जुड़-शीतल: ठंडक, परंपरा और अपनापन का त्योहार
मिथिला की मिट्टी में सिर्फ फसलें ही नहीं उगतीं, यहां भावनाएं भी पनपती हैं। इन्हीं भावनाओं से जुड़ा एक बेहद खास पर्व है जुड़-शीतल। यह त्योहार हर साल वैशाख महीने की शुरुआत में मनाया जाता है और इसे मैथिली नववर्ष का दूसरा दिन भी माना जाता है। जुड़ का अर्थ है ठंडक और शीतल यानी शांति यानी ऐसा दिन जो जीवन में सुकून और ताजगी लेकर आए। मैं खुद एक मैथिली परिवार से आती हूं। जब छोटे थे, तब मां जुड़ - शीतल के दिन सुबह उठते ही मां सिर पर लौटे से थोड़ा पीना डाला करती थीं और कहती थी- 'जुड़ैल रह'। इसके बाद दाल भर कर पूड़ी, बड़ी (एक प्रकार की बेसन की सब्जी), कच्चे आम और सत्तू खाने को मिलता था। अपनी परंपरा से एक कदम और जुड़ते हुए मैं आपको बताने जा रही हूं, क्या है मिथिला का नववर्ष जुड़- शीतल।
