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Measles के मरीज के साथ लापरवाही हो सकती है जानलेवा, जानें किन बातों का ध्यान रखना जरूरी

Risk of measles: खसरा जानलेवा बीमारियों में से एक है, जिससे जुड़ी पर्याप्त जानकारी होना सबसे ज्यादा जरूरी है। इस लेख में हम आपको इन्हीं समस्याओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां देने वाले हैं।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : March 25, 2025, 8:21 PM

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खसरा का बढ़ता खतरा

हाल के वर्षों में, दुनियाभर में मीजल्स यानी खसरा के मामलों में अचानक वृद्धि देखने को मिल रही है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। असल में खसरा एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करती है, लेकिन यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। यह बीमारी खसरा वायरस के कारण होती है और मुख्य रूप से छींकने, खांसी करने या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, नाक बहना, आंखों में जलन और शरीर पर लाल दाने आना शामिल हैं। खसरा गंभीर स्थिति में फेफड़ों या दिमाग को प्रभावित कर सकता है, जिससे मौत का खतरा बढ़ सकता है। इससे बचाव के लिए एमआर (Measles, Mumps, Rubella) वैक्सीनेशन जरूरी होती है।

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मीजल्स के बढ़ते मामलों के कारण

मीजल्स का सबसे बड़ा कारण टीकाकरण में कमी है। कई देशों में टीकाकरण कार्यक्रमों की कमी, जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता न होने के कारण यह वायरस फैल रहा है। मीजल्स वायरस समय-समय पर अपने स्वरूप में बदलाव करता रहता है, जिससे इसे नियंत्रित करना और भी कठिन हो जाता है। Also Read - बांग्लादेश में तेजी से फैल रहा खसरा, कुछ ही महीनों में हुई सैकड़ों बच्चों की मौत

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मीजल्स से बचाव के उपाय

मीजल्स से बचने का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है। मीजल्स, मम्प्स और रुबेला (MMR) वैक्सीनेशन बच्चों के लिए जरूरी है, जो 9 महीने की उम्र में दिया जाता है और फिर 16-18 महीने में दूसरा डोज दिया जाता है। इसके अलावा हाइजीन, स्वास्थ्य जांच, जागरूकता भी जरूरी है।

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नियमित जांच जरूरी

मीजल्स एक खतरनाक और संक्रामक बीमारी है, लेकिन उचित टीकाकरण और सावधानियों से इससे बचाव किया जा सकता है। नियमित स्वास्थ्य जांच से बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित करें और किसी भी बीमारी के लक्षणों के बारे में जानकारी रखें। अगर बच्चे में मीजल्स के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। Also Read - खसरे से अब लड़ना होगा आसान? वैज्ञानिकों ने खोजी असरदार एंटीबॉडीज

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इलाज का उद्देश्य

खसरा का कोई जड़ से इलाज नहीं है और इसके इलाज में सिर्फ इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। इसके अलावा मरीज को आराम प्रदान करने की कोशिश करना और इस बीमारी के कारण हो रही जटिलताओं को बढ़ने से रोकना इसके इलाज का मुख्य उद्देश्य है।

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किन बातों का रखें ध्यान

खसरा के मरीजों के लिए अपनी सेहत का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। रोजाना हल्की एक्सरसाइज, समय पर दवाएं लेना, स्वच्छता बनाए रखना, सही डाइट लेना आदि बातों का ध्यान रखना जरूरी है। अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है। Also Read - दुनियाभर में बढ़े खसरा के मामले कई गुना, इस उम्र के बच्चों को है इस बीमारी का सबसे ज्यादा रिस्क