हाइपर डायबिटीज वालों में ज्यादा दिख रहे हैं ब्‍लैक फंगस के मामले, जानिए इससे बचाव के तरीके

कोरोना संक्रमित या कोरोना से ठीक हुए मरीजों में ब्‍लैक फंगस (Black Fungus infections in Corona Patient) की समस्‍या दिख रही है। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो ये जानलेवा हो सकती है। आइए जानते हैं ब्‍लैक फंगस के कारण, लक्षण, बचाव और इलाज (Know the causes, symptoms, prevention and treatment of black fungus in hindi)

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कोरोना मरीजों में दिख रहे हैं ब्‍लैक फंगस के मामले (Black Fungus Infections In Corona Patient In Hindi)

समय के साथ-साथ कोरोना के लक्षणों और इसके प्रभाव में बदलाव आ रहा है। कोरोना की दूसरी लहर के लक्षण जहां पहली लहर से एकदम अलग हैं, वहीं अब कोरोना मरीजों में एक नया और खतरनाक लक्षण देखा गया है। दिल्‍ली और देशभर से कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें कोरोना मरीजों में ब्‍लैक फंगस की समस्‍या देखी जा रही है। ब्‍लैक फंगस को म्यूकॉरमाइकोसिस (Mucormycosis) भी कहते हैं। कुछ कोरोना मरीजों में संक्रमण के दौरान ही ब्‍लैक फंगस दिख रहा है तो कुछ मरीजों में संक्रमण सही होने के बाद इसके लक्षण दिख रहे हैं। पिछले साल दिसंबर में भी ऐसे मामले आए थे जिनमें कोरोना मरीजों में ब्‍लैक फंगस की समस्‍या देखी गई थी। नीति आयोग के सदस्‍य वी के पॉल (Niti Aayog Member (Health) V K Paul) का कहना है कि फंगल इंफेक्‍शन की समस्‍या उन लोगों ज्‍यादा दिख रही है जो डायबिटिक (Black Fungus Infections in Diabetic Patient in hindi) हैं। हालांकि उन्‍होंने ये भी कहा कि ये गंभीर स्थिति नहीं है। वीके पॉल ने ये भी कहा कि केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय इस स्थिति पर नजर रखे हुए है और म्यूकॉरमाइकोसिस का इलाज भी उपलब्‍ध है।

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डायबिटीज रोगियों हो रही है ब्‍लैक फंगस की समस्‍या (Black Fungus Infections In Diabetes Patient In Hindi)

बता दें कि वी के पॉल का ये बयान तब आया जब दिल्‍ली के प्राइवेट अस्‍पताल सर गंगा राम ने इस बात का ऐलान किया कि कोरोना मरीजों में म्यूकॉरमाइकोसिस या ब्‍लैक फंगस दिख रहा है। अस्‍पताल के वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मनीष मुंजाल ने कहा कि पिछले 6 दिनों में अस्पताल में कोरोना मरीजों में म्यूकॉरमाइकोसिस (Mucormycosis) के कुल 6 मामले सामने आए हैं। पॉल ने ये भी कहा कि जो लोग डायबिटीज के शिकार नहीं है उनमें ब्‍लैक फंगस की संभावना कम है। हालांकि ये एक गंभीर चीज है और विभाग इस पर पैनी नजर रखे हुए है।

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कितना खतरनाक है ब्‍लैक फंगस (How Dangerous Is Black Fungus In Hindi)

डॉक्‍टर्स का कहना है कि ब्‍लैक फंगस कोई नई बीमारी नहीं है। अगर मरीज ने ब्‍लैक फंगस के लक्षण दिखने के बाद इलाज में देर की तो ये खतरनाक हो सकता है। पहले ये फंगस नाक के जरिए जबड़े में पहुंचता है और फिर दिमाग में जाता है। इस स्थिति में जबड़े और नाक की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। ये इंफेक्‍शन कान और गले को भी नुकसान पहुंचाता है। अगर दिमाग में ब्‍लैक फंगस चला गया तो व्‍यक्ति की मौत हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि कोविड-19 रोगियों के उपचार में स्टेरॉयड (स्टेरॉयड दवाएं) का ज्‍यादा उपयोग भी ब्‍लैक फंगस का एक कारण हो सकता है।

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क्‍या हैं ब्‍लैक फंगस के लक्षण और किसे है ज्‍यादा खतरा (What Are The Symptoms Of Black Fungus And Who Is More At Risk In Hindi)

