सिजेरियन डिलेवरी के आठ डरावने फैक्ट्स

विश्व में भर में केवल 14 देश ही ऐसे हैं जहां मानक के अनुरूप सिजेरियन किया जाता है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated: June 14, 2018, 9:17 PM

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ऑपरेशन के द्वारा पैदा होने वाले बच्चों को सिजेरियन बेबी भी कहा जाता है। वर्तमान दौर में इसका चलन दूनियाभर में बढ़ता जा रहा है। डब्ल्यूएचओ की 137 देशों के आंकडे की रिपोर्ट में यह तथ्य पाया गया कि विश्व में भर में केवल 14 देश ही ऐसे हैं जहां मानक के अनुरूप सिजेरियन किया जाता है।

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ऑपरेशन पर जोरः 14 देशों के अलावा बाकी के देशों में जरूरत से ज्यादा ऑपरेशन पर जोर दिया जाता है। जबकि डब्ल्यूएचओ की मानें तो सिजेरियन तभी किया जाना चाहिए जब मां या बच्चे की जान को खतरा हो।  Also Read - लिवर का कितना हिस्सा Donate कर सकते हैं? कौन बन सकता है Donor? | Dr. Ankur Garg

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सबसे ज्यादा यहां होता है सिजेरियनः दुनियाभर के देशों में कुछ देश ऐसे भी हैं जहां हर दूसरा बच्चा ऑपरेशन के द्वार पैदा होता है। ब्राजील, तुर्की और मिस्र में सिर्फ 50 प्रतिशत महिलाऔं की नार्मल डिलीवरी होती है।

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भारत की स्थितिः अगर भारत की हेल्थ व्यवस्था की बात की बात की जाय तो सिजेरियन के मामले में ज्यादा स्थिति खराब नहीं है। भारत में लगभग 18 प्रतिशत डिलेवरी सिजेरियन के द्वारा होती है। लेकिन भारत के प्रमुख महानगरों में यह बहुत ज्यादा है। महानगरों में दिल्ली और मुंबई के आंकडे़ ज्यादा चौकाने वाले हैं।  Also Read - 4 साल व्हीलचेयर पर रही महिला, सेल बेस्ड थेरेपी के बाद फिर चलने लगी

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भारत में दिल्ली है अव्वलः दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों में 65 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे सिजेरियन के माध्यम से पैदा होते हैं। रिपोर्ट की माने तो कुछ महिलांए ऐसा अपनी मर्जी से करती हैं तो कुछ मामलों में डॉक्टर इसके लिए उकसाते या मजबूर करते हैं।

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फायदे का कारोबारः भारत जैसे देशों में ज्यादा होने का प्रमुख कारण हेल्थ सेक्टर को कारोबार की तरह करने वाली संस्थानों का ज्यादा होना भी है। सामान्य डिलीवरी में घंटों का समय लगता है और कम समय तक मां और बच्चा अस्पताल में रहता है, उसके उलट सिजेरियन में मां और बच्चे को कई दिन अस्पताल में रहना पड़ता है जो कमाई का मुख्य जरिया है।  Also Read - हार्ट हेल्थ में सुधार करने के लिए रोज खाएं ये 5 नट्स और सीड्स, हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल को रख सकते हैं कंट्रोल

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एक बार के बाद फिर हर बारः समाज में यह आम धारणा या राय बन गयी है कि अगर किसी का एक बार सिजेरियन हो गया तो उसे हर डिलेवरी के समय सिजेरियन ही कराना पड़ेगा जो की गलत है। एक डिलेवरी के 2 साल बाद शरीर सामान्य हो जाता है। फिर भी बहुत कम डॉक्टर इसके लिए हामी भरते हैं।

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खतरे का है यह कामः डॉक्टर व एक्सपर्ट की माने तो सिजेरियन खतरे से भरी प्रक्रिया होती है। मां की शरीर को चीर कर निकाला जाता है डिलीवरी के कई महीने के बाद मां और बच्चे का हेल्थ सामान्य हो पाता है। फिर भी फायदे के कारोबार के चक्कर में हेल्थ को नजर अंदाज किया जाता है।  Also Read - जीवित अंगदान क्या है और इसके बाद व्यक्ति के जीवन पर क्या असर पड़ता है? जानिए अंगदान के बाद का जीवन कैसा होता है