क्या जिद्दी है बच्चा , तो ऐसे सिखाएं जरूरी बातें

बच्चोंो की परवरिश में प्या र और अतिरि‍क्त् लापरवाही के बीच फर्क करने की है जरूरत।

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Anger-management

आजकल पेरेंट्स के पास बच्चों के लिए बहुत कम समय होता है। ऐसे में वे सही गलत समझे बिना ही बच्चों; की हर डिमांड पूरी करने लगते हैं। बहुत बार ऐसा होता है कि समय की कमी और अत्यलधिक लाड़ प्याोर के कारण बच्चेू जिद्दी हो जाते हैं। अगर आपको भी लगता है कि आपका बच्चाध हो रहा है जिद्दी तो ऐसे समझाएं उसे जीवन के लिए जरूरी बात।

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Parenting-2 Plus

प्यानर नहीं सबक भी : आमतौर पर दो-ढाई साल की उम्र में बच्चे बड़ों के निर्देशों को समझने लगते हैं और उनमें अच्छी आदतें विकसित करने के लिए इसी उम्र से पेंरेंट्स को सचेत हो जाना चाहिए। जरूरी है कि इसी उम्र में उन्हेंए प्याेर के साथ जीवन के लिए जरूरी सबक देने की शुरूआत भी कर देनी चाहिए।

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Parenting-sharing2

शेयरिंग की आदत : अगर आपके घर में एक से ज्य़ादा बच्चे हों तो उनके लिए अलग-अलग चीज़ें लाने के बजाय चॉकलेट या वेफर्स का एक बड़ा पैकेट लेकर आएं। फिर बड़े बच्चे को पैकेट सौंपते हुए उससे कहें कि इसे तुम सबके साथ शेयर करोगे। इससे उसमें शेयरिंग के साथ जि़म्मेदारी की भी भावना विकसित होगी।

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Playing-discipline

खेल-खेल में अनुशासन : रोज़ाना शाम को बच्चों को अपने साथ पार्क जैसे किसी सार्वजनिक स्थल पर ज़रूर ले जाएं। उनके समाजीकरण के लिए यह बहुत ज़रूरी है। वहां अगर वह किसी दोस्त को धक्का देकर गिराने या उसके साथ मारपीट जैसी हरकतें करे तो इसे बच्चे की मासूम शरारत समझकर इग्नोर न करें, बल्कि उसे प्यार से समझाएं कि अगर कोई तुम्हारे साथ भी ऐसा करे तो तुम्हें कैसा लगेगा।

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Parenting-lesson

जरूरी है गुस्सेा का मैनेजमेंट : छोटी-छोटी बातों के लिए बच्चों का रूठना या जि़द करना स्वाभाविक है। उनके ऐसे किसी व्यवहार पर ओवर रिएक्ट करने के बजाय धीरे-धीरे उन्हें यह समझाना बहुत ज़रूरी है कि तुम्हारी हर बात नहीं मानी जाएगी। कई बार बच्चे गुस्से में तोडफ़ोड़ या मारपीट जैसे हिंसक व्यवहार करने लगते हैं। अगर कभी आपका बच्चा रो-चिल्लाकर किसी चीज़ के लिए जि़द करे तो उस वक्त उसकी कोई भी मांग पूरी न करें।