कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए क्या करनी होगी तैयारी, किन बातों पर देना होगा ध्यान, जानें एक्सपर्ट्स की राय

एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कोरोना की संभावित तीसरी लहर, दूसरी लहर की तरह ही बेहद खतरनाक हो सकती है। जानते हैं कुछ एक्सपर्ट्स की राय किस तरह से कोरोना की तीसरी लहर पर काबू पाया जा सकता है, किस तरह की तैयारी होनी चाहिए, ताकि हालात बद से बदतर ना हो जाएं।

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Written By: Anshumala | Updated: August 13, 2021, 6:56 PM

कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए क्या करनी होगी तैयारी, किन बातों पर देना होगा ध्यान, जानें एक्सपर्ट्स की राय photo icon1/5

कोरोना की तीसरी लहर पर काबू पाने के उपाय

How To deal with third wave of Corona: एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगस्त से सितंबर के महीने में कोरोना के मामले फिर से बढ़ सकते हैं, क्योंकि कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) की दूसरी लहर के बाद तीसरी लहर (third wave of Coronavirus) आने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी की जानी चाहिए। डॉक्टर्स के अनुसार, इस लहर से निपटने के लिए मैन पावर एक बड़ा अहम रोल अदा कर सकता है। कोरोना की पहली लहर में मास्क, सैनिटाइजर आदि की किल्लत देखने को मिली थी। वहीं, दूसरी लहर में ऑक्सिजन सिलेंडर, अस्पतालों में बेड की भारी किल्लत हुई, जिसके कारण कई लोगों को जान गंवानी पड़ी। ऐसे में सवाल ये उठता है कि तीसरी लहर में ऐसा क्या किया जाए, जिससे लोगों की जान बचाई जा सके? दूसरी लहर की तरह देश में स्थिति ना बन जाए। कोरोना से निपटने की बेहतर तैयारी करके तीसरी लहर (third wave of Coronavirus in India) में मौतों को कम किया जा सकता है। एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कोरोना की संभावित तीसरी लहर, दूसरी लहर की तरह ही बेहद खतरनाक हो सकती है। इस रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि तीसरी लहर 98 दिन तक चल सकती है। जानते हैं कुछ एक्सपर्ट्स की राय क्या है, किस तरह से कोरोना की तीसरी लहर पर काबू (Ways to deal with 3rd wave of coronavirus) पाया जा सकता है, किस तरह की तैयारी होनी चाहिए, ताकि हालत बद से बदतर ना हो जाए।

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तीसरी महामारी से निपटने के लिए बढ़ानी होगी मैन पावर

जोधपुर एम्स के प्रोफेसर और हेड डॉ. अमित गोयल ने आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि तीसरी लहर (How To deal with third wave of Corona) में बच्चों के प्रभावित होने की बात कही जा रही है, लेकिन बच्चों में इतनी गंभीर बीमारी नहीं होती है। दूसरी लहर में भी बच्चों में गंभीर बीमारी नहीं थी। सबसे जरूरी है कि हॉस्पिटल्स में मैन पावर बढ़ाई जाए। सभी को ये पता है कि देश के स्वास्थ्य कर्मी किन हालातों में काम कर रहें हैं। आम नागरिकों के अलावा हेल्थ वर्कर्स को भी इलाज का प्रोटोकॉल देखकर ही इलाज करना होगा।  Also Read - क्या आपको पता है नींद भी दो प्रकार की होती हैं, आप कौन सी ले रहे हैं?

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तीसरी लहर से निपटने के लिए अस्पतालों में बढ़ाने होंगे आईसीयू बेड

दिल्ली के एलएनजेपी हॉस्पिटल में आपातकालीन विभाग की प्रमुख डॉ. ऋतु सक्सेना के अनुसार, सरकार को तुरंत छोटे-बड़े हॉस्पिटल्स में आईसीयू बेड बढ़ाने की शुरुआत कर देनी चाहिए। सिर्फ बड़े ही नहीं बल्कि छोटे हॉस्पिटल्स में भी तैयारियां अपने लेवल पर की जाना चाहिए। जिस तरह फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग कराई जाती है, उसी तर्ज पर अस्पताल में डॉक्टर, नर्स, सुरक्षा कर्मी इन सभी लोगों को कोविड की ट्रेनिंग करानी चाहिए। इससे लहर से निपटने से आसानी होगी। हर व्यक्ति का इस्तेमाल होना चाहिए। ट्रेंड मैन पावर होना बहुत जरूरी होता है। डेंटिस्ट डॉक्टर्स के साथ ही एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों की भी ट्रेनिंग करानी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें ड्यूटी पर लगाया जा सके।

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कोरोना की तीसरी लहर को नजरअंदाज करना होगा खतरनाक

देशभर में तीसरी लहर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि राज्य सरकारें अपने-अपने लेवल पर तैयारी कर रही हैं। दिल्ली सरकार के अनुसार, पहले ही तैयारियों को तेज कर दिया है। सरकार ने एक टीम भी बनाई है, जो एक्शन प्लान तैयार करेगी। जो भी स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतें होंगी, जैसे बेड, ऑक्सीजन, ड्रग्स आदि इनपर काम किया जाएगा। इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने एक कमिटी और बनाई है, जो तीसरी लहर पर अलग से काम करेगी। Also Read - क्या होता है अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स और इन्हें सिगरेट की तरह खतरनाक क्यों माना गया है?

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बच्चों को बचाना होगा कोरोना की तीसरी लहर से

दिल्ली के अरदेंत गणपति अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अंकित ओम ने आईएएनएस को बताया कि डॉक्टर्स चाहे जैसे भी काम कर लें, लेकिन उन्हें नेगेटिव इम्पैक्ट से बचाना होगा। दूसरी लहर के दौरान स्टाफ, नर्स मैन पावर टूट गई थी। 30 फीसदी लोग 70 फीसदी लोगों का इलाज नहीं कर सकते। ऐसे में तीसरी लहर में अपनी कैपेसिटी से बढ़कर काम करना होगा। हमें बच्चों के इलाज के लिए इक्विपमेंट चाहिए होंगे। बच्चों के इक्विपमेंट इतने उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, वेंटिलेटर चलाने वाले टेक्नीशियंस की कमी होगी, क्योंकि बच्चों की सेटिंग्स अलग होती हैं। बच्चों में कोरोना के लक्षण (Corona symptoms in kids) आते हैं और अस्पतालों के पास बच्चों के इलाज के अनुसार व्यवस्थाएं नहीं हैं, जिन्हें करना बेहद जरूरी है। कई डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स का मानना है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित (third wave of Corona and kids) हो सकती है, लेकिन फिलहाल जल्द से जल्द कोरोना महामारी की तीसरी लहर की तैयारी करनी चाहिए, क्योंकि इस बात की कोई पुष्टि नहीं है कि ये वायरस भविष्य में किस तरह से नुकसान पहुंचा सकता है।

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