उम्र के हिसाब से कितना होना चाहिए आपका पल्स रेट? जानिए दिल की धड़कनों का सही माप

उम्र के हिसाब से हर एक व्यक्ति का पल्स रेट अलग होता है इस लेख में हम डॉक्टर से जानेंगे, उम्र के हिसाब से पल्स रेट कितना होता है?

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Written By: Kishori Mishra | Updated: April 14, 2026, 11:12 AM

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Medically Verified By: Dr. Deepak Agrawal

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उम्र के हिसाब से कितना होना चाहिए आपका पल्स रेट?

दिल की धड़कन यानी पल्स रेट को शरीर की सेहत का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। यह वह संख्या होती है जो बताती है कि एक मिनट में दिल कितनी बार धड़कता है। सामान्य तौर पर इसे कलाई या गर्दन पर महसूस किया जाता है। उम्र के अनुसार पल्स रेट में बदलाव होना पूरी तरह सामान्य माना जाता है, लेकिन इसकी सही सीमा को समझना जरूरी रहता है। इस विषय की जानकारी के लिए हमने नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर दीपक अग्रवाल से बातचीत की है। आइए डॉक्टर से जानते हैं उम्र के हिसाब से पल्स रेट कितना होना चाहिए?

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अलग-अलग उम्र में कितना होना चाहिए पल्स रेट

नवजात शिशुओं में दिल की धड़कन सबसे तेज मानी जाती है। जन्म के समय से लेकर एक साल तक के बच्चों में पल्स रेट लगभग 100 से 160 बीट प्रति मिनट के बीच रहता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह धीरे-धीरे कम होता जाता है। 1 से 10 साल तक के बच्चों में सामान्य पल्स रेट 70 से 120 बीट प्रति मिनट के बीच रहता है। किशोरावस्था में यह और स्थिर हो जाता है और 60 से 100 बीट प्रति मिनट के बीच सामान्य माना जाता है। वयस्कों में, खासकर 18 साल से ऊपर के लोगों में, आराम की स्थिति में पल्स रेट 60 से 100 बीट प्रति मिनट के बीच सामान्य माना जाता है। जो लोग नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, उनमें यह दर 50 या उससे भी कम तक देखी जाती है, जिसे फिट हार्ट का संकेत माना जाता है। Also Read - मेनोपॉज के बाद ओवेरियन कैंसर का खतरा क्यों बढ़ जाता है? ऐसे दिखते हैं ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण

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क्यों बदलता है पल्स रेट?

पल्स रेट केवल उम्र पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि कई अन्य कारक भी इसे प्रभावित करते हैं। शारीरिक गतिविधि, मानसिक तनाव, शरीर का तापमान और हाइड्रेशन स्तर इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। जब शरीर किसी गतिविधि में शामिल होता है, जैसे दौड़ना या सीढ़ियां चढ़ना, तब दिल तेजी से धड़कता है ताकि शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन मिल सके। वहीं आराम के समय यह दर सामान्य स्तर पर आ जाती है। भावनात्मक स्थिति भी इसमें बदलाव लाती है। डर, चिंता या उत्साह की स्थिति में पल्स रेट बढ़ जाता है। इसी तरह बुखार होने पर भी दिल की धड़कन तेज हो जाती है।

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कब चिंता की बात बनता है पल्स रेट

अगर आराम की स्थिति में पल्स रेट लगातार 100 से ऊपर रहता है, तो इसे टैकीकार्डिया कहा जाता है और यह किसी समस्या का संकेत हो सकता है। वहीं 60 से नीचे का पल्स रेट ब्रैडीकार्डिया कहलाता है, जो कुछ मामलों में चिंता का कारण बन सकता है, खासकर जब इसके साथ चक्कर, कमजोरी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि, एथलीट्स में कम पल्स रेट सामान्य माना जाता है क्योंकि उनका दिल अधिक कुशलता से काम करता है। इसलिए हर कम या ज्यादा पल्स रेट को बीमारी नहीं माना जाता, बल्कि इसे व्यक्ति की स्थिति के अनुसार समझा जाता है। Also Read - अस्थमा के छुपे हुए लक्षण, जिन्हें अक्सर हम कर देते हैं नजरअंदाज

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कैसे रखें पल्स रेट को संतुलित

पल्स रेट को सामान्य बनाए रखने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी माना जाता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखते हैं। कैफीन और धूम्रपान से दूरी बनाए रखना भी जरूरी रहता है, क्योंकि ये दिल की धड़कन को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, तनाव को नियंत्रित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

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पल्स रेट की नियमित जांच क्यों जरूरी

नियमित रूप से पल्स रेट की जांच करना दिल की सेहत पर नजर रखने का आसान तरीका माना जाता है। इससे किसी भी असामान्य बदलाव को जल्दी पहचाना जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक पल्स रेट में असामान्यता महसूस होती है, तो समय रहते जांच कराना जरूरी रहता है। सही समय पर की गई पहचान कई गंभीर समस्याओं से बचाव करने में मदद करती है। पल्स रेट शरीर के अंदर चल रही प्रक्रियाओं का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। उम्र के अनुसार इसकी सामान्य सीमा को समझना और नियमित रूप से इसकी निगरानी करना दिल की सेहत को बनाए रखने में मदद करता है। सही जानकारी और सतर्कता से दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जाता है। Also Read - 'Mom To Be' के लिए एक्सपर्ट ने शेयर की ब्यूटी टिप्स, स्किन व बालों को नुकसान पहुंचे बिना मिलेगा फायदा

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