प्रेग्नेंसी में थायराइड कितना होना चाहिए? जानें गर्भावस्था में क्यों बढ़ जाता है थायराइड का स्तर

Normal Thyroid Levels During Pregnancy: प्रेग्नेंसी में थायराइड का स्तर सामान्य रहना जरूरी होता है। लेकिन, ज्यादातर महिलाओं के प्रेग्नेंसी के दौरान थायराइड का स्तर असंतुलित हो जाता है। जानें, कितना होना चाहिए नॉर्मल रेंज?

Written by Anju Rawat | Published : May 23, 2025 3:10 PM IST

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प्रेग्नेंसी और थायराइड

Thyroid in Pregnancy: थायराइड एक तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जो गले के आगे वाले हिस्से पर स्थिति होती है। यह ग्रंथि T3 और T4 हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन्स, शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करते हैं। साथ ही, शरीर के लिए कई अन्य जरूरी काम भी करते हैं। लेकिन, थायराइड हार्मोन में बदलाव होने पर कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होनी शुरू हो जाती हैं। थायराइड आजकल की एक बेहद आम समस्या बन गई है। प्रेग्नेंसी के दौरान भी कई महिलाओं में थायराइड विकसित होता है। लेकिन, प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में थायराइड का स्तर सामान्य होना बेहद जरूरी होता है। अन्यथा, कई तरह की दिक्कतें होनी शुरू हो सकती हैं। आपको बता दें कि हर साल 25 मई को विश्व थायराइड दिवस (World Thyroid Day) मनाया जाता है। आइए, आज इसी मौके पर प्रकाश हॉस्पिटल, नोएडा के प्रसूति एवं स्त्री रोग सलाहकार डॉ. शची सिंह से जानते हैं प्रेग्नेंसी के दौरान कितना होना चाहिए नॉर्मल थायराइड (Pregnancy me Thyroid Kitna Hona Chahiye)?

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प्रेग्नेंसी में थायरायड का संतुलन में होना क्यों जरूरी है?

आपको बता दें कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में थायराइड का स्तर सामान्य रहना बहुत जरूरी होता है। दरअसल, गर्भावस्था के शुरुआती तीन महिलाओं में शिशु की थायराइड ग्रंथि विकसित नहीं हो पाती है। ऐसे में गर्भस्थ शिशु को, अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए मां के थायराइड हार्मोन पर ही निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में अगर मां का थायराइड स्तर कम या ज्यादा होता है, तो बच्चे को भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान होना पड़ सकता है। इसका असर बच्चे के मानसिक विकास और वजन पर पड़ सकता है।  Also Read - प्रेग्नेंसी में नॉर्मल थायराइड कितना होता है? जानिए Thyroid कंट्रोल करने के 4 तरीके

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प्रेग्नेंसी में थायराइड लेवल कितना होना चाहिए?

थायराइड का पता लगाने के लिए डॉक्टर थायराइड स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (TSH) की जांच करवाते हैं। इस जांच से पता चलता है कि थायराइड ग्रंथि कितनी एक्टिव है। आपको बता दें कि प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में टीएसएच लेवल 0.1 - 2.5 mIU/L होना चाहिए। वहीं, दूसरी तिमाही थायराइड का स्तर 0.2 - 3.0 mIU/L और तीसरी तिमाही 0.3 - 3.0 mIU/L होना चाहिए। इसलिए आपको प्रेग्नेंसी के दौरान थायराइड की जांच जरूर करवानी चाहिए। अगर थायराइड का स्तर कम या ज्यादा हो, तो डॉक्टर से तुरंत कंसल्ट करें।

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प्रेग्नेंसी में थायराइड लेवल क्यों बढ़ जाता है?

आपको बता दें कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर में एस्ट्रोजन और एचसीजी हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। ये दोनों हार्मोन, थायराइड ग्रंथि को अधिक हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करते हैं। इसकी वजह से महिलाओं में थायराइड का स्तर बढ़ जाता है।  Also Read - प्रेगनेंसी में इन 3 तरीकों से कंट्रोल हो सकता है थायराइड! एक्सपर्ट से जानें थायराइड कंट्रोल करने के आसान तरीके

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थायराइड बढ़ने पर क्या दिक्कत हो सकती है?

प्रेग्नेंसी में थायराइड लेवल बढ़ने की स्थिति को हाइपरथायरायडिज्म कहते हैं। इसमें थायराइड हार्मोन का उत्पादन जरूरत से ज्यादा हो जाता है। वजन कम होना, घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना और कंपकंपी आदि हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण होते हैं। इसका असर मां और बच्चे, दोनों की सेहत पर पड़ सकता है। वहीं, जब थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम होता है, तो इस स्थिति को हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है। थकान, वजन बढ़ना, कब्ज, स्ट्रेस और बालों का झड़ना इसके आम लक्षण होते हैं। इस स्थिति में बच्चे का विकास धीमा हो सकता है।

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थायराइड बढ़ने पर क्या करें?

प्रेग्नेंसी के दौरान थायराइड बढ़ने पर आपको समय-समय पर डॉक्टर से फॉलो-अप लेना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार TSH, T3 और T4 की जांच जरूर कराएं। अगर आपकी थायराइड की दवा चल रही है, तो नियमित रूप से दवा का सेवन करें। हर तिमाही में थायराइड के स्तर की जांच करवाएं। साथ ही, आयोडन युक्त नमक का सेवन जरूर करें। थायराइड में आयोडीन बेहद जरूरी होता है। साथ ही, तनाव कम करें और हेल्दी डाइट फॉलो करें। आपको 7-8 घंटे की पूरी नींद लेना भी जरूरी होता है।  Also Read - World Thyroid Day: थायराइड गर्भपात का कारण बन सकता है? जानें प्रेग्नेंसी में इसके कारण होने वाली 6 समस्याएं