दिल्ली- NCR में अभी से बढ़ने लगा Air Pollution, जहरीली हवा से है इन 5 बीमारियों का खतरा

Verified Medically Reviewed By: Dr. Manisha Mendiratta

Diseases Caused by Air Pollution: दिल्ली की जहरीली हवा में सांस लेने से लोगों में कई बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। आइए डॉक्टर से जानते हैं इसके बारे में।

Written by Ashu Kumar Das | Published : October 17, 2025 8:02 AM IST

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वायु प्रदूषण के कारण कौन सी बीमारियां होती हैं?

फरीदाबाद के सेक्टर 8 स्थित सर्वोदय अस्पताल के पल्मोनोलॉजी विभाग के एसोसिएट निदेशक एवं प्रमुख डॉ. मनीषा मेंदीरत्ता (Dr. Manisha Mendiratta, Associate Director & Head - Pulmonology, Sarvodaya Hospital, Sector-8, Faridabad) के अनुसार, प्रदूषित हवा में सांस लेने से सिर्फ फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर प्रभाव नहीं पड़ता है बल्कि ये पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को बिगाड़ सकता है। वायु प्रदूषण के कारण कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं, जो हमारे जीवन को भी खतरे में डाल सकती हैं।

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अस्थमा

वायु प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों में अस्थमा सबसे आम है। डॉ. मनीषा मेंदीरत्ता बताते हैं कि वायु प्रदूषण में मौजूद धूल, धुआं और अन्य हानिकारक कण हमारे फेफड़ों में जाकर जमा हो जाते हैं और अस्थमा के हमले को बढ़ावा देते हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा है अगर वो लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहें, तो इससे उनकी हालात बिगड़ सकती है।  Also Read - बदलते मौसम में सूखी खांसी और गले की खराश को कैसे ठीक करें?

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क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD)

सीओपीडी एक प्रकार की सांस संबंधी बीमारी है, जो वायु प्रदूषण के कारण हो सकती है। इसमें फेफड़ों के वायुमार्ग में सूजन और संकुचन होता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। सीओपीडी की वजह लोगों को सीने में जकड़न और दर्द भी महसूस हो सकता है। वायु प्रदूषण के कारण होने वाले क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज की वजह से अक्सर खांसी और कफ आने की परेशानी होना आम बात है।

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फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer)

वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों के कैंसर जैसी घातक बीमारी होने का भी खतरा रहता है। वायु प्रदूषण में मौजूद हानिकारक कण हमारे फेफड़ों में जाकर जमा हो जाते हैं और कैंसर कोशिकाओं को बढ़ावा देते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट बताती है कि वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों के कैंसर का जोखिम बढ़ता जा रहा है। यह जोखिम कभी-कभी निष्क्रिय धूम्रपान के संपर्क में आने जितना ही होता है। वायु प्रदूषण में मौजूद पीएम 2.5 और अन्य जहरीले पार्टिकल्स फेफड़ों में पहुंचकर कैंसर सेल्स को बढ़ावा देते हैं।  Also Read - 40 के बाद जरूरी है ब्रेस्ट कैंसर जांच, जानिए मैमोग्राफी टेस्ट कैसे होता है और कितना खर्च आता है

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हृदय रोग (Heart Disease)

ज्यादातर लोगों को लगता है कि वायु प्रदूषण के कारण सिर्फ फेफड़ों से जुड़ी बीमारी हो सकती है। लेकिन ऐसा नहीं है। वायु प्रदूषण जितना फेफड़ों को प्रभावित कर उतना ही इसका असर दिल की सेहत के लिए भी हानिकारक होता है। वायु प्रदूषण में मौजूद हानिकारक कण श्वांस नली के जरिए हार्ट को ब्लॉक कर सकते हैं। इससे हार्ट अटैक, हार्ट स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा हवा में मौजूद बारीक कण (PM 2.5 और PM 10) दिल और दिमाग पर भी असर डालते हैं। ये ब्लड प्रेशर बढ़ा सकते हैं और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देते हैं।

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इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारी

वायु प्रदूषण के कारण इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारी भी होती है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहें, तो इससे उनकी फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है। वायु प्रदूषण में लंबे समय तक रहने से इम्यून सिस्टन कमजोर भी पड़ जाता है। इससे व्यक्ति में फ्लू, खांसी और बदलते मौसम में होने वाले संक्रमण की परेशानी देखी जाती है।  Also Read - छाती में गैस चढ़ने पर क्या करें? जाने 5 उपाय, जिनसे तुरंत मिलेगा आराम

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पाचन संबंधी समस्याएं (Digestive Problems)

वायु प्रदूषण का असर पाचन से जुड़ी बीमारियों पर भी पड़ता है। वायु प्रदूषण में मौजूद हानिकारक कण हमारे पाचन तंत्र में जाकर जमा हो जाते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं को बढ़ावा देते हैं। वायु प्रदूषण के कारण पेट में दर्द, कब्ज, एसिडिटी और एआईबीएस जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

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वायु प्रदूषण से बचने के उपाय

वायु प्रदूषण से बचने के लिए हमें कई उपाय करने होंगे। इनमें से कुछ उपाय इस प्रकार हैं: एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें- एयर प्यूरीफायर वायु प्रदूषण को कम करने में मदद करता है। मास्क पहनें- घर से बाहर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करें। मास्क पहनने से वायु प्रदूषण के हानिकारक कण हमारे शरीर में नहीं जा पाते हैं। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें: बाहर कहीं घूमने जाने, ऑफिस जाने के लिए पर्सनल कैब या गाड़ी की बजाय सार्वजनिक वाहन जैसे बस, मेट्रो और शेयरिंग कैब का इस्तेमाल करें।  Also Read - 30 की उम्र में ही घुटनों का दर्द? हड्डियों की कमजोरी नहीं है, ये 5 वजह जानकर चौंक जाएंगे आप