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वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे: इन 6 संकेतों से पहचाने की आपके प्रियजन डिप्रेशन की चपेट में हैं !

आत्महत्या के सबसे ज़्यादा मामलों वाले देशों में भारत का स्थान 30 वां है। 2018 के आंकड़ों के मुतााबिक, भारत में एक लाख लोगों में से 15.7 लोग आत्महत्या करते हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated: October 8, 2018, 11:56 PM

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Depression-and-target

साल 2015 में डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में डिप्रेशन के मरीजों की संख्या पांच करोड़ से ज्यादा है और पूरी दुनिया में डिप्रेशन के कारण सुसाइड करने वालों लोगों में अधिकांश भारतीय ही हैं। इस गंभीर बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित टीनएज ग्रुप के लड़के लड़कियां होते हैं। भारत देश में इन दिनों टीनएज डिप्रेशन से मरने वालों की संख्या काफी बढ़ गयी है। ऐसा भी हो सकता है कि ये यंग लड़के लड़कियां पिछले कई महीनों से डिप्रेशन के मरीज हो और अंत में हताश होकर उन्होंने सुसाइड जैसा कठोर कदम उठाया हो। ऐसे में हमारी ज़िम्मेदारी बनती है कि हम अपने आसपास के लोगों, अपने प्रियजनों और खासकर बच्चों पर नज़र रखें, उनकी परेशानियों और बदलते व्यवहार पर ध्यान दें ताकि उन्हें डिप्रेशन से बाहर निकाला जा सके। यहां हम लिख रहे हैं डिप्रेशन से जुड़े कुछ ऐसे ही लक्षणों के बारे में।

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Insomnia Due To Depression

अच्छी नींद न ले पाना: डिप्रेशन के शिकार लोगों की नींद भी बुरी तरह प्रभावित होने लगती है। अगर आपके यंग बच्चे पिछले कुछ दिनों से ठीक से सो नहीं पा रहे हैं और देर रात तक अकेले जगे रहते हैं तो यह डिप्रेशन का लक्षण है। इसके अलावा अगर वो हद से ज्यादा भी सो रहे है तो ये भी डिप्रेशन का ही लक्षण है। इसलिए अगर बच्चों के स्लीपिंग पैटर्न में बदलाव दिखे तो इसे अनदेखा न करें। Also Read - क्या दिनभर ऑफिस में बैठकर काम करने वालों को भी प्रोटीन चाहिए, अगर हां तो फिर कितना?

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Child-depression Symptoms

किसी चीज में मन न लगना : यह डिप्रेशन का सबसे पहला और मुख्य लक्षण है। अगर आपके बच्चे का मन उसके फेवरेट एक्टिविटी में भी ना लगे और वो अकेला रहने लगे तो समझ लें कि कुछ गड़बड़ है। ऐसे में आप खुद जाकर बच्चे से बातें करें।

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सोशल इंटरेक्शन में कमी : कुछ बच्चे बचपन से ही इंट्रोवर्ट किस्म के होते हैं लेकिन अगर आपका बच्चा पहले से काफी मिलनसार है और उसके खूब सारे दोस्त हैं लेकिन अचानक से वो सबसे मिलना जुलना बंद कर दे और अकेले रहने लगे तो समझ लें कि कुछ गड़बड़ है। ऐसे में उससे बात करें और डॉक्टर से चेकअप करवाएं। Also Read - रोजाना 10 हजार कदम चलना सिर्फ एक अच्छी आदत है या एक्सरसाइज? क्या इससे वजन कम हो सकता है?

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Education

खराब एकेडमिक रिकॉर्ड : टीनएज बच्चे जब डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं तो इसका बुरा प्रभाव उनके पढ़ाई लिखाई पर भी पढ़ता है और वे अपने एग्जाम में अच्छा स्कोर नहीं कर पाते हैं। इसलिए उनके किसी एग्जाम में फेल हो जाने पर आप उन्हें डांटने की बजाय उसका सही कारण जानने की कोशिश करें।

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Signs-of-depression

सुसाइड से जुड़ी बाते करना: आमतौर पर यंग लड़के लड़कियां सुसाइड की बाते नहीं करते हैं। अगर आपका बच्चा पिछले कुछ दिनों से सुसाइड की बाते कर रहा है या उसके बारे में गूगल से जानकारी इकठ्ठा कर रहा है तो ऐसे में जितनी जल्दी हो सके उसे किसी मनोचिकित्सक के पास लेकर जायें। Also Read - मानसून में प्लेटलेट्स की जांच क्यों है जरूरी? जानें Platelet की नॉर्मल रेंज कितनी होनी चाहिए?

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Stress-feeling

मूड स्विंग : टीनएज में मूड स्विंग होना एक आम बात है लेकिन अगर काफी लम्बे समय तक बच्चों का व्यवहार ऐसा बना रहे तो यह ज़रूर चिंता का विषय है। इसलिए अगर आप अपने बच्चे के व्यवहार में ज्यादा अकेलापन या उदासी नोटिस कर रहे हैं तो इसको नजरअंदाज़ करने की बजाय बच्चों से बाते करके उसका सही कारण जानें।