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नाजुक होती हैं बच्चों की आंखें, दिखें ये लक्षण तो तुरंत कराएं जांच

Written By Yogita Yadav
Updated : October 4, 2018 4:22 PM IST

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बच्चों की आंखें वयस्कों से भी ज्यादा नाजुक होती हैं। इन दिनों गलत आदतों और जीवनशैली के कारण ज्यादातर बच्चों को निकट दृष्टि दोष के मामले देखे जा रहे हैं। आजकल शहरो में रहने वाले बहुत से बच्चों की आंखों में 10 साल की उम्र से पहले ही चश्मा चढ़ जाता है। कई संकेतों से शुरुआत में ही जान सकते हैं आंखों की समस्या के बारे में। अगर आपको भी बच्चेश में नजर आएं ये लक्षण तो जरूर करवाएं उसकी आंखों की जांच।

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1: कमजोर हो गई है नजदीक की नजर : बच्चों में दृष्टि दोष के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। खासतौर पर निकट दृष्टिदोष, जिसमें नजदीक की वस्तुएं साफ दिखाई नहीं देती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन समस्याओं से बचाव के लिये बच्चों में आंखों की नियमित जांच जरूरी है, साथ ही पढ़ने का सही तरीका, प्राकृतिक रोशनी और स्क्रीन पर कम समय बिताना जरूरी है।

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2: एक आंख का घूमना या किसी और दिशा में देखना भी एक संकेत है कि बच्चेम की आंख ठीक नहीं है। अमूमन बच्चे आंखों में दिक्ककत के कारण बार-बार आंख घुमाते हैं। कभी उन्हेंश पढ़ने में दिक्कंत होती है तब भी वे ऐसा करते हैं। कई बार भेंगापन होने के भी यही संकेत होते हैं।

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3: बच्चों की आंख बार-बार झपकना, टीवी देखते वक्त या फिर किताब पढ़ते समय आंख मसलते रहना। यह आदत ज्याीदातर बच्चोंत में दिखाई देती है। यह आंखों के थक जाने के संकेत हैं। थक जाने पर आंखों में ड्राईनैस हो जाती है, जिसकी वजह से बच्चेै आंखें मसलने लगते हैं।

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4: सही न देख पाना या हाथ से वस्तुओं का बार-बार गिर जाना आदि। कई बार आप कुछ करने को कहे और बच्चाह उसे ठीक तरह से न कर पाए तो उसका एक कारण दृष्टि केंद्रित न कर पाना भी हो सकता है। कई बार बच्चेी चीजें ठीक से नहीं रख पाते और गिरा देते हैं।

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5: चीजों को बहुत नज़दीक लाकर देखना। यह नजर कमजोर होने का सबसे सामान्यन संकेत है। कई बार आंखों की रोशनी ठीक होती है, परंतु गलत तरीके से पढ़ने और उठने-बैठने से आंखों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में भी आंखों की जांच करवानी चाहिए।