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अर्थराइटिस में राहत दिला सकती हैं ये 5 जड़ी-बूटियां, आयुष मंत्रालय ने दी डाइट में शामिल करने की सलाह

अर्थराइटिस रोगियों को दवाइयों के साथ अपने खान-पान का भी ध्यान रखने की जरूरत है। अगर आपको गठिया है, तो आप आयुष मंत्रालय द्वारा बताए गए इन जड़ी-बूटियों का सेवन कर सकते हैं।

Written By Anju Rawat
Updated : July 22, 2026 7:40 PM IST

अर्थराइटिस रोगियों के लिए जड़ी-बूटियां

अर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लोगों को तरह-तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न जैसी समस्याएं अर्थराइटिस के लक्षण हो सकते हैं। यह समस्या किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है, लेकिन बुजुर्गों में इसका खतरा ज्यादा हो सकता है। अर्थराइटिस के इलाज के लिए दवाइयों और सही खान-पान का ध्यान रखना जरूरी होता है। इसके लक्षणों को मैनेज करने के लिए कुछ जड़ी-बूटियों का सेवन भी किया जा सकता है। आयुष मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ ऐसी जड़ी-बूटियों के बारे में बताया है, जो अर्थराइटिस के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

1. सहजन

आयुष मंत्रालय के अनुसार, अर्थराइटिस रोगियों के लिए सहजन का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है। सहजन में विटामिन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। आयुर्वेद में सहजन को जोड़ों के लिए लाभकारी माना गया है। सहजन का सेवन करने से अर्थराइटिस की वजह से होने वाली सूजन और अकड़न कम हो सकती है। इसमें मौजूद पोषक तत्व हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।

2. निर्गुंडी

आयुर्वेद में निर्गुंडी जड़ी-बूटी को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। आयुष मंत्रालय ने इस हर्ब को अर्थराइटिस रोगियों के लिए लाभकारी बताया है। इस जड़ी-बूटी का उपयोग करने से सूजन और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है। आयुर्वेद में अर्थराइटिस के रोगियों का इलाज करने के लिए इस जड़ी-बूटी का सेवन करने की सलाह दी जा सकती है। यह हर्ब मांसपेशियों को आराम दिलाता है और अकड़न कम करने में सहायक होती है।

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3. गुग्गुल

आयुष मंत्रालय ने गुग्गुल को भी अर्थराइटिस रोगियों के लिए लाभकारी बताया है। आयुर्वेद में दर्द और सूजन संबंधी समस्याओं में इस जड़ी-बूटी का उपयोग किया जाता है। अगर आपको अर्थराइटिस है, तो आप इस जड़ी-बूटी को डॉक्टर की सलाह पर ले सकते हैं। यह जोड़ों के दर्द को कम करने और मांसपेशियों को आराम दिलाने में मदद कर सकता है।

4. तिल का तेल

आयुष मंत्रालय ने गठिया के रोगियों को तिल के तेल से मालिश करने की सलाह भी दी है। तिल का तेल खाने के साथ ही, मालिश करने के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। तिल के तेल से जोड़ों और मांसपेशियों की मालिश करने से जकड़न को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे मांसपेशियों को आराम भी मिलता है। हालांकि, यह अर्थराइटिस का इलाज नहीं है।

5. मेथी

गठिया के रोगियों के लिए मेथी के बीज लाभकारी हो सकते हैं। मेथी के बीज औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इनमें कई ऐसे कंपाउंड पाए जाते हैं, जो सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। मेथी के बीज पाचन और मेटाबॉलिज्म को भी सपोर्ट करते हैं। आप मेथी के बीजों को सब्जी-दाल में मिलाकर खा सकते हैं या इसका पानी भी पी सकते हैं। इन जड़ी-बूटियों को आयुष मंत्रालय ने फायदेमंद बताया है। लेकिन, ये अर्थराइटिस का इलाज नहीं है और न ही दवाइयों का विकल्प है। इसलिए अर्थराइटिस होने पर डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन जरूर करें।