भारत में तेजी से बढ़ रही फैटी लिवर की बीमारी, पुरुषों में 1.5 गुना ज्यादा खतरा

एक समय था जब अल्कॉहल पीने वालों को फैटी लिवर हुआ करता था, लेकिन आज वह समय है जहां भले ही व्यक्ति ड्रिंक न करता हो, लेकिन फिर भी फैटी लिवर से परेशान है। ऐसा क्यों? आइए डॉक्टर से जानते हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Updated: June 23, 2026, 11:26 AM

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Medically Verified By: Dr. Aparna Govil Bhasker

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भारत में फैटी लिवर की बिमारी क्यों बढ रही हैं?

भारत में हर 3 में से 1 वयस्क फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहा है, लेकिन ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं होती। पहले फैटी लिवर को मुख्य रूप से अत्यधिक शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह उन लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है जो अल्कोहल का सेवन नहीं करते। इसका सबसे बड़ा कारण मोटापा और शरीर की बिगड़ी हुई मेटाबॉलिक सेहत है। खासतौर पर भारतीय पुरुष इस बीमारी का अधिक शिकार हो रहे हैं। आइए मुंबई के एल.एच. हीरानंदानी अस्पताल की बैरिएट्रिक एवं लैपोस्कोपिक सर्जन डॉक्टर अपर्णा गोविल भास्कर से जानते हैं कि आखिर भारत में फैटी लिवर इतना क्यों फैल रहा है।

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यह समस्या कितनी बड़ी है?

डॉक्टर बताती हैं कि नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज, जिसे अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टीयाटोटिक लिवर डिजीज कहा जाता है। यह भारत में बहुत तेजी से बढ़ रही है। 2021 में किए गए नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, लगभग 38.6% भारतीय वयस्कों को फैटी लिवर की समस्या है। जिन लोगों को मोटापा, डायबिटीज या दोनों समस्याएं हैं, उनमें यह बीमारी 52% से भी अधिक पाई जाती है। दक्षिण भारत में गंभीर मोटापे से पीड़ित और वजन कम करने की सर्जरी कराने वाले मरीजों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि लगभग 66% मरीजों को फैटी लिवर था। Also Read - लिवर का कितना हिस्सा Donate कर सकते हैं? कौन बन सकता है Donor? | Dr. Ankur Garg

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पुरुषों में फैटी लिवर होने की संभावना अधिक

कई अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में फैटी लिवर होने की संभावना ज्यादा होती है। चेन्नई के एक बड़े अस्पताल में किए गए अध्ययन के अनुसार, पुरुषों में यह बीमारी होने का खतरा महिलाओं की तुलना में लगभग डेढ़ गुना ज्यादा है। पेट के आसपास जमा चर्बी, इंसुलिन का ठीक से काम न करना (इंसुलिन रेजिस्टेंस) और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसी समस्याएं शहरी भारतीय पुरुषों में ज्यादा देखने को मिलती हैं। यही कारण है कि उनके लिवर में फैट जमा होने का खतरा भी अधिक रहता है।

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मोटापा है सबसे बड़ा कारण

डॉक्टर बताती हैं कि "लिवर केवल खाना पचाने में मदद करने वाला अंग नहीं है, बल्कि यह शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। जब शरीर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है, खासकर पेट के आसपास, तो शरीर उसे पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त चर्बी लिवर में जमा होने लगती है। धीरे-धीरे यह जमा हुआ फैट लिवर में सूजन पैदा करता है।" Also Read - 4 साल व्हीलचेयर पर रही महिला, सेल बेस्ड थेरेपी के बाद फिर चलने लगी

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MASH में बदल सकती है लिवर की समस्या

समय के साथ यह स्थिति और गंभीर होकर मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टीयाटोहेपेटाइटिस (MASH) में बदल सकती है। यह जानकारी डॉक्टर अपर्णा ने दी है। साथ ही वह आगे कहती हैं कि अगर समय रहते इलाज न किया जाए, तो लिवर में घाव या फाइब्रोसिस, सिरोसिस यानी लिवर का गंभीर रूप से खराब होना और कुछ मामलों में लिवर कैंसर तक हो सकता है।

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यह बीमारी खतरनाक क्यों है?

फैटी लिवर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके शुरुआती चरण में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ज्यादातर लोगों को तब तक कोई परेशानी महसूस नहीं होती, जब तक लिवर को काफी नुकसान नहीं पहुंच जाता। यहां तक कि सामान्य लिवर टेस्ट भी कई बार इस बीमारी को नहीं पकड़ पाते। लिवर में फैट जमा होने का पता अक्सर अल्ट्रासाउंड या फाइब्रोस्कैन जैसी जांचों से ही चलता है। कई लोग तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं जब उन्हें लगातार थकान रहने लगती है, पेट में भारीपन महसूस होता है या किसी अन्य जांच के दौरान संयोग से फैटी लिवर का पता चलता Also Read - हार्ट हेल्थ में सुधार करने के लिए रोज खाएं ये 5 नट्स और सीड्स, हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल को रख सकते हैं कंट्रोल

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फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण

अगर आपको लगातार थकान, पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन, कमजोरी, वजन बढ़ना और भूख कम लगने जैसे लक्षण अपने शरीर में दिख रहे हैं तो एक बार डॉक्टर को दिखाएं और लिवर टेस्ट करवाएं। खुद से कोई भी घरेलू नुस्खा न आजमाएं और अगर दवाइयां शुरू होती हैं तो इनका कॉर्स पूरा करें। डिस्क्लेमर: फैटी लिवर एक साइलेंट बीमारी है, जो शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट संकेत नहीं देती। इसलिए मोटापा, डायबिटीज या पेट की चर्बी से जूझ रहे लोगों को नियमित जांच करानी चाहिए, ताकि बीमारी को समय रहते रोका जा सके।