बच्चेदानी में कैंसर के लक्षण (Symptoms Of Uterus Cancer)
गर्भाशय का कैंसर है, जो गर्भाशय की भीतरी परत (एंडोमेट्रियम) में शुरू होता है। यह 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में पाया जाता है। वहीं दूसरा प्रकार है, यूटराइन सार्कोमा। यह गर्भाशय की मांसपेशियों या अन्य सहायक ऊतकों में उत्पन्न होता है, जो कि काफी दुर्लभ है। वैसे तो बच्चेदानी के कैंसर का सटीक कारण पूरी तरह से ज्ञात नहीं है, लेकिन कुछ कारक इसके जोखिम को बढ़ाते हैं, जैसे- अधिक उम्र, क्योंकि ज्यादातर मामलों में यह कैंसर 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में होता है। तो हार्मोनल असंतुलन, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का असंतुलन एंडोमेट्रियम की कोशिकाओं के अत्यधिक विकास का कारण बन सकता है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। वहीं अत्यधिक वजन होने पर शरीर में अतिरिक्त एस्ट्रोजन का उत्पादन होता है, जो गर्भाशय कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। इसके अलावा यदि परिवार में किसी को गर्भाशय या कोलन कैंसर रहा हो, तो इसका जोखिम बढ़ सकता है। वैसे तो बच्चेदानी (गर्भाशय) में कैंसर के लक्षण अक्सर शुरुआती चरणों में हल्के होते हैं, जिस कारण महिलाएं इन्हें अनदेखा कर देती हैं। लेकिन समय पर पहचान और उपचार से इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। इसलिए आज हम आपको इस आर्टिकल में गर्भाशय का कैंसर के पांच प्रमुख लक्षण बताने जा रहे हैं, जिन्हें महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं।
