Omicron sub variant BA.2: भारत में ओमिक्रोन के सब वेरिएंट के 500 से ज्यादा मामले, जानें इस नए वेरिएंट के बारे में सब कुछ

इस वेरिएंट को स्टील्थ ओमिक्रोन के रूप में जाना जाता है, जो कि दुनिया के कुछ हिस्सों में ओमिक्रोन के दूसरे स्ट्रेन के मुकाबले बहुत तेजी से फैल रहा है।

Written by Jitendra Gupta | Updated : March 15, 2022 11:23 AM IST

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जानें इस नए वेरिएंट के बारे में सब कुछ

भारत में ओमिक्रोन का कहर अभी थमा तक नहीं है कि इसके सब-वेरिएंट के देश भर में 500 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। ब्रिटेन हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (यूकेएचएसए) के मुताबिक, भारत ने 21 जनवरी तक इंफ्लूएंजा वायरस और कोविड के जीनोमिक डेटा मुहैया कराने के लिए वैश्विक संस्था GISAID के पास करीब BA.2 के 530 सैंपल भेजे हैं। BA.2 को 'ओमिक्रोन लिटल ब्रदर' कहा जा रहा है और ऐसा माना जा रहा है कि ये ओमिक्रोन के म्यूटेशन से पनपा है, जिसे B.1.1.529 जाना जाता है। बता दें कि ओमिक्रोन भी डेल्टा वेरिएंट के म्यूटेशन से बना है।

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स्टील्थ वेरिएंट दिया गया नाम

इस नए वेरिएंट के ज्यादातर मामले भारत, डेनमार्क और स्वीडन सहित बहुत से देशों में सबसे ज्यादा पाए गए हैं। हालांकि यूकेएचएसए ने ओमिक्रोन के इस सब वेरिएंट को वेरिएंट अंडर इंवेस्टिगेशन के रूप में वर्गीकृत किया है। इस वेरिएंट को स्टील्थ ओमिक्रोन के रूप में जाना जाता है, जो कि दुनिया के कुछ हिस्सों में ओमिक्रोन के दूसरे स्ट्रेन के मुकाबले बहुत तेजी से फैल रहा है।  Also Read - छोटे बच्चों में आम है ल्यूकेमिया कैंसर, डॉक्टर से जानें यह क्या होता है और इससे बचाव कैसे कर सकते हैं?

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किन देशों में बीए.2 सबसे ज्यादा प्रभावकारी?

ये वेरिएंट कम से कम 43 देशों में मिला है और ऐसा माना जा रहा है कि ये कुछ देशों में बहुत ही आम वेरिएंट बन चुका है। ये वेरिएंट भारत, डेनमार्क और स्वीडन जैसे बहुत से देशों में मिला है, जहां हाल के दिनों में इसके बहुत से मामले आए हैं।

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क्यों इस वेरिएंट को कहा जा रहा स्टील्थ ओमिक्रोन?

दरअसल स्टील्थ ओमिक्रोन के स्पाइक प्रोटीन में जेनेटिक सोर्स करीब 69-70 संख्या तक कम हैं, जिसकी वजह से कुछ पोलिमर्स चेन रिएक्शन में एस जीन टार्गेट फेल्योर देखा गया है। ऐसा ही कुछ पहले ओमिक्रोन के मामलों में भी देखा गया था। दूसरे शब्दों में कहें तो मूल स्ट्रेन के म्यूटेशन होने के बाद बने नए रूप में एस जीन की कमी है, जो कि ये दर्शाता है कि सब स्ट्रेन वाकई में समान तरीके का म्यूटेशन नहीं है। चूंकि बीए.2 में ओमिक्रोन के मूल रूप जैसा विशिष्ट म्यूटेशन नहीं हुआ है ,इसलिए इसका पता लगाने में आसानी हो सकती है कि ये डेल्टा वेरिएंट से कितना अलग है। इसलिए ही इसे स्टील्थ ओमिक्रोन कहा जा रहा है।  Also Read - विटामिन D3 और B12 की कमी को हल्के में क्यों न लें?

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सबसे पहले कहां पाया गया ये वेरिएंट?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओमिक्रोन सब वेरिएंट का सबसे पहले पता भारत और दक्षिण अफ्रीका में पिछले साल दिसंबर 2021 में चला था। इसके अलावा दो और सब वेरिएंट का पता चला है, जिसका नाम BA.3 or BB.2 है। हालांकि वैज्ञानिक इनकी ओर ध्यान कम दे रहे हैं क्योंकि बीए.2 के मामलों में नाटकीय रूप से वृद्धि देखने को मिली है। बताया जा रहा है कि बीए.2 के 20 से ज्यादा म्यूटेशन हैं और आधे से ज्यादा इसके स्पाइक प्रोटीन में हैं, जो इंसानी कोशिकाओं के संपर्क में आते हैं और शरीर में वायरस के प्रवेश की मुख्य वजह है।

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ओमिक्रोन से कितना घातक है बीए.2?

वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि ओमिक्रोन के तीन मुख्य सबवेरिएंट हैं, जिसमें BA.1, BA.2, और BA.3 शामिल हैं। हालांकि अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी फिलहाल इस वक्त पर BA.1 और BA.2 के बीच अंतर नहीं लगा पाई है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, 23 दिसंबर तक उनके पास पहुंची रिपोर्ट में 99 मामले बीए.1से पाए गए थे।  Also Read - क्या सिर्फ मोटे लोगों को ही हाइपरटेंशन होता है?