Advertisement

वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे 2018: पीलिया जल्दी ठीक होने के लिए फॉलो करें ये 4 आयुर्वेदिक टिप्स

पीलिया या जॉन्डिस दूषित पानी और भोजन से फैलता है।

Written By Sadhna Tiwari
Updated : July 28, 2018 9:52 AM IST

ayurvedic treatment foe jaundice

पीलिया का मुख्य कारण हैपेटाइटिस ए वायरस है जो दूषित पानी या भोजन से फैलता है। इसके लक्षणों में बुखार, बीमारी, पेट दर्द, मतली, सिरदर्द और पीली दस्त शामिल हैं। पीलिया के इलाज के लिए आयुर्वेदिक दवाओं से अच्छे परिणाम दिखते हैं और पीलिया के इलाज के लिए आयुर्वेद में विभिन्न जड़ी बूटियों को शामिल किया जाता है। साथ ही पीलिया होने पर कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाता है।

pitta

पित्त को संतुलित करें- डॉक्टर के अनुसार, चूंकि हेपेटाइटिस ए का और पीलिया का कारण पित्ता का असंतुलन होना है। इसलिए आयुर्वेद शरीर में होमियोस्टेसिस बनाए रखने की सलाह देता है। आयुर्वेद का उद्देश्य शरीर को अन्य दोषों के संतुलन के द्वारा पित्त दोष को संतुलन करना है।

Healthy-liver

हेल्दी डायट लें- आयुर्वेद में लीवर को प्रभावित होने से बचाने के लिए बेहतर खानपान का पालन करना जरूरी बताया गया है। बेहतर खानपान से लीवर पर असर नहीं पड़ता है और खून साफ होता है। आयुर्वेद में पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने के लिए क्या करें और क्या ना करें पर भो जोर दिया जाता है।

Advertisement

fatigue hindi

दर्द से राहत- पीलिया के दौरान रोगियों को पेट दर्द की समस्या रहती है। भूमि अम्लाकी जैसी जड़ी-बूटियां इससे निपटने में मददगार हैं। इनकें एंटीबैक्टीरियल, एंटीस्पास्मोडिक और एनाल्जेसिक गुण हैं, जो न केवल परेशानी पैदा करने वाले कारणों को खत्म करती हैं बल्कि रोगियों में दर्द को भी कम करती हैं।

jaundice

पित्त शरीर के बाहर निकालना- पीलिया के लिए आयुर्वेदिक उपचार का लक्ष्य शरीर से अधिक पित्त को निकालना है जो शरीर पर अधिक बोझ बना सकता है। लीवर को स्वस्थ होने के लिए पर्याप्त समय देकर, जड़ी बूटियां मूत्रवर्धक के रूप में कार्य करती हैं और शरीर में सूजन को कम करती हैं।