also Read - इन 5 लोगों के लिए नुकसानदेह हो सकता है पपीता, रोजाना खाने से बढ़ सकती हैं परेशानियां