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बच्चेदानी या यूट्रस निकलने के बाद महिलाओं के दिमाग पर कुछ ऐसा होता है असर

भारत में भी इस स्टडी के नतीजे प्रासंगिक हैं। यहां विभिन्न वजहों से महिलाओं में बच्चेदानी हटवाने वाली सर्जरी बढ़ी है। साल 2016 का नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे कहता है कि हिस्टेरेक्टॉमी कराने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से ऊपर गई है, जिनकी उम्र 15 से 49 साल के बीच है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated: April 23, 2019, 9:10 PM

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Mental Effect After Uterus Removal (3)

बच्चेदानी या यूट्रस का काम सिर्फ बच्चे को जन्म देना नहीं है, इसका ताल्लुक महिलाओं की याददाश्त से भी है। हाल ही में एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध ने इसपर मुहर लगा दी। मेडिकल जर्नल एंडोक्राइनोलॉजी में छपी इस स्टडी के अनुसार जो महिलाएं किसी भी वजह से बच्चेदानी हटवाती हैं, उनमें डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी का खतरा बहुत ज्यादा रहता है। इस स्टडी से भारतीय महिलाओं पर भी खतरा मंडरा रहा है क्योंकि यहां हिस्टेरेक्टॉमी यानी बच्चेदानी हटाने के ऑपरेशन का प्रतिशत तेजी से बढ़ा है।

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Mental Effect After Uterus Removal (2)

एएसयू में बिहेवियर न्यूरोसाइंस ऑफ मैमोरी एंड एजिंग लैब के तहत एक स्टडी की गई। ये कहती है कि जैसे ही महिलाएं यूटरस हटाने की सर्जरी कराती हैं, ये उनमें अर्ली मेनोपॉज ला देता है। यही वजह है कि सर्जरी के तुरंत बाद ही कम उम्र में ही महिलाएं भूलने लगती हैं। इसे ब्रेन फॉग भी कहते हैं, जो कि यूटरस से निकलने वाले हॉर्मोन्स की वजह से होता है। इसपर पहले भी काफी शोध हो चुके हैं लेकिन हालिया शोध ने यूटरस-ब्रेन के संबंध को पक्का कर दिया। वैज्ञानिकों ने पाया कि बच्चादानी हटाते ही शॉर्ट-टर्म मैमोरी हो जाती है और समझ पर भी असर पड़ता है। Also Read - बारिश के मौसम में बढ़ जाता है लेप्टोस्पायरोसिस खतरा, जानें क्या हैं इसके लक्षण और कारण

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Mental Effect After Uterus Removal (4)

शोध में शामिल एएसयू के सीनियर वैज्ञानिक डॉ हैदर बाइमोंटे नेल्सन कहते हैं कि हम जानना चाहते थे कि यूटरस का मस्तिष्क से संबंध है या नहीं। इसके लिए लैब में 16 मादा चूहों पर प्रयोग किया गया। इनमें से आधे की बच्चेदानी हटा दी गई, जबकि आधों पर नकली सर्जरी की गई। सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद जिन चूहों की बच्चेदानी हटाई गई थी, उनमें याददाश्त और समझ की कमी देखी गई।

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Mental Effect After Uterus Removal (5)

इससे पहले यूटरस को केवल प्रजनन अंग माना जाता रहा और माना गया कि एक उम्र के बाद इसे हटाने से कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन इसके कॉग्निटिव व्यवहार से संबंध ने वैज्ञानिकों को एक नई दिशा दी है। इस स्टडी से ये बात भी थोड़ी साफ हो रही है कि क्यों पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में डिमेंशिया की बीमारी ज्यादा होती है। डिमेंशिया कंर्सोटियम के अनुसार महिलाओं और पुरुषों में डिमेंशिया का प्रतिशत क्रमशः 61 और 39 प्रतिशत है। Also Read - करियर और परिवार के बीच सेहत को नजरअंदाज कर रही हैं महिलाएं, डॉक्टर ने बताया बढ़ रहा है इन 4 कैंसर का खतरा

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Mental Effect After Uterus Removal (6)

भारत में भी इस स्टडी के नतीजे प्रासंगिक हैं। यहां विभिन्न वजहों से महिलाओं में बच्चेदानी हटवाने वाली सर्जरी बढ़ी है। साल 2016 का नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे कहता है कि हिस्टेरेक्टॉमी कराने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से ऊपर गई है, जिनकी उम्र 15 से 49 साल के बीच है। बच्चेदानी की बीमारियों जैसे सिस्ट, यूटरस के कैंसर, ब्लीडिंग या फिर किसी संक्रमण के होने से डॉक्टर खुद ऐसी सलाह देते हैं लेकिन ये उम्र औसतन 34 साल होनी चाहिए। हालांकि हाल में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिकमंडेड उम्र को नजरअंदाज कर सर्जरी की जा रही है, जो कि कम उम्र में ही महिलाओं को काफी बीमारियां दे रही हैं।