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साधारण एनिमिया और थैलेसीमिया में क्या अंतर है? डॉक्टर से जानिए Thalassemia से बचाव के उपाय

Thalassemia And Anemia Difference: थैलेसीमिया और एनिमिया दोनों ही खून से जुड़े हुए विकार हैं। लेकिन, इनमें कितना अंतर है,पढ़ें यहां।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated: May 8, 2025, 10:59 PM

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क्या एनिमिया और थैलेसीमिया एक ही हैं?

थैलेसीमिया ब्लड से जुड़ा हुआ एक डिसॉर्डर है। यह एनिमिया का ही एक गम्भीर प्रकार है लेकिन यह साधारण एनिमिया से अलग है। इन दोनों ही बीमारियों के बारे में लोग अक्सर उलझन में रहते हैं लेकिन, थैलेसीमिया और साधारण एनिमिया एक-दूसरे से बहुत अलग हैं। बता दें कि शरीर में रक्त की कमी हो जाने के बाद मरीज कमजोरी, थकान और अन्य तरह की समस्याएं महसूस करता है। इलाज की कमी के चलते दोनों ही बीमारियां जानलेवा भी साबित हो सकती हैं। आइए डॉक्टरों की मदद से इन दोनों बीमारियों में अंतर को समझें।

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एनिमिया क्यो होता है?

शरीर में लौहतत्व या आयरन का लेवल कम हो जाने पर मरीज में एनिमिया की समस्या देखी जाती है। आयरन कम होने से शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा भी कम हो जाती है। हीमोग्लोबिन शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसीलिए, हीमोग्लोबिन कम होने से शरीर में कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं।  Also Read - शादी से पहले थैलेसीमिया टेस्ट क्यों कराना चाहिए? जानें बच्चों तक कैसे पहुंचता है यह रोग

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थैलेसीमिया के कारण

थैलेसीमिया एक जेनेटिक समस्या है। यह मां-बाप से बच्चों में ट्रांसफर होती है और इस बीमारी में मरीज के शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हमेशा रहती है।

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नहीं है थैलेसीमिया का स्थायी इलाज

थैलेसीमिया की बीमारी माइनर और मेजर इन 2 प्रकार की होती है। माइनर होने पर मरीज को कम समस्याएं होती हैं। वहीं, मेजर थैलीसीमिया के मरीजों में गम्भीर लक्षण दिखायी देते हैं और उन्हें हमेशा डॉक्टरी मदद की जरूरत पड़ सकती है। Also Read - भारत में रोजाना दर्ज होते हैं थैलेसीमिया के 25-40 मामले, बीमारी के बोझ तले दब रहा है भारत

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थैलेसीमिया से बचाव के उपाय

जैसा कि थैलेसीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है इसीलिए, सलाह दी जाती है दो थैलेसीमिया कैरियर को शादी करने से पहले अपने अपना ब्लड टेस्ट जरूर कराना चाहिए। इसी तरह हर कपल को शादी से पहले और गर्भधारण से पहले थैलेसीमिया का रिस्क जानने के लिए जरूरी ब्लड टेस्ट कराने चाहिए।

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भारत में थैलेसीमिया

थैलेसीमिया के मरीजों की संख्या भारत में चिंताजनक है। आंकड़ों के अनुसार हर साल भारत में 10 हजार से अधिक थैलेसीमिया मेजर बच्चे जन्म लेते हैं।  Also Read - शरीर से ज्यादा थकता है मन, जानें कैसे पड़ता है थैलेसीमिया का साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट