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Autism Spectrum Disorder: जब बच्चे में दिखे ये लक्षण, तो उसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं

जो बच्चे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं, उनमें कुछ भी सीखने-समझने की समस्या देखी जा सकती है।

Written By Editorial Team
Updated : April 2, 2019 12:14 PM IST

Autism

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) तंत्रिका संबंधी (neurological) और विकास से संबंधित डिसऑर्डर (developmental disorder) है, जिसके लक्षण बच्चों में जन्म से लेकर तीन वर्ष की आयु में नजर आने लगते हैं। इसे स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर इसलिए भी कहते हैं, क्योंकि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से ग्रस्त बच्चों में इसके लक्षण अलग-अलग देखने को मिलते हैं। इस समस्या से पीड़ित बच्चों का विकास तुलनात्मक रूप से धीरे होता है। इसमें बच्चे का मानसिक विकास रुक जाता है। बच्चों में इस समस्या को पहचानकर, इसका निदान और इलाज करना आसान नहीं होता। इसके लिए गहन मूल्यांकन करना होता है। हालांकि, इसके कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जींस (genes) और पर्यावरण इस रोग के होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही बच्चे के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने से भी यह समस्या हो सकती है। बच्चों में एएसडी की समस्या है या नहीं उसे जानने के लिए इन लक्षणों पर गौर किया जा सकता है।

Autism problem in kid 1

जो बच्चे एएसडी से पीड़ित होते हैं, उनमें कुछ भी सीखने-समझने की समस्या देखी जा सकती है। इसमें कोई भी आसान से कार्य जैसे पढ़ना, लिखना, मैथ्स के सवालों को हल करने में उन्हें परेशानी हो सकती है। फिर भी एएसडी से ग्रस्त कुछ बच्चे इन चीजों में तो बहुत अच्छा परफॉर्म करते हैं, लेकिन कुछ दूसरे लर्निंग डिसेबिलिटी जैसे नई भाषा को सीखने में उन्हें समस्या होती है।

Autism problem in kid 2

ऑटिज्म के अन्य लक्ष्णों में शामिल है बातचीत करने में परेशानी। ऐसे बच्चे देर से बातचीत करना शुरू करते हैं। उन्हें बोलने में समस्या होती है। शब्दों या वाक्यों को ठीक से बोलने में समस्या होती है। दो साल का होने के बाद भी यदि आपका बच्चा 11 शब्दों से भी कम शब्द जानता है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।

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Autism problem in kid 3

यदि बच्चा बहुत ज्यादा नखरे और जिद करता है, तो इसे ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD) कहते हैं। ऐसी स्थिति में कई बार बच्चे को काबू में करना भी मुश्किल हो जाता है।

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अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) भी एएसडी का एक लक्षण है। जो बच्चे एडीएचडी से पीड़ित होते हैं, उनमें एकाग्रता और किसी भी काम में ध्यान देने में समस्या आती है। उन्हें काबू में लाना कई बार मुश्किल हो जाता है। उन एक्टिविटीज को करना अधिक पसंद करते हैं, जो उनके उम्र के मुताबिक सही नहीं होते हैं।

Autism problem in kid 5

जब बच्चे को तालमेल बिठाने और चलने-फिरने में समस्या हो, तो हो सकता है वह डिस्प्रैक्सिया की समस्या से जूझ रहा हो। डिस्प्रैक्सिया की अवस्था में बच्चे में मस्तिष्क के विकास से संबंधित समस्याएं नजर आती हैं। यदि आपका बच्चा अकेले रहना चाहता है या अकेले ही खेलता है, तो हो सकता है वह एएसडी से पीड़ित हो।

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वैसे तो बच्चे स्वभाव से ही एक्टिव और तेज-तर्रार होते हैं, लेकिन जो एडीएचडी हाइपरएक्टिव से ग्रस्त होते हैं, वे आमतौर पर किसी एक एक्टिविटी की तरफ ध्यान लगा पना में दिक्कत महसूस करते हैं। ऐसे में उन्हें हमेशा किसी की मदद की जरूरत होती है। ऐसे बच्चे हमेशा चलते रहते हैं।

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बहुत कम ही लोग हैं, जो चाइल्डहुड डिप्रेशन पर बात करते हैं। डिप्रेशन से बच्चे भी प्रभावित होते हैं। यदि बच्चा अकेला महसूस करे, उदास रहे, अलग-थलग रहे या फिर उसके मूड में जबरदस्त बदलाव दिखे, तो इसे हल्के में लेना ठीक नहीं।

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ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चे जल्दी प्रतिक्रिया या जवाब नहीं देते। यदि आप अपने बच्चे से कुछ पूछते हैं और वह जवाब नहीं देता, यह चिंता का विषय हो सकता है।

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Autism problem in kid 9

एएसडी की समस्या होने पर नींद न आना, अनिद्रा भी बहुत कॉमन समस्या है। यदि आपको लगता है कि आपका बच्चा रात में ठीक से नहीं सो पा रहा, तो इस समस्या पर गौर करें।

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जब आप अपने बच्चे को प्यार करना, किस करना या फिर गले लगाना चाहें और वह बार-बार खीझकर मना करे, तो उनके इस तरह के व्यवहार को नजरअंदाज करना ठीक नहीं होगा।