वर्ल्ड एड्स डे 2018 की थीम है ‘’नो योर स्टेटस’’, आपको जानना चाहिए एड्स में अपने देश का भी स्टेटस

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Written By: Yogita Yadav | Updated: November 30, 2018, 7:49 PM

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एड्स(इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम या एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंसी सिंड्रोम) एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो वायरस) की वजह से होता है, जो मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। इस रोग को पहली बार 1981 में मान्यता मिली। ये एड्स के नाम से पहली बार 27 जुलाई 1982 को जाना गया। पिछले तीस वर्ष से लगातार एड्स के संबंध में जागरुकता एवं उपचार के प्रसार के लिए एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। हर वर्ष इसके कार्यक्रमों के लिए एक थीम निश्चित की जाती है। इस वर्ष की थीम है नो योर स्टेटस (Know Your Status) । इसके तहत दुनिया भर में एचआईवी/ एड्स के टेस्ट के लिए व्यापक अभियान चलाए जा रहे हैं। हालांकि टेस्ट के नेक्सस से भी इन्कार नहीं किया जा सकता, पर आपको यह हक है कि आप इस बीमारी की भयावहता को समझने के लिए अपना और अपने देश का स्टेटस भी जानें।

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क्या है एड्स - एचआईवी एक वायरस है, यह रोग प्रतिरक्षा प्रणाली की टी-कोशिकाओं पर हमला करता है और जिसके कारण एक रोग होता है जो एड्स के रूप में जाना जाता है। यह मानव शरीर के तरल पदार्थों में पाया जाता है जैसे: संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य, योनि तरल पदार्थ, स्तन के दूध में जो दूसरों में सीधे संपर्क जैसे: रक्त आधान, ओरल सेक्स, गुदा सेक्स, योनि सेक्स या दूषित सुई का इंजेक्शन लगाने से फैलता है। यह प्रसव के दौरान या स्तनपान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं से बच्चों में भी फैल सकता है। Also Read - गर्मी में सिर पर खुजली रहती है तो ये 5 घरेलू उपाय आएंगे काम, इस तरह करें इस्तेमाल

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कैसे फैलता है - एचआईवी संक्रमण आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में प्रेषित हो जाता है। यदि उन्होंने शारीरिक द्रव या रक्त श्लेष्मा झिल्ली के माध्यम से कभी सीधे संपर्क किया है। पहले की अवधि में, एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों पर बहुत से सामाजिक कलंक (लांछन) लगाये जाते थे। अनुमान के मुताबिक, ये उल्लेख किया गया है कि, 33 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित हैं और 2 लाख लोगों का हर साल इसकी वजह से निधन हो जाता है।

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नो योर स्टेटस - विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक अध्ययन का अनुमान है कि एचआईवी पॉजिटिव हर पांच में से एक व्यक्ति अपनी स्थिति से अनजान है। ELISA टेस्ट, जो एक प्रकार का ब्लड टेस्ट है, सभी अस्पतालों में आसानी से उपलब्ध है। एचआईवी के लिए कुछ होम टेस्टिंग किट भी हैं, लेकिन याद रखें कि असुरक्षित यौन संबंध के तीन महीने के बाद तक आपकी पॉजिटिव स्थिति का पता नहीं लग सकता है। यह तीन महीने का विंडो पीरियड (संक्रमण की जद में आने की अवधि) खतरनाक है क्योंकि एचआईवी टेस्ट नेगेटिव होने के बाद भी आप इससे संक्रमित हो सकते हैं और प्रसार के वाहक भी बन सकते हैं।  Also Read - HIV और लिवर कैंसर से जूझ रहे मरीज को मिला नया जीवन, सफल हुआ लिवर ट्रांसप्लांट

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भारत की स्थिति - 2016 में भारत में 80 000 (62000 - 100000) नए एचआईवी संक्रमण और 62 000 (43 000 - 91 000) एड्स से संबंधित मौतें हुईं। 2016 में एचआईवी के साथ रहने वाले 2 100 000 (1 700 000 - 2 600 000) लोग थे, जिनमें से 49% (40% - 61%) एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी तक पहुंच रहे थे। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2017 तक करीब 1 लाख 20 हजार बच्चे और किशोर एचआईवी संक्रमण से पीड़ित हैं। ये दक्षिण एशिया के किसी देश में एचआईवी4 पीड़ितों की सबसे ज्यादा संख्या है। यूनिसेफ ने चेताया है कि अगर इसे रोकने की कोशिशें तेज नहीं की गईं तो 2030 तक हर दिन दुनियाभर में एड्स की वजह से 80 किशोरों की मौत सकती है।

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कौन हैं सर्वाधिक प्रभावित - भारत में एचआईवी से सबसे ज्यादा प्रभावित आबादी में 2.2% सेक्स0 वर्कर, 4.3% समलैंगिक पुरुष और अन्य पुरुष जो पुरुषों के साथ यौन संबंध रखते हैं, 9.9% इंफेक्टेसड इंजेक्श1न से ड्रग लेने वाले और 7.2% ट्रांसजेंडर लोग हैं। Also Read - नाक के अंदर दर्द हो तो क्या करें? जानें क्या है इसके पीछे की वजह

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ईमानदार रहें, सुरक्षित रहें – पशु एक से अधिक यौन संबंध बनाते हैं, परंतु उनमें यह वायरस नहीं पाया जाता। जबकि मनुष्योंक में यह संक्रमण का सबसे बड़ा कारण है। इसका सीधा अर्थ है कि मनुष्यी शारीरिक रूप से एक से अधिक संबंध के लिए नहीं बना है। एक से अधिक सेक्स पार्टनर हमेशा जोखिम भरा होता है। कंडोम एड्स की रोकथाम के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। बेहतर है कि अपने पार्टनर के प्रति ईमानदार रहें, सुरक्षित रहें।

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