English हिन्दी
Advertisement

बारिश में गीले जूते पहनने से पैरों में कौन-कौन से इंफेक्शन हो सकते हैं?

अगर आप लंबे समय तक गीले जूते पहनते हैं, तो इससे पैरों में कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। इन परेशानियों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं गीले जूते पहनने से कौन-कौन से इंफेक्शन होने का खतरा रहता है?

Written By Anju Rawat
Published : July 12, 2026 9:37 AM IST

गीले जूते पहनने से कौन-कौन से इंफेक्शन हो सकते हैं?

ऑफिस या फिर स्कूल जाने वाले लोगों कों मानसून के दौरान कई घंटों तक गीले जूते या मोजे पहनकर रहना पड़ता है। हालांकि यह एक सामान्य बात लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक नमी में रहने से पैरों में बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपने लगते हैं। यही कारण है कि बारिश के दिनों में पैरों से जुड़ी समस्याएं और इंफेक्शन बढ़ जाते हैं। अगर समय रहते इन पर ध्यान न दिया जाए, तो स्थिति गंभीर भी हो सकती है। आइए PSRI Hospital के कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. भवुक धीर से जानते हैं गीले जूते पहनने से होने वाले इंफेक्शन कौन-कौन से हैं?

1. एथलीट्स फुट

मानसून में एथलीट्स फुट की परेशानी होना काफी आम है। यह एक फंगल इंफेक्शन है, जो पैरों की उंगलियों के बीच शुरू होता है। लंबे समय तक गीले जूते और मोजे पहनने से फंगस को बढ़ने के लिए आदर्श वातावरण मिल जाता है। इस स्थिति में उंगलियों के बीच खुजली, त्वचा का छिलना, जलन या लालपन और दुर्गंध आनाे जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। अगर इलाज न किया जाए तो यह संक्रमण पैर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है।

2. नाखूनों का फंगल इंफेक्शन

गीले जूतों में लगातार रहने से नाखूनों में भी फंगस लग सकता है। यह समस्या धीरे-धीरे विकसित होती है और कई बार लोगों को शुरुआत में इसका पता भी नहीं चलता है। नाखूनों मे फंगल इंफेक्शन होने की स्थिति में नाखून का पीला या भूरा पड़ना, नाखून मोटा होना, नाखून का टूटना या बिखरना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह संक्रमण ठीक होने में कई महीनों का समय ले सकता है।

Advertisement

3. बैक्टीरियल स्किन इंफेक्शन

बारिश के गंदे पानी में मौजूद बैक्टीरिया स्किन में मौजूद छोटे कट या दरारों के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इससे स्किन में इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। बैक्टीरियन स्किन इंफेक्शन होने की स्थिति में स्किन पर सूजन, लालिमा, दर्द और स्किन से पस निकलना जैसे संकेत दिखाई देते हैं। मुख्य रूप से डायबिटीज के मरीजों में यह जोखिम और अधिक हो सकता है।

4. फुट अल्सर और त्वचा गलना

लगातार नमी के संपर्क में रहने से पैरों की त्वचा नरम होकर गलने लगती है। इससे त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा कमजोर हो जाती है और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में स्किन का सफेद और मुलायम होना, घाव के आसपास दर्द होना, घाव या अल्सर बनना और चलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह समस्या विशेष रूप से उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है, जो लंबे समय तक पानी में काम करते हैं।

5. पैरों में दुर्गंध और फंगल रैशेज

गीले जूते और मोजों में पसीना और नमी जमा होने से बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। इससे पैरों में बदबू के साथ-साथ लाल चकत्ते और रैशेज भी हो सकते हैं। इस स्थिति में पैरों से तेज दुर्गंध, खुजली, लाल चकत्ते और स्किन में जलन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि, यह समस्या शुरुआत में मामूली लग सकती है, लेकिन नजरअंदाज करने पर संक्रमण बढ़ सकता है।

Disclaimer

बारिश में गीले जूते पहनना सिर्फ असुविधाजनक नहीं, बल्कि पैरों के लिए कई तरह के फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन का कारण भी बन सकता है। इसलिए मानसून में पैरों की स्वच्छता और सूखापन बनाए रखना बहुत ही जरूरी है, ताकि इंफेक्शन से बचा जा सके।