पाइल्स और फिशर के बीच अंतर
पाइल्स या बवासीर (piles in hindi), फिशर और फिस्टुला जैसी बीमारियां बहुत तकलीफभरी होती हैं और लोगों को इनकी वजह से बहुत असुविधा भी होती है। लेकिन, डॉ. लवकेश आनंदी (Dr. Lovkesh Anandi) के अनुसार, ज्यादातर लोग शरीर के निचले हिस्से में दर्द या परेशानी का कारण पहचान नहीं पाते। वो पाइल्स और फिशर के बीच अंतर नहीं समझ पाते। पाइल्स और फिशर, दोनों के लक्षण समान होते हैं। ये दोनों स्थितियां सामान्य हैं और ज्यादातर मामलों में रक्तस्राव किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा नहीं करता। लेकिन गुदा से होने वाले रक्तस्राव की तत्काल जांच करानी चाहिए क्योंकि कुछ मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। आमतौर से डॉक्टर गुदा की स्थिति को नजर से देखकर या फिर उंगली द्वारा प्रभावित हिस्से की जांच करके स्थिति का निदान कर लेते हैं। लेकिन इन दोनों स्थितियों के बीच अंतर करने के लिए कोलोनोस्कोपी या सिग्मॉयडोस्कोपी कराई जा सकती है। जब किसी व्यक्ति को गुदा क्षेत्र में दर्द या परेशानी महसूस होती है, या उसे मल में या टॉयलेट पेपर पर खून दिखता है, उसे बवासीर होने का संदेह होता है। पाइल्स लंबे समय तक कब्ज बने रहने या फिर घंटों तक बैठे रहने के कारण गुदा क्षेत्र या गुदा की नली पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव के कारण रक्तवाहिनियों या टिश्यू के बढ़ने की वजह से होता है। फिशर गुदा या फिर गुदा द्वार के आसपास त्वचा के फटने के कारण होता है।