क्या रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल करने से बढ़ता है डायबिटीज का खतरा?

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How Refined Oils May Increase Diabetes Risk : भारत में खानपान के कारण डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल करने से डायबिटीज का खतरा बढ़ता है?

Written by Ashu Kumar Das | Published : November 14, 2025 8:04 AM IST

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क्या रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल करने से बढ़ता है डायबिटीज का खतरा?

भारत में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आईसीएमआर की रिपोर्ट बताती है कि 2019 तक भारत में 7 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से ग्रस्त थे। 2040 में ये आंकड़ा 10 करोड़ से भी ज्यादा पहुंच जाएगा। हमारे देश में आज भी जब डायबिटीज की बात आती है, तो आम लोग मिठाई को इसका सबसे बड़ा कारण मानते है। लेकिन इसका कारण सिर्फ मीठा भोजन नहीं है, बल्कि हमारी जीवनशैली, भोजन-पान और खाने में इस्तेमाल होने वाले तेल भी अहम भूमिका निभा रहा है। पारंपरिक तौर पर भारत में सरसों के तेल में खाना पकाया जाता था। लेकिन अब हम रिफाइंड ऑयल में खाना पकाते है। ऐसे में ये सवाल उठना लाजमी है कि क्या रिफाइंड ऑयल डायबिटीज का कारण बन सकता (Kya Refined Oil Diabetes ka Karan banta hai) है?

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14 नवंबर को मनाया जा रहा है वर्ल्ड डायबिटीज डे

आज 14 नवंबर के दिन वैश्विक स्तर पर वर्ल्ड डायबिटीज डे (World Diabetes Day 2025) मनाया जा रहा है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को डायबिटीज जैसी लाइलाज बीमारी के प्रति जागरूक करना है। इस खास मौके पर हम आपको बताने जा रहे है रिफाइंड ऑयल डायबिटीज का कारण बनता है या नही। Also Read - 90% स्टूडेंट्स सिविल एग्जाम के दौरान करते हैं ये 3 बड़ी गलतियां, इसलिए बढ़ता है एग्जाम स्ट्रेस

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क्या है रिफाइंड ऑयल?

रिफाइंड तेल का आसान भाषा मे अर्थ है, वह तेल जिसे बीज, फल या अन्य स्रोतों से निकालने के बाद कई प्रक्रियाओं में डियोडलाइजिंग, डब्लिंग, रंग, गंध हटाने और हाई टेम्परेचर पर शुद्ध किया जाता है। उदाहरण के लिए, सूरजमुखी तेल, सोयाबीन तेल, कॉर्न तेल बाजार मे मिलते है। नई दिल्ली स्थित यथार्थ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन के सीनियर डायरेक्टर एवं एचओडी डॉ. राजीव गुप्ता के अनुसार, पिछले कुछ सालो मे भारत मे रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल हेल्दी ऑप्शन के रूप मे किया जा रहा है। लेकिन रिफाइंड ऑयल डायबिटीज का कारण बनेगा या नही ये कई कारको पर निर्भर करता है।

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इन्फ्लेमेशन

डॉक्टर बताते है कि रिफाइंड ऑयल को अगर बार-बार गर्म करके खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे ऑक्सीड्ड फ्री रेडिकल्स होते है, जो कोशिकाओं में सूजन बढ़ाते हैं। लंबे समय तक सूजन की स्थिति इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance) के लिए उपयुक्त माहौल तैयार करती है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है।  Also Read - स्प्राउट्स खाने का सही तरीका क्या है? जिससे मिलेगा सेहत को पूरा लाभ

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ट्रांस फैट

बाजार में मिलने वाले रिफाइंड ऑयल में कभी-कभी ट्रांस फैट की मात्रा ज्यादा होती है। ट्रांस फैट युक्त ऑयल को अगर बार-बार गर्म किया जाता है और इसमें खाना पकाया जाता है, तो ये शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ाता है। ट्रांस फैट इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाकर टाइप-2 डायबिटीज को जन्म दे सकता है।

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ओमेगा-6 फैटी एसिड

अक्सर रिफाइंड तेलों में ओमेगा-6 फैटी एसिड की मात्रा बहुत अधिक होती है, जबकि ओमेगा-3 की कमी हो सकती है। ऐसे असंतुलन को सूजन व मेटाबॉलिक बीमारियों को जोड़कर देखा गया है। डॉ. राजीव गुप्ता बताते है कि भारत में ज्यादातर लोग रिफाइंड ऑयल को बार-बार गर्म करके खाते है। इससे शरीर में अतिरिक्त कैलोरी आती है और पोषण बहुत ही कम मात्रा में मिलता है। हाई कैलोरी फूड मोटापे देता है और मोटापे को सीधे डायबिटीज से जोड़कर देखा जाता है।  Also Read - TB के लक्षण समझने में क्यों हो जाती है चूक? डॉक्टर ने बताया किन संकेतों को नजरअंदाज करना है घातक

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रिफाइंड ऑयल का विकल्प क्या है?

हमारे साथ खास बातचीत के दौरान इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर बताते है कि भारत में पारंपरिक तौर पर सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता था और आज भी सरसों के तेल का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेहतर है। अगर आप सरसों के तेल का चयन नहीं करना चहते हैं तो कोल्ड प्रेसेस्ड ऑयल या वर्जिन ऑयल का चुनाव कर सकते है। तेल के कारण डायबिटीज जैसी बीमारी न हो, इसके लिए एक बड़े चम्मच से अधिक तेल लगातार उपयोग करने से बचें।