Ayurvedic Cure Of Parkinsons Disease 1
11 अप्रैल को ''वर्ल्ड पार्किंसंस डे'' यानी विश्व पार्किंसंस दिवस मनाया जाता है। पर्किंसंस डिजीज नर्वस सिस्टम में धीरे-धीरे बढ़ने वाला एक डिसऑर्डर है, जिससे पूरे शरीर की गतिविधि प्रभावित होती है। शुरुआत में इसके लक्षण लक्षण नजर नहीं आते हैं। किसी-किसी को हाथों में कंपकंपी महसूस होने लगती है। हाथों में कंपकंपी होना ही पार्किंसंस के होने की पुष्टि करता है। इसके साथ ही जकड़न या शारीरिक गतिविधियों में धीमापन या अति संवेदनशीलता जैसे लक्षण भी प्रकट हो सकते हैं। इसमें जुबान धीमी या अस्पष्ट होने लगती है। रोग बढ़ने के साथ ही ये लक्षण बदतर होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में न्यूरोलॉजिस्ट से तुरंत संपर्क करना चाहिए। इसके लक्षण अलग-अलग लोगों में अलग-अलग देखने को मिलते हैं। कंपकंपी, धीमी गतिविधि, सख्त मांसपेशियां, शरीर की असाधारण मुद्रा और संतुलन, स्वाभाविक गतिविधियों पर विराम, बोली में बदलाव, लिखावट में बदलाव आदि इसके कुछ आम लक्षण हैं। आयुर्वेद की मदद से पार्किंसंस का उपचार किया जा सकता है। यह एक ऐसा इलाज है, जिसमें पूरे शरीर का इलाज किया जा सकता है। आयुर्वेदिक उपचार तथ्य पर आधारित होता है, जिसमें अधिकतर समस्याएं त्रिदोष में असंतुलन यानी कफ, वात और पित्त के कारण उत्पन्न होती हैं।
