बचपन से ही बच्चों की नाक में जा रहा प्रदूषण, नहीं बढ़ रहे फेफड़े, जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

Verified VERIFIED By: Dr Navneet Sood

Air Pollution And Kids Lungs: हवा में जहर की तरह घुलता प्रदूषण, बच्चों के लंग्स की ग्रोथ रोक रहा है। साथ ही फेफड़ों को अनहेल्दी भी बना रहा है। लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है? आइए विस्तार से जानते हैं।

Written by Vidya Sharma | Published : January 6, 2026 1:59 PM IST

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प्रदूषण से प्रभावित बच्चों के फेफड़े

बचपन वह समय होता है जब शरीर के सभी अंग तेजी से विकसित होते हैं। इसी दौरान हमारे फेफड़े भी बढ़ते और मजबूत होते हैं। लेकिन आज जिस तरह पॉल्यूशन चरम सीमा से भी ज्यादा बढ़ गया है कि हर उम्र के लोगों के लिए जानलेवा बन गया है। ऐसे में छोटे बच्चे या हाल में पैदा हुए बच्चे के लिए यह बहुत ही ज्यादा नुकसानदेह है। क्योंकि प्रदूषण बचपन से ही सांस के जरिए फेफड़ों तक जाकर, उनके विकास को रोक रहा है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर नवनीत का कहना है। उन्होंने बताया कि अगर इसी तरह नाजुक उम्र में बच्चा लगातार प्रदूषित हवा में सांस लेता रहा है, तो इसका असर केवल उस समय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह फेफड़ों की ग्रोथ और हेल्थ को पूरी तरह से प्रभावित कर सकता है।

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बचपन में फेफड़ों का विकास क्यों है सबसे अहम?

फेफड़ों का विकास गर्भावस्था से शुरू होकर लगभग 18–20 साल की उम्र तक चलता है। बचपन और किशोरावस्था के दौरान फेफड़ों की क्षमता, एयरवे का आकार और ऑक्सीजन लेने की ताकत तय होती है। अगर इस दौरान फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है, तो आगे चलकर वे पूरी तरह से रिकवर नहीं कर पाते। Also Read - फिर तेजी से बढ़ा दिल्ली का पॉल्यूशन, हवा में मौजूद धूल-मिट्टी से बचने के लिए डॉक्टर ने दी सलाह

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प्रदूषण फेफड़ों को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

आज के समय में हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5 और PM10), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और ओजोन जैसे प्रदूषक बच्चों के फेफड़ों में गहराई तक पहुँच जाते हैं। बच्चों की सांस लेने की दर अधिक होती है और उनका इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता, जिससे प्रदूषण का असर उन पर ज्यादा होता है। ये प्रदूषक फेफड़ों की नलियों में सूजन पैदा करते हैं, जिससे एयरवे संकरी हो जाती हैं। लंबे समय तक यह सूजन बनी रहने से फेफड़ों की कोशिकाओं का सही विकास नहीं हो पाता और फेफड़ों की कुल क्षमता कम रह जाती है।

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क्या असर हमेशा के लिए रहता है?

कई शोध बताते हैं कि जिन बच्चों ने अपने शुरुआती वर्षों में ज्यादा प्रदूषण झेला होता है, उनमें बड़े होकर भी फेफड़ों की कार्यक्षमता सामान्य से कम पाई जाती है। इसका मतलब है कि भले ही वे आगे चलकर साफ वातावरण में रहें, फिर भी उनका फेफड़ों का विकास पूरी तरह से ‘कैच-अप’ नहीं कर पाता। ऐसे बच्चों में आगे चलकर अस्थमा, बार-बार सांस फूलना, खांसी, ब्रोंकाइटिस और यहां तक कि कम उम्र में क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) का खतरा भी बढ़ जाता है। Also Read - शहर की हवा बन रही है बालों की दुश्मन! 70% भारतीयों में हेयर फॉल का कारण बना एयर पॉल्यूशन

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सर्दियों में खतरा क्यों बढ़ जाता है?

भारत में खासतौर पर सर्दियों के मौसम में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। कोहरा, पराली का धुआं और वाहनों से निकलने वाला धुआं हवा में लंबे समय तक बना रहता है। इस दौरान बच्चे जब स्कूल जाते हैं, बाहर खेलते हैं या खुले में रहते हैं, तो उनके फेफड़ों पर प्रदूषण का असर और गहरा हो जाता है।

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माता-पिता क्या कर सकते हैं?

हालांकि प्रदूषण पूरी तरह से हमारे नियंत्रण में नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां बच्चों के फेफड़ों को बचाने में मदद कर सकती हैं। जब प्रदूषण का स्तर ज्यादा हो, तो बच्चों को बाहर खेलने से बचाएं। घर के अंदर साफ हवा बनाए रखने की कोशिश करें, धूम्रपान बिल्कुल न करें और बच्चों को सेकेंड-हैंड स्मोक से दूर रखें। इसके अलावा, बच्चों को पौष्टिक आहार दें, जिससे उनकी इम्यूनिटी मजबूत रहे। अगर बच्चे को बार-बार खांसी, सांस फूलने या सीटी जैसी आवाज के साथ सांस लेने की शिकायत हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से सलाह जरूर लें। Also Read - अलग-अलग अंगों के डॉक्टर से जानें शरीर पर प्रदूषण का असर, इंसान को कैसे बनाता है बीमार

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डॉक्टर ने आखिर में क्या कहा?

बचपन में प्रदूषण का असर केवल अस्थायी समस्या नहीं है। यह बच्चों के फेफड़ों की बढ़त को स्थायी रूप से सीमित कर सकता है, जिसका असर पूरी जिंदगी दिखाई देता है। इसलिए जरूरी है कि हम बच्चों को स्वच्छ हवा देने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर कदम उठाएं, क्योंकि स्वस्थ फेफड़े ही स्वस्थ भविष्य की नींव हैं। Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।