पाइल्स (बवासीर) और फिशर में क्या अंतर है, जानिए कौन सी बीमारी देती है ज्यादा तकलीफ

पाइल्स और फिशर के लक्षण एक जैसे दिखायी देते हैं। यही वजह है कि लोग दोनों के बीच के फर्क को समझ नहीं पाते और उसका इलाज भी गलत तरीके से कराते हैं।

Written by Atul Modi | Updated : June 16, 2022 5:42 PM IST

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पाइल्स और फिशर के बीच अंतर

पाइल्स या बवासीर (piles in hindi), फिशर और फिस्टुला जैसी बीमारियां बहुत तकलीफभरी होती हैं और लोगों को इनकी वजह से बहुत असुविधा भी होती है। लेकिन, डॉ. लवकेश आनंदी (Dr. Lovkesh Anandi) के अनुसार, ज्यादातर लोग शरीर के निचले हिस्से में दर्द या परेशानी का कारण पहचान नहीं पाते। वो पाइल्स और फिशर के बीच अंतर नहीं समझ पाते। पाइल्स और फिशर, दोनों के लक्षण समान होते हैं। ये दोनों स्थितियां सामान्य हैं और ज्यादातर मामलों में रक्तस्राव किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा नहीं करता। लेकिन गुदा से होने वाले रक्तस्राव की तत्काल जांच करानी चाहिए क्योंकि कुछ मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। आमतौर से डॉक्टर गुदा की स्थिति को नजर से देखकर या फिर उंगली द्वारा प्रभावित हिस्से की जांच करके स्थिति का निदान कर लेते हैं। लेकिन इन दोनों स्थितियों के बीच अंतर करने के लिए कोलोनोस्कोपी या सिग्मॉयडोस्कोपी कराई जा सकती है। जब किसी व्यक्ति को गुदा क्षेत्र में दर्द या परेशानी महसूस होती है, या उसे मल में या टॉयलेट पेपर पर खून दिखता है, उसे बवासीर होने का संदेह होता है। पाइल्स लंबे समय तक कब्ज बने रहने या फिर घंटों तक बैठे रहने के कारण गुदा क्षेत्र या गुदा की नली पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव के कारण रक्तवाहिनियों या टिश्यू के बढ़ने की वजह से होता है। फिशर गुदा या फिर गुदा द्वार के आसपास त्वचा के फटने के कारण होता है।

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पाइल्स और फिशर के लक्षण

पाइल्स के लक्षणों (symptoms of piles in hindi) में गुदा के क्षेत्र में खुजली या चुभन शामिल है, गुदा द्वार को पोंछने के बाद अंडरवियर या टॉयलेट पेपर में चिपचिपा म्यूकस, दर्द या परेशानी, गुदा द्वार के आसपास सूजन या रक्तस्राव शामिल है। दूसरी तरफ, फिशर में तेज पीड़ा होती है, जो मल निकलने के साथ शुरू होती है। यह दर्द कुछ मिनट से लेकर कुछ घंटों तक रह सकता है। परिणामस्वरूप, दर्द से बचने के लिए कुछ मरीज मलत्याग करने से कतराने लगते हैं। फिशर के शुरुआती चरण में रक्तस्राव बहुत बिरले ही देखने को मिलता है। गुदा फिशर के पास, खासकर लंबे समय तक बने रहने पर, एक छोटी सी गांठ या त्वचा पर टैग अक्सर बन जाते हैं। मल त्याग के दौरान ज्यादा दबाव डालने, टॉयलेट पर लंबे समय तक बैठे रहने, पुराने डायरिया या कब्ज, पुरानी खांसी, मोटापा, नियमित रूप से भारी वजन उठाने, और गर्भावस्था में गुदा क्षेत्र की नसों पर काफी दबाव पड़ता है, जिससे पाइल्स हो जाता है। गुदा फिशर के आम कारणों में बड़े व कठोर मल का निकलना, कब्ज और मल त्याग के दौरान दबाव, पुराना डायरिया, गुदा मैथुन करना और प्रसव शामिल हैं। गुदा फिशर के कम सामान्य लक्षणों में क्रोह्न रोग या कोई अन्य पीड़ादायक आंत रोग, गुदा का कैंसर, एचआईवी, ट्यूबरकुलोसिस और सिफिलिस शालि हैं। Also Read - Weight Loss Alert: क्या कॉफी है सबसे सस्ता फैट बर्नर?

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पाइल्स और फिशर में से ज्यादा गंभीर क्या है?

