World Heart Day 2021: भारतीयों में बहुत ही कॉमन हैं ये 5 हृदय रोग, जो बनते हैं मौत का कारण; विस्तार से जानिए

डॉ. तिलक सुवर्णा, (सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट-मुंबई) के अनुसार, भारत में होने वाली मौतों में हृदय से जुड़ी बीमारियां सबसे प्रमुख कारण हैं, और प्रत्‍येक मौतों का लगभग 30% मौतों का कारण हृदय रोग ही है। भारत में सामान्य तौर पर पाई जाने वाली पांच हृदय की बीमारियां इस प्रकार हैं:

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Written By: Atul Modi | Published : September 28, 2021, 1:37 PM

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भारतीयों में सामान्य तौर पर पाए जाने वाले 5 ह्रदय रोग

हृदय रोग दुनिया भर में होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्येक वर्ष एक करोड़ 79 लाख लोग सिर्फ हृदय रोग से मर जाते हैं। यह आंकड़े हम आपको डराने के लिए नहीं बता रहे हैं बल्कि हमारा उद्देश्य आपको जागरूक करना है। विश्व हृदय दिवस के मौके पर हमने हृदय रोगों के प्रति जागरूक करने के लिए एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर तिलक सुवर्णा से बात की। डॉक्टर तिलक ने कहा कि हृदय से जुड़ी तमाम तरह की बीमारियां हैं, मगर दिल से जुड़े पांच ऐसे प्रमुख रोग हैं जो भारतीयों में बहुत ही आम है। जानिए उन रोगों के बारे में विस्तार से...

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1. इस्केमिक या कोरोनरी हृदय रोग - Ischemic Or Coronary Heart Disease

इसमें शामिल है हार्ट अटैक (दिल का दौरा) या एन्जाइना (कण्ठ-शूल) जो हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज के तैयार होने के कारण होता है। इसके लिए सामान्य जोखिम के कारक होते हैं धूम्रपान करना, डायबिटीज़ मेलिटस, हाइपरटेंशन (रक्तचाप), उच्च कोलेस्ट्रोल, मोटापा, निष्क्रीय जीवनशैली इत्यादि। इसके लक्षणों में शामिल है छाती में दर्द, साँस लेने में परेशानी, पसीना आना। हार्ट अटैक से खुद को सुरक्षित रखना बहुत महत्वपूर्ण है और स्वस्थ्य जीवनशैली की आदतों को अपनाकर ऐसा किया जा सकता है जैसे नियमित शारीरिक गतिविधि करना, हृदय के लिए सेहतमंद आहार का सेवन, शरीर का इष्टतम वज़न बनाए रखना, तनाव से निपटना और ऊपर उल्लिखित जोखिम कारकों को नियंत्रित करना।  Also Read - आंखों को खराब कर सकती है हीटवेव, बचाव करने के लिए अपनाएं ये 5 घरेलू उपाय

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2. रुमैटिक हृदय रोग - Rheumatic Heart Disease

इसमें शामिल है वॉल्वूलर (कपाटिकीय) हृदय रोग या हृदय वॉल्व (कपाटिका) को हुई क्षति से होने वाला वॉल्व स्टेनोसिस या संकीर्णता और वॉल्व रिसाव। इसका कारण है बचपन में होने वाला रुमैटिक या गले का बैक्टीरियल इन्फेक्शन जो आगे जाकर हृदय वाल्व को प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में शामिल है साँस फूलना, थकान, पाल्पिटेशन या चक्कर आना। गले के इन्फेक्शन का समय से उपचार कर और रुमैटिक (आमवात) बुखार के बाद पेनिसिलिन इंजेक्शन लेकर इस रोग से खुद को बचाया जा सकता है।

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3. हाइपरटेंसिव (अतिरक्तदाबी) हृदय रोग - Hypertensive Heart Disease

लंबे समय तक होने वाले हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) से हृदय की मांसपेशी मोटी होने लगती हैं जिससे कभी कभी हृदय और हृदय पंपिंग का कार्य कमज़ोर हो सकता है और अंत में हार्ट फेल्योर के लक्षण और चिन्ह सामने आते हैं। इसके साथ ही हाइपरटेंशन एट्रियल फिब्रिलेशन (अलिंद तंतु विकंपन) का एक महत्वपूर्ण कारक है जो हृदय का एक असामान्य आवर्तन है और इसके परिणाम स्वरुप हार्ट फैल्योर और ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्क आघात) हो सकता है। हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप को “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है क्योंकि अक्सर यह किसी भी लक्षणों के साथ जुड़ा नहीं होता। नियमित व्यायाम, कम नमक वाले आहार का सेवन और वज़न ज़्यादा हो तो वज़न कम करना जैसे जीवनशैली में उचित बदलाव के द्वारा कड़ाई से नियंत्रण के द्वारा और इसके साथ ही एंटी-हाइपरटेंसिव (प्रति अतिरक्तदाबी) दवाइयां लेकर हाइपरटेंसिव ह्रदय रोग से बचा जा सकता है। Also Read - गर्मी में पानी पीने का सही तरीका क्या है? जानें कितना, कब और कैसे पीना चाहिए पानी

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4. डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी - Dilated Cardiomyopathy

यह हृदय की ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय की मांसपेशियाँ कमज़ोर हो जाती है और हृदय फैलता है जिसके परिणामस्वरुप हार्ट फैल्योर होता है। आधे से ज़्यादा मामलों में कारण का पता नहीं लग पाता। सामान्य तौर पर जो कारण ज्ञात हैं वे हैं डायबिटीज़ और वायरल संक्रमण। ज़्यादातर मरीजों में सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना, थकान और पैरों के फूलने के लक्षण दिखाई देते हैं। सख्ती के साथ डायबिटीज़ को नियंत्रण में ऱखने से इस जटिल समस्या की जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

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5. जन्मजात ह्रदय रोग - Congenital Heart Disease

इसका मलतब है, जन्म से ही हृदय में संरचनात्मक दोष जो विकास की असंगति के कारण होता है। इसमें शामिल है हृदय में छेद जिसके कारण खून का असामान्य रुप से राह बदलना, वॉल्वूलर स्टेनोसिस या स्त्राव और हृदय के चेंबर में असामान्य कनेक्शन। इसके सामान्य लक्षण हैं- होंठों का नीला पड़ना, सांस लेने में परेशानी, पाल्पिटेशन इत्यादि। इनमें से ज़्यादातर मरीज़ों में यदि इन बीमारियों की जल्दी पहचान और उपचार किया जाए तो वे लगभग सामान्य अवस्था में लौट सकते हैं।  Also Read - थायराइड की रिपोर्ट कैसे पढ़ें? जानिए T1, T2, T3 और T4 का मतलब बता रहे हैं डॉक्टर

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