जब शरीर में ब्‍लैक फंगस की शुरुआत होती है तो सिर में दर्द, नाक में सूखापन महसूस होना, नाक बंद होना, आंखों में सूजन या लालपन आना और होठों का सुन्‍न हो जाना जैसे लक्षण दिखते हैं। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के अनुसार मधुमेह के रोगियों को इसका ज्‍यादा खतरा है। लेकिन जिन लोगों की इम्‍युनिटी कमजोर है उन्‍हें भी म्यूकॉरमाइकोसिस (Mucormycosis in hindi) हो सकता है। जो लोग कोरोना से ठीक हो रहे हैं उनमें 2 से 3 दिन बाद ब्‍लैक फंगस के लक्षण दिख रहे हैं। अगर आपको भी अपने अंदर ब्‍लैक फंगस की शुरुआत दिखे तो बिना देर किए तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

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शरीर में कैसे घुसता है ब्‍लैक फंगस और क्‍या है इसका इलाज (How Black Fungus Enters The Body And What Is Its Treatment In Hindi)

ब्‍लैक फंगस हवा में होता है और ये आपकी नाक के द्वारा गले में जाता है। फिर ये बलगम के साथ मिलकर पहले स्किन पर अटैक करता है और फिर ये बहुत तेजी से शरीर के अन्‍य अंगों को नुकसान पहुंचाती है। ब्‍लैक फंगस के मरीज को डॉक्‍टर हाई डोज वाली एंटी-फंगस दवाएं दे सकते हैं। हालांकि इस बात की गारंटी नहीं होती है कि दवा देने से ये फंगस सही हो जाएगा, लेकिन संभावना काफी अधिक होती है। इसके अलावा डॉक्‍टर मरीजा को एंटीफंगल थेरेपी भी देते हैं।

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ब्‍लैक फंगस से बचने के लिए क्‍या करें (Prevention Of Black Fungus In Hindi)

अगर आप सावधानी बरतें तो ब्‍लैक फंगस से बच सकते हैं। इसके लिए बाहर निकलने से पहले अच्‍छी तरह मास्‍क पहनें, धूल-मिट्टी से एकदम दूर रहें, लोगों से न मिलें, बेवजह ट्रेवलिंग से बचें, अगर कहीं पानी वाली जगह पर जा रहे हैं तो दस्‍तानें पहलें और पैरों में वॉटरप्रूफ जूते पहनें, शरीर के किसी भी अंग को गीला न रहने दें, नहाने के बाद शरीर को अच्‍छी तरह पोंछें और अगर शरीर में कहीं पर चोट लगती है तो तुरंत डॉक्‍टर की सलाह पर उपचार करें। अगर आप कोरोना संक्रमित हैं या हाल ही में रिकवर हुए हैं तो अपने शरीर पर बारीकी से नजर रखें। अगर आपको ऊपर बताए गए ब्‍लैक फंगस के कोई भी लक्षण महसूस हो तो शुरुआत में ही डॉक्‍टर से ऑनलाइन कन्‍सल्‍ट करें। अगर डॉक्‍टर आपको अस्‍पताल बुलाए तो कोरोना प्रोटोकॉल को फॉलो करते हुए जाएं।

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गुजरात में ब्‍लैक फंगस वाले मरीजों की निकाली पड़ी आंखें (Black Fungus Affecting The Eyes And Brain In Hindi)

गुजरात से 8 ऐसे केस सामने आए हैं जिनमें कोरोना मरीजों को ब्‍लैक फंगस हुआ और फिर उनकी आंखों की रोशनी चली गई। गुजरात के सूरत शहर से मयूकोरमाइकोसिस के 40 ऐसे मामले सामने हैं जिनमें से 8 लोग अंधे हो गए। हालांकि डॉक्‍टर्स और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की ओर से आए बयान में भी कहा गया है कि ब्‍लैक फंगस का इलाज है लेकिन हां, अगर इलाज में देरी हो गई तो दिक्‍कत बढ़ सकती है। कई कोरोना मरीज ऐसे भी हैं जिनमें सही होने के बाद ब्‍लैक फंगस के मामले दिख रहे हैं। मुंबई से ऐसा ही एक केस सामने आया है जिसमें 29 वर्षीय कोरोना मरीज को ठीक होने के बाद ब्‍लैक फंगस की समस्‍या हुई। इस संक्रमण से दिमाग को बचाने के लिए डॉक्‍टर को मरीज के ऊपरी जबड़े को निकालना पड़ा।