Pneumonia Hinn
घर में रोजाना करने वाले काम जैसे स्टोव पर खाना बनाना, नींद की गोलियां और टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल करने से निमोनिया का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा निमोनिया के कुछ और ऐसे कारण हैं, जिन्हें आप नहीं जानते होंगे। आइए जानते हैं।
Written By: Editorial Team | Updated: January 5, 2017, 8:48 AM
घर में रोजाना करने वाले काम जैसे स्टोव पर खाना बनाना, नींद की गोलियां और टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल करने से निमोनिया का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा निमोनिया के कुछ और ऐसे कारण हैं, जिन्हें आप नहीं जानते होंगे। आइए जानते हैं।
घर में प्रदूषण- अधिकतर महिलाएं और बच्चे अपने ज्यादा समय घर में बिताते हैं, जिससे वो घर में स्पेस हीटर, स्टोव और ईंधन लैंप से निकलने वाले धुएं की चपेट में आ जाते हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, निमोनिया के कारण 5 साल से कम उम्र के 50 फीसदी बच्चों की मौत के पीछे घर का प्रदूषण बताया गया है।
स्लीप एपनिया- कनाडा के मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, स्लीप एपनिया से पीड़ित लोगों को निमोनिया होने का खतरा अधिक होता है। एपनिया में श्वसन प्रणाली का ऊपरी वायुमार्ग निमोनिया के लिए अग्रणी ऑक्सीजन की आपूर्ति को बाधित कर देता है।
अल्कोहल- अल्कोहल की बजह से फेफड़ों में इम्यून सिस्टम फेल हो जाता है, जिस कारण शराबियों को निमोनिया का ज्यादा खतरा होता है। अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पाइरेट्री सेल एण्ड मोलसेक्लूर बायोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि शराब से फेफड़ों में फैट जमा हो जाता है।
टैल्कम पाउडर- अमेरिकन जर्नल ऑफ सर्जिकल पैथोलॉजी के अनुसार, टैल्कम पाउडर के इस्तेमाल से बच्चे को निमोनिया हो सकता है।
पक्षियों के साथ खेलना- एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल कॉलेज साइंस में श्वसन चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टर मानव मनचंदा के अनुसार पक्षियों जैसे कबूतर की बीट से निमोनिया के लक्षण होने के ज्यादा चांस होते हैं।
नींद की गोलियां- इनके लंबे समय तक सेवन से फेफड़ों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एक ब्रिटिश अध्ययन के अनुसार, नींद की गोलियों से दिमाग की क्षमता कम होती है और वायुमार्ग को नुकसान भी पहुंचती हैं।
समय पूर्व जन्म- समय से पहले जन्म लेने बच्चों को कई तरह के रोग होने के ज्यादा खतरा होता है, यहां तक की उनकी मौत भी हो सकती है। उन्हें निमोनिया का भी ज्यादा खतरा होता है।
एसिड टॉयलेट क्लीनर- लीलावती अस्पताल के डॉक्टर जलील पार्कर के अनुसार टॉयलेट क्लीनर में मिला तेजाब और उससे निकलने वाला धुआं और खुशबू श्वसन प्रणाली को नुकसान पहुंचाते हैं।