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आंखों में पानी आना (Epiphora)- कई बार आंखों में लगातार आने वाले पानी को नजरअंदाज कर दिया जाता है, ये बच्चों में मोतियाबिंद का लक्षण हो सकता है। अगर आपके बच्चे की आंखों से लगातार पानी आता है, तो आपको उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
तेज रोशनी से परेशानी (Photophobia)- अगर आपके बच्चे को तेज रोशनी यहां तक कि सूरज की रोशनी से भी परेशानी होती है, तो आपको इसका सही कारण जानने के लिए तुरंत आई स्पेशलिस्ट से मिलना चाहिए।
पलकों का संकुचन (Blepharospasm)- मोतियाबिंद से पीड़ित बच्चों को कई बार उनकी पलकों में अनैच्छिक और असामान्य संकुचन का अनुभव हो सकता है। आंख के आसपास की मांसपेशियों में संकुचन अक्सर दर्दनाक होता है। यह मोतियाबिंद का एक लक्षण है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कॉर्निया का साइज़ बढ़ना- आंखों के अंदर तरल पदार्थ का दबाव (intraocular pressure) बनने पर आंखों में सूजन आ सकती है, जिससे कॉर्निया का साइज़ बढ़ सकता है। अगर आपके बच्चे को आंखों में भारीपन महसूस होता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
आंखों के सफेद हिस्से (sclera) का नीला होना- आमतौर पर स्क्लीअर सफेद रंग का होता है लेकिन अगर ये नीला या थोड़ा भूरा नजर आता है, तो अपने बच्चे को तुरंत नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएं। ये बच्चे की आंख में मोतियाबिंद का जोखिम हो सकता है।