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वर्ल्ड पार्किंसंस डे 2019 : आयुर्वेद में छिपा है पार्किंसंस डिजीज का इलाज, ये हैं काम के हर्ब्स

मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता ने पाया कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन नामक तत्व पार्किंसंस रोग को दूर करने में मदद करता है।

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Written By: Anshumala | Published : April 9, 2019, 3:04 PM

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11 अप्रैल को ''वर्ल्ड पार्किंसंस डे'' यानी विश्व पार्किंसंस दिवस मनाया जाता है। पर्किंसंस डिजीज नर्वस सिस्टम में धीरे-धीरे बढ़ने वाला एक डिसऑर्डर है, जिससे पूरे शरीर की गतिविधि प्रभावित होती है। शुरुआत में इसके लक्षण लक्षण नजर नहीं आते हैं। किसी-किसी को हाथों में कंपकंपी महसूस होने लगती है। हाथों में कंपकंपी होना ही पार्किंसंस के होने की पुष्टि करता है। इसके साथ ही जकड़न या शारीरिक गतिविधियों में धीमापन या अति संवेदनशीलता जैसे लक्षण भी प्रकट हो सकते हैं। इसमें जुबान धीमी या अस्पष्ट होने लगती है। रोग बढ़ने के साथ ही ये लक्षण बदतर होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में न्यूरोलॉजिस्ट से तुरंत संपर्क करना चाहिए। इसके लक्षण अलग-अलग लोगों में अलग-अलग देखने को मिलते हैं। कंपकंपी, धीमी गतिविधि, सख्त मांसपेशियां, शरीर की असाधारण मुद्रा और संतुलन, स्वाभाविक गतिविधियों पर विराम, बोली में बदलाव, लिखावट में बदलाव आदि इसके कुछ आम लक्षण हैं। आयुर्वेद की मदद से पार्किंसंस का उपचार किया जा सकता है। यह एक ऐसा इलाज है, जिसमें पूरे शरीर का इलाज किया जा सकता है। आयुर्वेदिक उपचार तथ्य पर आधारित होता है, जिसमें अधिकतर समस्याएं त्रिदोष में असंतुलन यानी कफ, वात और पित्त के कारण उत्पन्न होती हैं।

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फायदेमंद हल्दी- हल्दी एक ऐसा हर्ब है, जिसमें मौजूद स्वास्थ्य गुणों के कारण हम इसे कभी अनदेखा नहीं कर पाते। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता ने पाया कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन नामक तत्व पार्किंसंस रोग को दूर करने में मदद करता है। ऐसा वह इस रोग के लिए जिम्मेदार प्रोटीन को तोड़कर और इस प्रोटीन को एकत्र होने से रोकने के द्वारा करता है। Also Read - मानसून में कौन सी बीमारियां होने का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ता है?

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लहसुन- शरीर का कम्पन दूर करने के लिए बायविडंग एवं लहसुन के रस को पकाकर सेवन करने से रोगी को लाभ मिलता है। लहसुन के रस से शरीर पर मालिश करने से रोगी का कंपन दूर होता है। 4 कली लहसुन छिलका हटाकर पीस लें। इसे गाय के दूध में मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कम्पन ठीक हो जाता है।

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जिन्को बाइलोबा- जिन्को बाइलोबा (Ginkgo biloba) को पार्किंसंस से ग्रस्त मरीजों के लिए एक लाभकारी जड़ी-बूटी माना जाता है। मेक्सिको में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी के राष्ट्रीय संस्थान में 2012 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, जिन्को पत्तियों के सत पार्किंसंस के रोगी के लिए फायदेमंद होता है। पत्तियों के सत ने मध्यमस्तिष्क डोपामाइन न्यूरॉन क्षति के खिलाफ न्यूरोप्रोटेक्टिव और न्यूरोरिकवरी के प्रभाव को दिखाया। इसका पीडी उपचार के एक विकल्प के रूप में इस्तेमाल होता है। Also Read - मानसून में अदरक का पानी पीने से क्या होता है?

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ब्राह्मी- पार्किसन के रोगियों के लिए ब्राह्मी किसी वरदान से कम नहीं है। यह दिमाग के टॉनिक की तरह काम करती है। इसका इस्तेमाल वर्षों से याददाश्ता बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है। मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर के अध्ययन के अनुसार, ब्राह्मी दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करता है। साथ ही यह मस्तिष्क किशोकाओं की रक्षा करती है। एक अन्य अध्ययन के अनुसार, ब्राह्मी के बीज का पाउडर पार्किंसंस के लिए बहुत बढ़िया इलाज है। यह रोग को दूर करने और मस्तिष्क की नुकसान से रक्षा करने करने का दावा करती है।