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भारत में बढ़ रहा है कुपोषण, मिलकर करें मुकाबला

देश के बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए जरूरी है बाल कुपोषण का खात्‍मा।

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Written By: Yogita Yadav | Published : August 13, 2018, 3:16 PM

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भारत में पांच वर्ष से कम आयु के 21 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। देश में बाल कुपोषण 1998-2002 के बीच 17.1 प्रतिशत था, जो 2012-16 के बीच बढ़कर 21 प्रतिशत हो गया।

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीआई) 2017 में शामिल जिबूती, श्रीलंका और दक्षिण सूडान ऐसे देश हैं, जहां बाल कुपोषण का आंकड़ा 20 प्रतिशत से अधिक है। इस सूचकांक के चार प्रमुख मानकों में से कुपोषण भी एक है। Also Read - क्या वाकई Ozempic वजन और शुगर कम करने की सही दवा है? जानें कैसे करती है यह शरीर पर काम

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क्या है कुपोषण : कुपोषण का मतलब है कि ऐसे बच्चे अपनी लंबाई के अनुपात में हल्के होते हैं। एक स्वस्थ बच्चे का वजन हर साल आम तौर पर दो-तीन किलोग्राम बढ़ना चाहिए।

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कुपोषण के लक्षण : शरीर में वसा की कमी, सांस लेने में कठिनाई, शरीर का कम तापमान, कमजोर प्रतिरक्षा, ठंड लगना, सेंसिटिव त्वचा, घाव भरने में अधिक समय लगना, मांसपेशियों में कमजोरी, थकान और चिड़चिड़ापन कुपोषण के लक्षण हैं।  Also Read - कैसे पेनकिलर दवाएं आपकी हड्डियों को अंदर ही अंदर डैमेज कर देती हैं, हड्डियों के एक्सपर्ट से जानें

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Food-nutrion

खानपान का रखें ध्यान : कुपोषण से बचने के लिए रोटी, चावल, आलू और अन्य स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थों, दूध और डेयरी खाद्य पदार्थ, फलों और सब्जियों का अधिक सेवन किया जाना चाहिए।