आमतौर से पाइल्स गंभीर नहीं होते। वो कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। यदि पाइल्स खुद ठीक न हों, तो उनका इलाज (treatment of piles in hindi) काउंटर मेडिसीन, घरेलू दवाईयों से या फिर कुछ मामलों में मिनिमली इन्वेज़िव सर्जरी द्वारा हो जाता है। दूसरी तरफ फिशर ठीक नहीं हो पाता, दोबारा हो सकता है या फिर आस-पास की पेशियों में फैल सकता है, जिससे इसे ठीक करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए, कई मामलों में, दवाई और सर्जिकल प्रक्रिया, जैसे लेटरल स्फिंकटेरोटोमी की जरूरत पड़ सकती हैं।

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पाइल्स का इलाज

शुरुआती चरण में पाइल्स दवाई, सेहतमंद, उच्च फाइबर वाले आहार, एवं पूरा दिन ढेर सारा पानी पीने से ठीक हो सकता है। आईस पैक या ठंडे पानी से तत्काल राहत मिलती है, लेकिन केवल थोड़े समय के लिए दर्द में। निरंतर रक्तस्राव या पीड़ादायक बवासीर के लिए डॉक्टर मिनिमली इन्वेज़िस प्रोसीज़र, जैसे बैंड लिगेशन, इंजेक्शन स्क्लेरोथेरेपी या कोएगुलेशन तकनीकों का परामर्श दे सकता है। ये उपचार डॉक्टर के ऑफ़िस या अन्य आउटपेशेंट परिवेश में किए जा सकते हैं और इनके लिए एनेस्थेसिया दिए जाने की जरूरत नहीं होती। बवासीर से पीड़ित बहुत कम लोगों को हेमरॉयडेक्टोमी या हेमरॉयड स्टेप्लिंग जैसी हेमरॉयड रिमूवल सर्जरी की जरूरत पड़ती है। Also Read - पित्त को संतुलित करने के लिए क्या खाएं? जानें ठंडी तासीर की चीजों की लिस्ट

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फिशर का इलाज

फिशर का इलाज मल को मुलायम बनाकर गुदा के स्फिंक्टर को आराम देकर किया जाता है। गुदा के ज्यादातर फिशर सरल इलाज, जैसे फाईबर ज्यादा खाने और सिट्ज़ बाथ द्वारा ठीक हो जाते हैं। गुदा के फिशर से पीड़ित कुछ लोगों को दवाई, या कभी-कभी, सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। यदि गुदा का फिशर आठ हफ्तों में ठीक नहीं हो पाता, तो उसे पुराना फिशर कहा जाता है और उसका इलाज किए जाने की जरूरत होती है। एक्यूट फिशर से पीड़ित व्यक्ति को सर्जरी कराने का परामर्श दिया जाता है। सर्जरी के विकल्पों में गुदा के स्फिंक्टर में बॉटुलिनम टॉक्सिन (बोटोक्स) इंजेक्शन या गुदा के स्फिंक्टर के अंदरूनी हिस्से में सर्जिकल डिवीज़न (लेटरल इंटरनल स्फिंक्टेरोटोमी) शामिल हैं। मेडिकल और सर्जिकल उपचारों के बाद पूरी तरह से ठीक होने में 6 से 10 हफ्ते लग सकते हैं। दर्द और रक्तस्राव कम हो जाने के बाद भी आंतों का स्वास्थ्य बनाकर रखना और उच्च फाईबरयुक्त आहार का लिया जाना जरूरी है।

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पाइल्स और फिशर का रोकथाम कैसे करें?

रोकथाम का उपाय उचित आहार का लिया जाना और मल को मुलायम रखने की आदतों का विकास करना जरूरी है, ताकि आंतों पर दबाव न पड़े। रोज उच्च फइबरयुक्त आहार (फल, सब्जियां, फलियां और खड़े अनाज) खाएं और पर्याप्त पानी (8 से 10 ग्लास प्रतिदिन) पिएं। मल त्याग करने के लिए जल्दी न करें या जोर न लगाएं। लंबे समय तक टॉयलेट में बैठने से बचें। मल त्याग करने के बाद जोर से न पोंछें (जलन कम करने के लिए) और नियमित रूप से व्यायाम करें। (इनपुट्स: डॉ. लवकेश आनंदी, विभागाध्यक्ष - हेपेटोलॉजी | सलाहकार - गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एचसीएमसीटी मणिपाल अस्पताल, द्वारका) Also Read - इमरान खान की दाईं आंख की 85% रोशनी खत्म, क्या वाकई खतरे में है पाकिस्तान के पूर्व पीएम की सेहत?